{"_id":"69c981226287caf73608a0f2","slug":"beware-harmful-chemicals-in-mosquito-repellent-incense-sticks-will-make-you-sick-basti-news-c-207-1-bst1001-155754-2026-03-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: सावधान...मच्छर भागने वाली अगरबत्ती में हानिकारक रसायन, बना देंगे बीमार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: सावधान...मच्छर भागने वाली अगरबत्ती में हानिकारक रसायन, बना देंगे बीमार
विज्ञापन
विज्ञापन
बस्ती। रात में चैन की नींद सोने की हसरत मुश्किल में डाल सकती है। घर-घर में प्रयोग किए जा रहे मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती से सावधान रहिए। कुछ ब्रांड की मच्छर भगाने वाली अगरबत्तियों में हानिकारक रसायन मिलाया जा रहा है। इसके नियमित उपयोग स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। अभी तक जिले भर के तीन दुकानाें पर छापेमारी कर बरामद स्टॉक भी सील कर दिया गया है। इसके नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए हैं।
स्लीपवेल और कम्फर्ट नाम से बिक रहीं मच्छर भगाने वाली अगरबत्तियों में प्रतिबंधित हानिकारक रसायन पाए जाने की पुष्टि हुई हैं। इसकी बिक्री की रोकथाम के लिए पिछले सप्ताह प्रशासन की ओर से जिले के चारों तहसील क्षेत्रों में अभियान चलाकर कार्रवाई की गई है। दो दुकानों पर इस ब्रांड की अगरबत्तियां मिलने पर अधिकारियों ने उसे सील कराकर नमूना जांच के लिए भेजा है। डीएम कृत्तिका ज्योत्सना ने इन हानिकारक रसायन से तैयार इन अगरबत्तियों की बिक्री प्रतिबंधित किए जाने का निर्देश भी दिया है।
भानपुर के सोनहा बाजार में मेसर्स हनुमानजी व विश्वास किराना स्टोर पर कम्फर्ट ब्रांड की अगरबत्तियां बरामद हुईं हैं। जिले में अभी और कई स्थानों पर इसकी खेप उपलब्ध बताई जा रही है। कार्रवाई के बाद लोग चोरी चुपके इसकी बिक्री कर स्टॉक खत्म करने की फिराक में है। बताया जा रहा है कि ग्रामीण कस्बों की दुकानों पर इसकी खपत ज्यादा मात्रा में की जा रही है। जहां प्रशासनिक अमला नहीं पहुंच पा रहा है।
जांच में पता चला है कि प्रतिबंधित हानिकारक रसायन से यह अगरबत्तियां तैयार की जा रही है। जिससे मानव जीवन को बड़ा खतरा है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी रतन शंकर ओझा ने बताया कि स्लीपवेल और कम्फर्ट दोनों ब्रांड की अगरबत्तियों पर डाइमेफ्लूथ्रिन और मेपरफ्लूथ्रिन जैसे घातक रसायनों का लेप लगाया जाने की पुष्टि हुई है। यह दोनों रसायन कीटनाशी अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है, इनकी बिक्री पूरी तरह रोक है।
इन रसायनों के इस्तेमाल से तैयार अगरबत्तियों के नियमित उपयोग से सांस की दिक्कत, एलर्जी, आंखों में जलन और सिरदर्द जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए यह ज्यादा घातक हो सकता है। बताया कि बहुत तेज या अजीब तरह की गंध आने और निर्माता कंपनी का लाइसेंस नंबर अंकित न मिलने वाले उत्पाद उपभोक्ता न खरीदें। बताया यदि किसी दुकान पर ऐसी अगरबत्तियों बेची जाती हैं तो संबंधित प्रतिष्ठान के प्रोपराइटर पर कीटनाशी अधिनियम 1968 के तहत कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
-- -- -- --
चारों तहसीलों में 30 जगह हुई छापेमारी
स्लीपवेल और कम्फर्ट अगरबत्तियों की बिक्री की रोकथाम के लिए चारों तहसीलों में करीब 30 व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की गई। भानपुर और रुधौली में कृषि रक्षा अधिकारी व नायब तहसीलदारों ने करीब 21 प्रतिष्ठानों की जांच की। जबकि सदर तहसील में उप कृषि निदेशक अशोक कुमार गौतम की टीम ने पांच और हर्रैया में जिला कृषि अधिकारी डॉ. बाबूराम मौर्य की टीम ने चार प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की।
कोट
हानिकारक रसायन से तैयार मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती या लिक्विड के इस्तेमाल से कई तरह के नुकसान है। बच्चों पर इसका ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके जलने पर हानिकारक गैस कमरे में भर जाती है। इससे दम घुटने की भी नौबत आ सकती है। इसके अलावा व्यस्क लोगों को सांस फूलने, दमा की बीमारी होने का भी खतरा रहता है। इसलिए ब्रांडेड कंपनियों की अगरबत्ती और लिक्विड का प्रयोग करना चाहिए।
