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Basti News: जयंती पर याद किए गए मुंशी प्रेमचंद साहित्यिक योगदान पर हुई चर्चा
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बस्ती। वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति की ओर से शुक्रवार को उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर कलक्ट्रेट परिसर के निकट गोष्ठी आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि जब तक समाज में गरीबी, असमानता और अशिक्षा रहेगी, प्रेमचंद का साहित्य प्रासंगिक बना रहेगा।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिकित्सक डॉ. वीके वर्मा ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद हिंदी और उर्दू साहित्य के अप्रतिम रचनाकार थे। उनकी प्रमुख कृतियों में गोदान, कफन, ईदगाह, पूस की रात, ठाकुर का कुआं, बूढ़ी काकी, नमक का दरोगा, कर्मभूमि और गबन शामिल हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा ने बताया कि प्रेमचंद ने 12 से अधिक उपन्यास, 250 से अधिक कहानियां और अनेक निबंध लिखे तथा विदेशी साहित्य का हिंदी में अनुवाद भी किया।
इस अवसर पर बटुकनाथ शुक्ला, डॉ. रामकृष्ण लाल जगमग, डाॅ. राजेन्द्र सिंह राही, दीपक सिंह प्रेमी, रहमान अली रहमान, अजमत अली सिद्दीकी, संजीव पांडेय, सामईन फारूकी, संजीव पांडेय, ओम प्रकाश पांडेय आदि मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिकित्सक डॉ. वीके वर्मा ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद हिंदी और उर्दू साहित्य के अप्रतिम रचनाकार थे। उनकी प्रमुख कृतियों में गोदान, कफन, ईदगाह, पूस की रात, ठाकुर का कुआं, बूढ़ी काकी, नमक का दरोगा, कर्मभूमि और गबन शामिल हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा ने बताया कि प्रेमचंद ने 12 से अधिक उपन्यास, 250 से अधिक कहानियां और अनेक निबंध लिखे तथा विदेशी साहित्य का हिंदी में अनुवाद भी किया।
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इस अवसर पर बटुकनाथ शुक्ला, डॉ. रामकृष्ण लाल जगमग, डाॅ. राजेन्द्र सिंह राही, दीपक सिंह प्रेमी, रहमान अली रहमान, अजमत अली सिद्दीकी, संजीव पांडेय, सामईन फारूकी, संजीव पांडेय, ओम प्रकाश पांडेय आदि मौजूद रहे।
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