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जल जीवन मिशन : सूख गईं टोंटियां...गायब हाे गए नल

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 18 Mar 2026 02:14 AM IST
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Jal Jeevan Mission: Taps have dried up...faucets have disappeared
दृश्य तीन- बनकटी ब्लॉक के खड़ौहा गांव में बेपानी वाटर हेड टैंक। संवाद
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बस्ती। जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल पहुंचाने की योजना चार साल बाद भी धरातल उतर नहीं पाई। जिन 23 फीसदी परियोजनाओं को पूर्ण बताया जा रहा हैं ग्रामीण उस पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि टोंटियां और नल तक गायब हो गए हैं। ऐसे में हर घर जल पहुंचाने का दावा करने से पहले विभाग सूखी टोटियों से पानी निकाल कर दिखाए। केवल कागजी आंकड़ों में परियोजनाओं को पूर्ण दिखाया गया है।
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बता दें कि वर्ष 2022 में जिले के 2567 राजस्व गांवों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए जल जीवन मिशन के तहत कुल 855 पेयजल परियोजनाएं स्वीकृति हुई। इसमें अधिकांश परियोजनाएं 50 लाख से अधिक लागत की है। इसके लिए तीन निजी निर्माण कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। शुरूआत में स्थल चयन के विवाद में कई परियोजनाएं लटकी रही।
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प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद यह विवाद खत्म हुआ। इसके बाद परियोजनाओं पर कार्य शुरू हुए। मगर आधे-अधूरे स्थिति में ही इन परियोजनाओं का निर्माण बंद हो गया।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार अभी तक 194 परियोजनाएं ही चालू हो सकीं। शेष 661 परियोजनाओं का कार्य आधा अधूरा है। 140 गांवों में हर घर जल पहुंचने के प्रमाणीकरण का विभाग ने दावा किया है।
विभाग का कहना हैं कि बजट के अभाव में इन परियोजनाओं का कार्य बीच रास्ते में ही लटक गया है। अब इन्हें पूरा होने में दो साल का वक्त और लगेगा।
ट्रायल में फट गई पाइप, बाद में उखड़ गया गेट : भानपुर। रामनगर ब्लाॅक के मझारी पश्चिम गांव में तीन साल से ओवरहेड टैंक निर्माणाधीन है।
ग्रामीणों को अभी तक एक बूंद पानी नसीब नहीं हुआ है। निर्माण की गुणवत्ता इतनी खराब निकली कि पेयजल आपूर्ति के ट्रायल के समय ही पाइप लाइन फट गया। कुछ दिनों के बाद गेट भी उखड़ गया है। अब यहां पंप हाउस के दरवाजे पर गांव के एक व्यक्ति ने उपला रखकर रास्ता बंद कर दिया है। पंप संचालन के लिए तैनात कर्मचारी त्रिवेनी ने फोन पर बताया कि उन्हें अभी तक कोई मानदेय ही नहीं मिला है।
ग्रामीण राधेश्याम, बहरैची, हरि प्रसाद, दुर्गेश कहते है कि अभी पूरे गांव में पाइप लाइन और कनेक्शन भी नहीं हुआ है।
पानी की टंकी के लिए फाउंडेशन का कार्य बचा हुआ है। परिसर में झांडियों से भर गया है। सिर्फ पंप और सोलर पैनल लगाकर छोड़ दिया गया है।
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