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Bareilly News: नाला निर्माण में जमे हुए सीमेंट का प्रयोग, लगा जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Thu, 30 Apr 2026 02:35 AM IST
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बरेली। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 37 में चल रहे विकास कार्यों में लापरवाही और घटिया निर्माण सामग्री का मामला सामने आया है। रामपुर रोड स्थित पिंक सिटी कॉलोनी से महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज तक बन रहे आरसीसी नाले के निर्माण में जमे हुए सीमेंट का प्रयोग करने पर नगर निगम प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। ठेकेदार को नोटिस जारी करते हुए उस पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।
नगर निगम के सहायक अभियंता मुकेश शाक्य ने बताया कि नाला निर्माण का ठेका पीजी कॉन्ट्रैक्टर को दिया गया था। निर्माण में शिकायत मिलने पर मौके पर जाकर जांच की गई तो पाया कि ठेकेदार नाला निर्माण में जमे हुए सीमेंट का प्रयोग कर रहा है। नोटिस देने के बाद भी जब ठेकेदार ने जवाब नहीं दिया तो दूसरा नोटिस जारी करते हुए 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत इस नाले के निर्माण की स्वीकृति नगर आयुक्त संजीव मौर्य ने इसी साल 17 जनवरी को दी थी, इसका कार्य 18 जुलाई तक पूर्ण किया जाना था। हालांकि, 10 अप्रैल को क्षेत्रीय अवर अभियंता की ओर से किए गए स्थलीय निरीक्षण में भारी अनियमितता पाई गई। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि निर्माण कार्य में जमे हुए सीमेंट का प्रयोग किया जा रहा है, जो पूरी तरह से अधोमानक की श्रेणी में आता है। नगर निगम ने इसे अनुबंध की शर्तों का खुला उल्लंघन और फर्म का मनमाना रवैया माना है।
इससे पूर्व 16 अप्रैल को भी फर्म को नोटिस भेजा गया था, लेकिन सुधार न होने पर अब विभाग ने कठोर दंडात्मक कार्रवाई की है। सहायक अभियंता ने बताया कि यदि नोटिस मिलने के बाद भी कार्य की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ और मानकों के अनुरूप सामग्री का प्रयोग सुनिश्चित नहीं किया गया, तो फर्म के विरुद्ध विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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नगर निगम के सहायक अभियंता मुकेश शाक्य ने बताया कि नाला निर्माण का ठेका पीजी कॉन्ट्रैक्टर को दिया गया था। निर्माण में शिकायत मिलने पर मौके पर जाकर जांच की गई तो पाया कि ठेकेदार नाला निर्माण में जमे हुए सीमेंट का प्रयोग कर रहा है। नोटिस देने के बाद भी जब ठेकेदार ने जवाब नहीं दिया तो दूसरा नोटिस जारी करते हुए 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत इस नाले के निर्माण की स्वीकृति नगर आयुक्त संजीव मौर्य ने इसी साल 17 जनवरी को दी थी, इसका कार्य 18 जुलाई तक पूर्ण किया जाना था। हालांकि, 10 अप्रैल को क्षेत्रीय अवर अभियंता की ओर से किए गए स्थलीय निरीक्षण में भारी अनियमितता पाई गई। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि निर्माण कार्य में जमे हुए सीमेंट का प्रयोग किया जा रहा है, जो पूरी तरह से अधोमानक की श्रेणी में आता है। नगर निगम ने इसे अनुबंध की शर्तों का खुला उल्लंघन और फर्म का मनमाना रवैया माना है।
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इससे पूर्व 16 अप्रैल को भी फर्म को नोटिस भेजा गया था, लेकिन सुधार न होने पर अब विभाग ने कठोर दंडात्मक कार्रवाई की है। सहायक अभियंता ने बताया कि यदि नोटिस मिलने के बाद भी कार्य की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ और मानकों के अनुरूप सामग्री का प्रयोग सुनिश्चित नहीं किया गया, तो फर्म के विरुद्ध विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
