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Basti News: श्रीरामलीला महोत्सव में प्रतिभागी 650 बाल कलाकार सम्मानित
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श्रीरामलीला महोत्सव के बाल कलाकारों को सम्मानित किया गया-स्रोत आयोजक
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बस्ती। सनातन धर्म संस्था, बस्ती द्वारा आयोजित श्रीरामलीला महोत्सव बस्ती के प्रतिभागी बच्चों, प्रशिक्षकों एवं सहयोगी विद्यालयों के सम्मान में भव्य पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन अटल बिहारी वाजपेयी प्रेक्षागृह बस्ती में संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्रीरामलीला महोत्सव में प्रतिभाग करने वाले लगभग 650 बाल कलाकारों को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. बृजेश यादव ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन प्रत्येक मानव के लिए आदर्श है। उन्होंने कहा कि श्रीराम का चरित्र हमें सिखाता है कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को धैर्य और समभाव नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने भगवान राम के वनवास प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस राजकुमार को अगले दिन युवराज बनने की घोषणा हो चुकी हो, उसी को अगले ही दिन वनवास का आदेश मिल जाए और फिर भी उसके मन में न अत्यधिक हर्ष हो और न विषाद यह केवल भगवान श्रीराम के जीवन से ही सीखना संभव है।
उन्होंने कहा कि राजसी वस्त्र, वैभव और सिंहासन छोड़कर भगवान राम जिस सहजता से वन की ओर निकल पड़े, वह संसार को कर्मपथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। इससे पूर्व डॉ. बृजेश यादव, कर्नल के सी मिश्र, महंत बाल योगी दीनानाथ जी महाराज, डॉ अश्विनी सिंह ने दीप प्रज्वलित कर एवं भगवान श्रीराम के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके पश्चात सभागार में उपस्थित पांच सौ से अधिक बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं अतिथियों ने सामूहिक रूप से श्रीराम स्तुति का पाठ किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
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इस अवसर पर एमपी दुबे, सत्य प्रकाश सिंह, डॉ. शैलेश सिंह, मनीष सिंह, अर्पित गौड़, पूजा, मान्यता, डॉ. देवानंद सिंह, अंकुर यादव, भोलानाथ चौधरी, ओमकार मिश्र, डॉ डी के गुप्ता, राजेश मिश्र, संतोष श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
मुख्य अतिथि डॉ. बृजेश यादव ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन प्रत्येक मानव के लिए आदर्श है। उन्होंने कहा कि श्रीराम का चरित्र हमें सिखाता है कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को धैर्य और समभाव नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने भगवान राम के वनवास प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस राजकुमार को अगले दिन युवराज बनने की घोषणा हो चुकी हो, उसी को अगले ही दिन वनवास का आदेश मिल जाए और फिर भी उसके मन में न अत्यधिक हर्ष हो और न विषाद यह केवल भगवान श्रीराम के जीवन से ही सीखना संभव है।
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उन्होंने कहा कि राजसी वस्त्र, वैभव और सिंहासन छोड़कर भगवान राम जिस सहजता से वन की ओर निकल पड़े, वह संसार को कर्मपथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। इससे पूर्व डॉ. बृजेश यादव, कर्नल के सी मिश्र, महंत बाल योगी दीनानाथ जी महाराज, डॉ अश्विनी सिंह ने दीप प्रज्वलित कर एवं भगवान श्रीराम के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके पश्चात सभागार में उपस्थित पांच सौ से अधिक बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं अतिथियों ने सामूहिक रूप से श्रीराम स्तुति का पाठ किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
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इस अवसर पर एमपी दुबे, सत्य प्रकाश सिंह, डॉ. शैलेश सिंह, मनीष सिंह, अर्पित गौड़, पूजा, मान्यता, डॉ. देवानंद सिंह, अंकुर यादव, भोलानाथ चौधरी, ओमकार मिश्र, डॉ डी के गुप्ता, राजेश मिश्र, संतोष श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।