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बस्ती हादसा: 11 घंटे तक दबे रहे पिता और दो बेटियों के शव, चार साल के बेटे के सिर से उठा पिता व बहनों का साया

Mon, 26 Oct 2026 03:40 PM IST
अनुराग रंजन संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Published by: अनुराग रंजन Updated Mon, 26 Oct 2026 03:40 PM IST
सार

राजेश परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए दिनभर मेहनत करते थे। वह गौर थाना क्षेत्र के जैतापुर गांव में चौकीदार के पद पर कार्यरत थे। इसके साथ ही एक पेट्रोल पंप पर भी काम करते थे, ताकि परिवार का भरण-पोषण कर सकें। उनकी मौत ने पत्नी सरिता से जीवनसाथी छीन लिया तो शिवांगी और मानवी की मौत ने मां की गोद सूनी कर दी।

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Basti Accident Father and Two Daughters Bodies Trapped Under Truck for 11 Hours,
बस्ती सड़क हादसा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

घर पहुंचने में महज 200 मीटर का फासला बाकी था। पिता राजेश यादव के साथ उनकी दोनों बेटियां शिवांगी और मानवी भंडारे से प्रसाद खाकर घर लौट रही थीं। शायद घर पहुंचकर वे दिनभर की बातें करतीं, परिवार के साथ कुछ पल बितातीं और फिर रोज की तरह सो जातीं। लेकिन रविवार की रात उनके जीवन की आखिरी रात बन गई। रास्ते में एक ट्रक उनकी बाइक को कुचलते हुए गहरी गड़ही में पलट गया। पिता और दोनों मासूम बेटियां ट्रक के नीचे दब गए। तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। घर में उनका इंतजार होता रहा, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि जिस रास्ते पर वे लौट रहे थे, वहीं जिंदगी उनका साथ छोड़ चुकी है।

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गौर थाना क्षेत्र के कोठवा गांव निवासी 38 वर्षीय राजेश यादव रविवार रात अपनी 10 साल की बेटी शिवांगी और छह साल की मानवी के साथ रामापुर गांव में आयोजित भंडारे में शामिल होकर मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे। रात करीब साढ़े आठ बजे बभनान-भिटिया मार्ग पर गांव के पास गोंडा से पशु आहार लेकर बिहार जा रहे ट्रक ने उनकी बाइक को अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद ट्रक स्मारक के पिलर से टकराया और सड़क किनारे गहरी गड़ही में पलट गया। उसके नीचे दबकर राजेश और उनकी दोनों बेटियों की मौत हो गई।

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रातभर अपनों की राह देखती रही सरिता
राजेश जब देर रात तक घर नहीं पहुंचे तो पत्नी सरिता की चिंता बढ़ने लगी। उन्होंने उनकी तलाश शुरू की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। राजेश अपना मोबाइल घर पर ही छोड़ गए थे। उनके भतीजे राजेंद्र के मुताबिक, उसी मोबाइल का इस्तेमाल सरिता भी करती थीं। ऐसे में उनसे संपर्क नहीं हो सका। रात गुजरती रही, लेकिन परिवार को हादसे की भनक तक नहीं लगी। सरिता को क्या पता था कि जिस पति और बेटियों की राह वह देख रही हैं, वे अब कभी घर नहीं लौटेंगे।

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सोमवार सुबह करीब साढ़े सात बजे हादसे की जानकारी मिली तो परिजन घटनास्थल पर पहुंचे। वहां का मंजर देखकर परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। ट्रक के नीचे राजेश और उनकी दोनों बेटियों के शव दबे हुए थे। घर से चंद कदमों की दूरी पर तीन जिंदगियां खत्म हो चुकी थीं। परिवार में चीख-पुकार मच गई। हाइड्रा और क्रेन की मदद से ट्रक हटवाया गया और तीनों के शव बाहर निकाले गए।

दो बेटियों के साथ उजड़ गया सरिता का संसार
राजेश परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए दिनभर मेहनत करते थे। वह गौर थाना क्षेत्र के जैतापुर गांव में चौकीदार के पद पर कार्यरत थे। इसके साथ ही एक पेट्रोल पंप पर भी काम करते थे, ताकि परिवार का भरण-पोषण कर सकें। उनकी मौत ने पत्नी सरिता से जीवनसाथी छीन लिया तो शिवांगी और मानवी की मौत ने मां की गोद सूनी कर दी।

परिवार में अब चार साल का बेटा बचा है। वह अभी इस त्रासदी की गहराई से अनजान है। उसे शायद यह भी नहीं मालूम कि जिस पिता के साथ वह खेलता था और जिन बहनों के साथ उसका बचपन बीत रहा था, वे अब कभी उसके पास नहीं लौटेंगी। जिस घर में बच्चों की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब मातम पसरा है। सरिता का रो-रोकर बुरा हाल है। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत से कोठवा गांव में शोक की लहर है।

सूचना पर गौर और पैकोलिया थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने हाइड्रा और क्रेन की मदद से ट्रक हटवाकर शवों को बाहर निकलवाया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। लेकिन इस परिवार के लिए अब कोई सुबह पहले जैसी नहीं होगी। घर से महज 200 मीटर पहले हुआ हादसा सरिता और उनके बच्चों की जिंदगी में ऐसा खालीपन छोड़ गया, जिसे शायद वक्त भी कभी नहीं भर पाएगा।

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