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Basti News: मंजूर हो डीपीआर तो बस्ती की धरोहरों को मिले धार
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बस्ती का राजमहल। संवाद
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पुरानी बस्ती। कलहंस राजपूतों के वैभव काल का साक्षी बस्ती राजमहल हेरिटेज रूप में विकसित होने की बांट जोह रहा है। तीन वर्ष पहले निजी कार्यक्रम में आए सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस राजमहल को हेरिटेज स्थल के रूप में विकसित करने का एलान किया था।
2025 में तत्कालीन डीएम ने शासन के निर्देश पर 22 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजकर धनराशि की मांग की, मगर अब तक इसके स्वीकृत न होने के कारण राजमहल हेरिटेज बनने के लिए प्रतीक्षारत है। अवध नरेश के गुरु महर्षि वशिष्ठ की नगरी होने का गौरव बस्ती को प्राप्त है।
यश भारती पुरस्कृत मणेंद्र मिश्रा मशाल के मुताबिक, राजमहल करीब 200 वर्ष पुराना एक कालखंड का इतिहास समेटे है। बस्ती राजमहल सुरक्षा के लिए तीन तरफ से तालाब से घिरा है, ताकि शत्रु हमले से महफूज रहें। मौजूदा समय में यह तालाब गंदगी से पटा है। इसमें शहर की गंदगी गिरती है।
घोषणा व डीपीआर भेजने के बाद भी इसे स्वीकृति न मिलना स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रियता पर सवाल खड़ा करता है, क्योंकि बस्ती राजमहल के सैकड़ों से अधिक कमरे पर्यटकों को लग्जरी लाइफ का अनुभव कराते।
गुमनामी बाबा से लेकर महामना तक का बीता वक्त : बस्ती राजमहल अपने सौंदर्य व मजबूती के लिए जाना जाता रहा। यहां गुमनामी बाबा से लेकर महामना मदनमोहन मालवीय की पनाहगाह रह चुका, लेकिन मौजूदा जनप्रतिनिधियों की अकर्मण्यता है कि हेरिटेज बनने की घोषणा होने के बाद भी न तो इसे संरक्षित करने के लिए कोई प्रयास शासन स्तर से स्वीकृत करा सके और न ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कोई काम ही सका।
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2025 में तत्कालीन डीएम ने शासन के निर्देश पर 22 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजकर धनराशि की मांग की, मगर अब तक इसके स्वीकृत न होने के कारण राजमहल हेरिटेज बनने के लिए प्रतीक्षारत है। अवध नरेश के गुरु महर्षि वशिष्ठ की नगरी होने का गौरव बस्ती को प्राप्त है।
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यश भारती पुरस्कृत मणेंद्र मिश्रा मशाल के मुताबिक, राजमहल करीब 200 वर्ष पुराना एक कालखंड का इतिहास समेटे है। बस्ती राजमहल सुरक्षा के लिए तीन तरफ से तालाब से घिरा है, ताकि शत्रु हमले से महफूज रहें। मौजूदा समय में यह तालाब गंदगी से पटा है। इसमें शहर की गंदगी गिरती है।
घोषणा व डीपीआर भेजने के बाद भी इसे स्वीकृति न मिलना स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रियता पर सवाल खड़ा करता है, क्योंकि बस्ती राजमहल के सैकड़ों से अधिक कमरे पर्यटकों को लग्जरी लाइफ का अनुभव कराते।
गुमनामी बाबा से लेकर महामना तक का बीता वक्त : बस्ती राजमहल अपने सौंदर्य व मजबूती के लिए जाना जाता रहा। यहां गुमनामी बाबा से लेकर महामना मदनमोहन मालवीय की पनाहगाह रह चुका, लेकिन मौजूदा जनप्रतिनिधियों की अकर्मण्यता है कि हेरिटेज बनने की घोषणा होने के बाद भी न तो इसे संरक्षित करने के लिए कोई प्रयास शासन स्तर से स्वीकृत करा सके और न ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कोई काम ही सका।