-डॉ. रामजी सोनी, वरिष्ठ फिजिशियन, जिला अस्पताल।
कोट
गैर ब्रांड की मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती के बिक्री पर रोक लगा दी गई है। दुकानों पर सघन छापेमारी भी की जा रही है। यदि कहीं इस तरह के नकली ब्रांड के अगरबत्ती की बिक्री होते पाई गई तो संबंधित दुकानदार पर कार्रवाई की जाएगी।
-रतन शंकर ओझा, जिला कृषि रक्षा अधिकारी।
Trending Videos
स्लीपवेल और कम्फर्ट नाम से बिक रहीं मच्छर भगाने वाली अगरबत्तियों में प्रतिबंधित हानिकारक रसायन पाए जाने की पुष्टि हुई हैं। इसकी बिक्री की रोकथाम के लिए पिछले सप्ताह प्रशासन की ओर से जिले के चारों तहसील क्षेत्रों में अभियान चलाकर कार्रवाई की गई है। दो दुकानों पर इस ब्रांड की अगरबत्तियां मिलने पर अधिकारियों ने उसे सील कराकर नमूना जांच के लिए भेजा है। डीएम कृत्तिका ज्योत्सना ने इन हानिकारक रसायन से तैयार इन अगरबत्तियों की बिक्री प्रतिबंधित किए जाने का निर्देश भी दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
भानपुर के सोनहा बाजार में मेसर्स हनुमानजी व विश्वास किराना स्टोर पर कम्फर्ट ब्रांड की अगरबत्तियां बरामद हुईं हैं। जिले में अभी और कई स्थानों पर इसकी खेप उपलब्ध बताई जा रही है। कार्रवाई के बाद लोग चोरी चुपके इसकी बिक्री कर स्टॉक खत्म करने की फिराक में है। बताया जा रहा है कि ग्रामीण कस्बों की दुकानों पर इसकी खपत ज्यादा मात्रा में की जा रही है। जहां प्रशासनिक अमला नहीं पहुंच पा रहा है।
जांच में पता चला है कि प्रतिबंधित हानिकारक रसायन से यह अगरबत्तियां तैयार की जा रही है। जिससे मानव जीवन को बड़ा खतरा है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी रतन शंकर ओझा ने बताया कि स्लीपवेल और कम्फर्ट दोनों ब्रांड की अगरबत्तियों पर डाइमेफ्लूथ्रिन और मेपरफ्लूथ्रिन जैसे घातक रसायनों का लेप लगाया जाने की पुष्टि हुई है। यह दोनों रसायन कीटनाशी अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है, इनकी बिक्री पूरी तरह रोक है।
इन रसायनों के इस्तेमाल से तैयार अगरबत्तियों के नियमित उपयोग से सांस की दिक्कत, एलर्जी, आंखों में जलन और सिरदर्द जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए यह ज्यादा घातक हो सकता है। बताया कि बहुत तेज या अजीब तरह की गंध आने और निर्माता कंपनी का लाइसेंस नंबर अंकित न मिलने वाले उत्पाद उपभोक्ता न खरीदें। बताया यदि किसी दुकान पर ऐसी अगरबत्तियों बेची जाती हैं तो संबंधित प्रतिष्ठान के प्रोपराइटर पर कीटनाशी अधिनियम 1968 के तहत कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
चारों तहसीलों में 30 जगह हुई छापेमारी
स्लीपवेल और कम्फर्ट अगरबत्तियों की बिक्री की रोकथाम के लिए चारों तहसीलों में करीब 30 व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की गई। भानपुर और रुधौली में कृषि रक्षा अधिकारी व नायब तहसीलदारों ने करीब 21 प्रतिष्ठानों की जांच की। जबकि सदर तहसील में उप कृषि निदेशक अशोक कुमार गौतम की टीम ने पांच और हर्रैया में जिला कृषि अधिकारी डॉ. बाबूराम मौर्य की टीम ने चार प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की।
कोट
हानिकारक रसायन से तैयार मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती या लिक्विड के इस्तेमाल से कई तरह के नुकसान है। बच्चों पर इसका ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके जलने पर हानिकारक गैस कमरे में भर जाती है। इससे दम घुटने की भी नौबत आ सकती है। इसके अलावा व्यस्क लोगों को सांस फूलने, दमा की बीमारी होने का भी खतरा रहता है। इसलिए ब्रांडेड कंपनियों की अगरबत्ती और लिक्विड का प्रयोग करना चाहिए।
-डॉ. रामजी सोनी, वरिष्ठ फिजिशियन, जिला अस्पताल।
कोट
गैर ब्रांड की मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती के बिक्री पर रोक लगा दी गई है। दुकानों पर सघन छापेमारी भी की जा रही है। यदि कहीं इस तरह के नकली ब्रांड के अगरबत्ती की बिक्री होते पाई गई तो संबंधित दुकानदार पर कार्रवाई की जाएगी।
-रतन शंकर ओझा, जिला कृषि रक्षा अधिकारी।