बरेली: एमडीआर शुल्क का विरोध, व्यापारियों ने लिया बड़ा फैसला, कल मनाया जाएगा 'नो यूपीआई डे'
बरेली में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने बृहस्पतिवार को डेलापीर मंडी स्थित कार्यालय पर विभिन्न व्यापारिक एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों के साथ अहम बैठक की। इसमें यूपीआई पर एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) का विरोध किया गया।
विस्तार
बरेली में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने यूपीआई पर लगाए गए 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क का कड़ा विरोध किया। व्यापारियों ने शुक्रवार दो अक्तूबर को 'नो यूपीआई डे' मनाने का आह्वान किया है, जिसके तहत यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं किए जाएंगे। बृहस्पतिवार को विभिन्न व्यापारिक एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में यह फैसला लिया गया।
प्रांतीय संयुक्त महामंत्री राजेश जसोरिया ने कहा कि व्यापारी सरकार के खजाने को भरने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब व्यापारियों पर नया शुल्क थोप रही है। यह 0.4 प्रतिशत शुल्क व्यापारियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं पर भी असर डालेगा। इससे मुख्य धारा में आए व्यापारियों को वापस नकद लेनदेन की ओर लौटना पड़ेगा।
बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी
वरिष्ठ उपाध्यक्ष दुर्गेश खटवानी ने बैंकों की मनमानी पर रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बैंक हर सेवा पर अत्यधिक शुल्क वसूल रहे हैं। नकद जमा करने, न्यूनतम शेष कम होने, खाता रखरखाव, विवरण लेने, एसएमएस अलर्ट और बीमा के नाम पर पैसे काटे जा रहे हैं। मंडलीय युवा अध्यक्ष शुभम अग्रवाल ने चेतावनी दी कि व्यापारियों की मौन स्वीकृति को कमजोरी न समझा जाए। जरूरत पड़ने पर एमडीआर के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
'नो यूपीआई डे' का एलान
व्यापारियों के आह्वान पर शुक्रवार दो अक्तूबर को 'नो यूपीआई डे' मनाया जाएगा। इस दिन कोई भी व्यापारी यूपीआई से भुगतान स्वीकार नहीं करेगा। प्रांतीय महामंत्री राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह फैसला अभी कम व्यापारियों को प्रभावित कर सकता है। लेकिन हर व्यापारी को संरक्षित करना आवश्यक है। नकद लेनदेन बढ़ने से सीधे तौर पर जीएसटी संग्रह प्रभावित होगा।
बैंकों पर मनमानी का आरोप
दुर्गेश खटवानी ने बैंकों पर कई सेवाओं के लिए अनुचित शुल्क वसूलने का आरोप लगाया। इनमें नकद जमा, न्यूनतम शेष, खाता रखरखाव और विवरण प्राप्त करना शामिल है। एसएमएस अलर्ट और बीमा के नाम पर भी बिना सहमति के पैसे काटे जा रहे हैं। व्यापारियों ने इन शुल्कों को तुरंत वापस लेने की मांग की है।