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Basti News: 84 कोसी परिक्रमा...हनुमान बाग चकोही में साधु-संतों ने डाला डेरा
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 05 Apr 2026 12:05 AM IST
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84 कोसी परिक्रमा के दौरान रामजानकी मार्ग पर पैदल चल रहे श्रद्धालु। संवाद
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दुबौलिया। अयोध्या के 84 कोसी परिक्रमा में शामिल साधु-संतों का जत्था द्वितीय पड़ाव स्थल दुबौलिया ब्लॉक के हनुमान बाग चकोही मंदिर में पहुंच चुका है। यहां शनिवार को भोर से ही श्रद्धालुओं के आने का क्रम शुरू हो गया। स्थानीय लोगों ने ढोल-नगाड़ा के धुन में श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा करते नजर आए। देर शाम तक मंदिर परिसर राम नाम के संकीर्तन से गूंजने लगा। यहां रात्रि विश्राम करने के बाद अगले दिन रविवार को सुबह श्रद्धालु शृंगी ऋषि आश्रम के लिए प्रस्थान करेंगे।
84 कोसी परिक्रमा यात्रा शुक्रवार को मखौड़ा धाम से प्रारंभ हुई है। इसी दिन शाम को प्रथम पड़ाव स्थल रामरेखा छावनी में श्रद्धालु विश्राम किए। दूसरे दिन शनिवार को भोर से श्रद्धालुओं का रेला रामजानकी मार्ग पर पैदल आगे बढ़ने लगा। रास्ते भर जय श्री राम का उद्घोष हो रहा था। यह यात्रा विशेषरगंज, कसैला बाबू, समौड़ा के रास्ते होते हुए हनुमान बाग चकोही मंदिर पहुंची। श्रद्धालु यात्रा में नंगे पांव गाजे बाजे के साथ सीता-राम का संकीर्तन करते हुए चल रहे हैं।
परिक्रमा की अगुवाई संत बाबा गयादास, गयाशरण दास, ओंकार दास कर रहे हैं। इनके नेतृत्व में देश के विभिन्न प्रदेशों के करीब 1200 संत गृहस्थ परिक्रमा में शामिल हैं। इसमें नेपाल के भी छह श्रद्धालु शामिल हैं। हनुमानबाग चकोही में सभी श्रद्धालु रात्रि विश्राम करेंगे। यहां सेवादारों की भीड़ लगी हुई है। रविवार को सुबह यह यात्रा बरसांव, पूरेओरीराय राय, सुविका बाबू गांव होते हुए सरयू नदी पार कर अयोध्या जिले के तृतीय पड़ाव स्थल श्रृंगी ऋषि के आश्रम के लिए रवाना होगी। महंत गयादास ने कहा चौरासी कोशी परिक्रमा का महत्व पुराणों में वर्णित है।
कहा जाता है कि अयोध्या धाम में संतों व स्थानीय जनमानस की ओर से तीन परिक्रमा की जाती है। जिसमे चौरासी कोसी परिक्रमा विशेष है। 14 कोसी और पंच कोसी परिक्रमा अयोध्या धाम से शुरू होती हैं। चौरासी कोसी परिक्रमा में श्रद्धालु अयोध्या, बस्ती व फिर अयोध्या व इसके बाद बाराबंकी के दरियाबाद, टिकैतनगर होते हुए गोंडा जनपद में प्रवेश करते है। इसके बाद यह यात्रा गोंडा के नवाबगंज होते हुए अयोध्या धाम प्रवेश करती है। इसके बाद मखौड़ा धाम में आकर समाप्त होती है।
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अयोध्या के उत्तरी द्वार के रूप में प्रसिद्ध हैं हनुमानबाग चकोही
दुबौलिया ब्लॉक के हनुमानबाग चकोही नामक स्थल त्रेताकाल की अयोध्या का उत्तरी द्वार कहा जाता है। मान्यता हैं हनुमान जी यहीं रहकर अयोध्या की सुरक्षा करते थे। इसीलिए यहां हनुमान जी का मंदिर भी बनाया गया। 84 कोसी परिक्रमा के इस दूसरे पड़ाव स्थल पर साधु-संतों के विश्राम के दौरान हर वर्ष यहां मेला लगता है।
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स्वास्थ्य टीम ने किया परीक्षण
