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Basti News: रामनवमी में कलवारी-टांडा पुल का अधूरा काम बढ़ाएगा मुसीबत
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कलवारी-टांडा पुल मरम्मत के चलते सांसत झेल रहे राहगीर संवाद
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बस्ती। कांवड़ उत्सव के दौरान कलवारी-टांडा पुल को मरम्मत की अनुमति देकर प्रशासन ने रूट डायवर्जन की समस्या का हल तो निकाल लिया था। मगर रामनवमी के अवसर पर बस्ती से लखनऊ, प्रयागराज, बनारस, कानुपर आदि शहरों का आवागमन बहाल रखना काफी चुनौतीपूर्ण साबित होगा। फोरलेन पर डायवर्जन के दौरान लुंबिनी-दुद्धी मार्ग बंद होने से परेशानी बढ़ जाएगी और बलरामपुर के रास्ते बड़े वाहन निकालने पड़ेंगे।
बता दें कि लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर टांडा पुल का मरम्मत कार्य तीन माह के बजाय सात महीने बीतने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है, इससे इस मार्ग का आवागमन ठप है। ऐसे में अयोध्या में रामनवमी पर भीड़ बढ़ने के दौरान जब बस्ती-अयोध्या हाईवे बंद होगा तो भारी वाहनों का निकलना दुश्वार हो जाएगा। सबसे ज्यादा समस्या उन श्रद्धालुओं को हो रही है जो हर साल चैत्र नवरात्र में इसी मार्ग से विंध्याचल धाम पहुंचकर देवी भगवती का दर्शन करते हैं। उन्हें अब घूमकर दूसरे वैकल्पिक मार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार करीब सवा दो किलोमीटर लंबा यह पुल वर्ष 2006 में सेतु निगम की ओर से 1.19 अरब रुपये की लागत से बनाया गया था, बाद में पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को दी गई थी। एनएचएआई की ओर से 12 सितंबर 2025 में कार्य प्रारंभ किया गया था, लेकिन धीमी गति से काम चलने के कारण मरम्मत कार्य नही पूरा हुआ, जिससे बस्ती, अंबेडकरनगर जनपद के लोग अधिक परेशान हैं।
लुंबिनी-दुद्धी एनएच-28 पर स्थित यह पुल बस्ती-अंबेडकरनगर दोनों जिलों को आपस में जोड़े हुए हैं। प्रशासन ने पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए सितंबर से इसे बंद कर रूट डायवर्जन लागू किया है। मरम्मत के दौरान अंबेडकरनगर, जौनपुर, सुल्तानपुर समेत अन्य जनपदों को जाने वाले यात्रियों को बिड़हल घाट पुल होकर 65 से 70 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। शादी-विवाह और धार्मिक आयोजनों के समय कार्य की सुस्ती से आमजन में नाराजगी है।
राहगीर सपना, संदीप, अमरजीत व विपिन मिश्र ने बताया कि पुल बंद होने से कलवारी व्यापार पर असर पड़ा है। कई जिलों को आपास में जोड़ने वाला यह पुल केवल एक मार्ग नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। बताया कि पुल बंद होने से यात्रियों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। वहीं, कई बार पुल के मरम्मत में तेजी लाने के लिए एनएचएआई के अधिकारियों से वार्ता हो चुकी। मगर, उसका असर नहीं दिखा, कार्यदायी संस्था अपने मस्त चाल में निर्माण करवा रही है।
बताते हैं कि कभी आठ तो कभी 10 मजदूर ही कार्य करते दिखे, प्रतीक्षा बढ़ती जा रही है। लोगों ने बताया कि 90 दिन के भीतर कार्य करने का दावा भी हवा-हवाई साबित हुआ। इससे दो जनपदों का संपर्क टूटा हुआ है। एक-दूसरे जनपदों का व्यापार पर भी काफी असर पड़ा है। तमाम नौकरीपेशा, व्यापारी और छात्र-छात्राएं भी आते-जाते हैं, मगर दोपहिया वाहनों को सिर्फ जैसे-तैसे आवागमन हो पा रहा है।
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बोले- राहगीर व स्थानीय नागरिक
टांडा कोल्ड स्टोरेज में आलू जमा कराना है। पुल बंद होने के कारण जमा नहीं हो पा रहा है। जिम्मेदार मिलते नहीं है यदि 31 मार्च तक पुल आवागमन के लिए चालू नहीं हुआ तो आलू जमा कराना मुश्किल होगा।
-रमेश चंद्र वर्मा, दौलतचक
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पुल पर मरम्मत कार्य चलते हुए सात माह हो गए, अभी कार्य पूरा नहीं हुआ। कार्यदायी संस्था की ढिलाई से विंध्यधाम में दर्शन करने जाने की इच्छा थी पर पुल चालू न होने के कारण समझ में नहीं आ रहा क्या करें।
-संकटा प्रसाद सिंह, कलवारी, मुस्तहकम
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रामनवमी पर बाबा विश्वनाथ, मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए परिवार के साथ जाना चाह रहे थे। पुल चालू न होने के कारण मुश्किल दिख रहा है। दो जिलों का संपर्क टूट सा गया है। जल्द ही पुल से आवागमन हो।
-राम गोपाल दुबे, खखोड़ा
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आम लोगों, नौकरीपेशा, व्यापारी, सब परेशान हैं। कार्य की गति कम है। इससे समय से पुल पर मरम्मत कार्य पूर्ण नहीं हुआ। इससे चैत्र नवरात्र पर काफी श्रद्धालु इधर से मंदिरों पर जाते थे, वह काफी परेशान हो गए हैं।
-अमर बहादुर सिंह, कलवारी मुस्तहकम
कोट
अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक पुल का निर्माण पूर्ण हो जाएगा। इसके बाद आवागमन बहाल करवा दिया जाएगा। कार्य अंतिम दौर में है। कुछ कार्य शेष हैं, जिसे पूरा करने के लिए संबंधित को निर्देशित किया गया है।
-एसएन तिवारी, प्रोजेक्ट इंजीनियर, एनएचएआई
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बता दें कि लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर टांडा पुल का मरम्मत कार्य तीन माह के बजाय सात महीने बीतने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है, इससे इस मार्ग का आवागमन ठप है। ऐसे में अयोध्या में रामनवमी पर भीड़ बढ़ने के दौरान जब बस्ती-अयोध्या हाईवे बंद होगा तो भारी वाहनों का निकलना दुश्वार हो जाएगा। सबसे ज्यादा समस्या उन श्रद्धालुओं को हो रही है जो हर साल चैत्र नवरात्र में इसी मार्ग से विंध्याचल धाम पहुंचकर देवी भगवती का दर्शन करते हैं। उन्हें अब घूमकर दूसरे वैकल्पिक मार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है।
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जानकारी के अनुसार करीब सवा दो किलोमीटर लंबा यह पुल वर्ष 2006 में सेतु निगम की ओर से 1.19 अरब रुपये की लागत से बनाया गया था, बाद में पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को दी गई थी। एनएचएआई की ओर से 12 सितंबर 2025 में कार्य प्रारंभ किया गया था, लेकिन धीमी गति से काम चलने के कारण मरम्मत कार्य नही पूरा हुआ, जिससे बस्ती, अंबेडकरनगर जनपद के लोग अधिक परेशान हैं।
लुंबिनी-दुद्धी एनएच-28 पर स्थित यह पुल बस्ती-अंबेडकरनगर दोनों जिलों को आपस में जोड़े हुए हैं। प्रशासन ने पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए सितंबर से इसे बंद कर रूट डायवर्जन लागू किया है। मरम्मत के दौरान अंबेडकरनगर, जौनपुर, सुल्तानपुर समेत अन्य जनपदों को जाने वाले यात्रियों को बिड़हल घाट पुल होकर 65 से 70 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। शादी-विवाह और धार्मिक आयोजनों के समय कार्य की सुस्ती से आमजन में नाराजगी है।
राहगीर सपना, संदीप, अमरजीत व विपिन मिश्र ने बताया कि पुल बंद होने से कलवारी व्यापार पर असर पड़ा है। कई जिलों को आपास में जोड़ने वाला यह पुल केवल एक मार्ग नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। बताया कि पुल बंद होने से यात्रियों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। वहीं, कई बार पुल के मरम्मत में तेजी लाने के लिए एनएचएआई के अधिकारियों से वार्ता हो चुकी। मगर, उसका असर नहीं दिखा, कार्यदायी संस्था अपने मस्त चाल में निर्माण करवा रही है।
बताते हैं कि कभी आठ तो कभी 10 मजदूर ही कार्य करते दिखे, प्रतीक्षा बढ़ती जा रही है। लोगों ने बताया कि 90 दिन के भीतर कार्य करने का दावा भी हवा-हवाई साबित हुआ। इससे दो जनपदों का संपर्क टूटा हुआ है। एक-दूसरे जनपदों का व्यापार पर भी काफी असर पड़ा है। तमाम नौकरीपेशा, व्यापारी और छात्र-छात्राएं भी आते-जाते हैं, मगर दोपहिया वाहनों को सिर्फ जैसे-तैसे आवागमन हो पा रहा है।
बोले- राहगीर व स्थानीय नागरिक
टांडा कोल्ड स्टोरेज में आलू जमा कराना है। पुल बंद होने के कारण जमा नहीं हो पा रहा है। जिम्मेदार मिलते नहीं है यदि 31 मार्च तक पुल आवागमन के लिए चालू नहीं हुआ तो आलू जमा कराना मुश्किल होगा।
-रमेश चंद्र वर्मा, दौलतचक
पुल पर मरम्मत कार्य चलते हुए सात माह हो गए, अभी कार्य पूरा नहीं हुआ। कार्यदायी संस्था की ढिलाई से विंध्यधाम में दर्शन करने जाने की इच्छा थी पर पुल चालू न होने के कारण समझ में नहीं आ रहा क्या करें।
-संकटा प्रसाद सिंह, कलवारी, मुस्तहकम
रामनवमी पर बाबा विश्वनाथ, मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए परिवार के साथ जाना चाह रहे थे। पुल चालू न होने के कारण मुश्किल दिख रहा है। दो जिलों का संपर्क टूट सा गया है। जल्द ही पुल से आवागमन हो।
-राम गोपाल दुबे, खखोड़ा
आम लोगों, नौकरीपेशा, व्यापारी, सब परेशान हैं। कार्य की गति कम है। इससे समय से पुल पर मरम्मत कार्य पूर्ण नहीं हुआ। इससे चैत्र नवरात्र पर काफी श्रद्धालु इधर से मंदिरों पर जाते थे, वह काफी परेशान हो गए हैं।
-अमर बहादुर सिंह, कलवारी मुस्तहकम
कोट
अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक पुल का निर्माण पूर्ण हो जाएगा। इसके बाद आवागमन बहाल करवा दिया जाएगा। कार्य अंतिम दौर में है। कुछ कार्य शेष हैं, जिसे पूरा करने के लिए संबंधित को निर्देशित किया गया है।
-एसएन तिवारी, प्रोजेक्ट इंजीनियर, एनएचएआई