84 कोसी परिक्रमा में शामिल साधु संतों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के लिए प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य टीम भेजी गई। इस दौरान सीएचसी प्रभारी सुशील कुमार, डॉ. प्रणवीर सिंह एवं चिकित्सकों ने श्रद्धालुओं का परीक्षण कर उन्हें आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध कराई। वहीं स्थानीय लोगों ने परिक्रमा मार्ग पर जगह-जगह साधु-संतों के लिए जलपान, भंडारा का भी आयोजन किया। हनुमान बाग मंदिर परिसर में भी विशाल भंडारा चलता रहा। इस दौरान थानाध्यक्ष दुबौलिया जीवन त्रिपाठी मयफोर्स सुरक्षा व्यवस्था चौकस करने में जुटे रहे।
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84 कोसी परिक्रमा यात्रा शुक्रवार को मखौड़ा धाम से प्रारंभ हुई है। इसी दिन शाम को प्रथम पड़ाव स्थल रामरेखा छावनी में श्रद्धालु विश्राम किए। दूसरे दिन शनिवार को भोर से श्रद्धालुओं का रेला रामजानकी मार्ग पर पैदल आगे बढ़ने लगा। रास्ते भर जय श्री राम का उद्घोष हो रहा था। यह यात्रा विशेषरगंज, कसैला बाबू, समौड़ा के रास्ते होते हुए हनुमान बाग चकोही मंदिर पहुंची। श्रद्धालु यात्रा में नंगे पांव गाजे बाजे के साथ सीता-राम का संकीर्तन करते हुए चल रहे हैं।
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परिक्रमा की अगुवाई संत बाबा गयादास, गयाशरण दास, ओंकार दास कर रहे हैं। इनके नेतृत्व में देश के विभिन्न प्रदेशों के करीब 1200 संत गृहस्थ परिक्रमा में शामिल हैं। इसमें नेपाल के भी छह श्रद्धालु शामिल हैं। हनुमानबाग चकोही में सभी श्रद्धालु रात्रि विश्राम करेंगे। यहां सेवादारों की भीड़ लगी हुई है। रविवार को सुबह यह यात्रा बरसांव, पूरेओरीराय राय, सुविका बाबू गांव होते हुए सरयू नदी पार कर अयोध्या जिले के तृतीय पड़ाव स्थल श्रृंगी ऋषि के आश्रम के लिए रवाना होगी। महंत गयादास ने कहा चौरासी कोशी परिक्रमा का महत्व पुराणों में वर्णित है।
कहा जाता है कि अयोध्या धाम में संतों व स्थानीय जनमानस की ओर से तीन परिक्रमा की जाती है। जिसमे चौरासी कोसी परिक्रमा विशेष है। 14 कोसी और पंच कोसी परिक्रमा अयोध्या धाम से शुरू होती हैं। चौरासी कोसी परिक्रमा में श्रद्धालु अयोध्या, बस्ती व फिर अयोध्या व इसके बाद बाराबंकी के दरियाबाद, टिकैतनगर होते हुए गोंडा जनपद में प्रवेश करते है। इसके बाद यह यात्रा गोंडा के नवाबगंज होते हुए अयोध्या धाम प्रवेश करती है। इसके बाद मखौड़ा धाम में आकर समाप्त होती है।
अयोध्या के उत्तरी द्वार के रूप में प्रसिद्ध हैं हनुमानबाग चकोही
दुबौलिया ब्लॉक के हनुमानबाग चकोही नामक स्थल त्रेताकाल की अयोध्या का उत्तरी द्वार कहा जाता है। मान्यता हैं हनुमान जी यहीं रहकर अयोध्या की सुरक्षा करते थे। इसीलिए यहां हनुमान जी का मंदिर भी बनाया गया। 84 कोसी परिक्रमा के इस दूसरे पड़ाव स्थल पर साधु-संतों के विश्राम के दौरान हर वर्ष यहां मेला लगता है।
स्वास्थ्य टीम ने किया परीक्षण
84 कोसी परिक्रमा में शामिल साधु संतों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के लिए प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य टीम भेजी गई। इस दौरान सीएचसी प्रभारी सुशील कुमार, डॉ. प्रणवीर सिंह एवं चिकित्सकों ने श्रद्धालुओं का परीक्षण कर उन्हें आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध कराई। वहीं स्थानीय लोगों ने परिक्रमा मार्ग पर जगह-जगह साधु-संतों के लिए जलपान, भंडारा का भी आयोजन किया। हनुमान बाग मंदिर परिसर में भी विशाल भंडारा चलता रहा। इस दौरान थानाध्यक्ष दुबौलिया जीवन त्रिपाठी मयफोर्स सुरक्षा व्यवस्था चौकस करने में जुटे रहे।