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Basti News: खतरे के निशान के करीब पहुंची सरयू, कटान की जद में आने लगे कई गांव
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दुबौलिया के एक गांव से सटकर बहती सरयू, दरक रहा है अस्थायी बांध संवाद
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बस्ती। सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से जिले में बाढ़ का खतरा गहराने लगा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शनिवार शाम चार बजे सरयू का जलस्तर 92.17 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 92.73 मीटर से महज 56 सेंटीमीटर नीचे है।
नदी का जलस्तर प्रति घंटे करीब एक सेंटीमीटर की दर से बढ़ रहा है। ऐसे में यदि यही रफ्तार बनी रही तो नदी जल्द ही खतरे के निशान को छू सकती है। इससे हर्रैया और सदर तहसील के माझा क्षेत्रों में कटान और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ खंड के अधिकारी संवेदनशील तटबंधों और कटान प्रभावित स्थलों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। तेज बहाव के कारण विक्रमजोत और दुबौलिया माझा क्षेत्र में लोगों की आवाजाही प्रभावित होने लगी है। पशुपालकों को पशुओं के लिए चारा लाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
हर साल बाढ़ की मार झेलने वाले माझा क्षेत्र के लोगों में इस बार भी दहशत का माहौल है। ग्रामीणों की नजरें संभावित राहत शिविरों और सुरक्षित स्थानों पर टिक गई हैं। उनका कहना है कि वर्षों से बाढ़ और कटान की समस्या बनी हुई है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है। तटबंधों पर भी दबाव लगातार बढ़ रहा है।
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घाघरा के बढ़ते जलस्तर से कटान प्रभावित गांवों में बढ़ी चिंता
विक्रमजोत। घाघरा नदी का जलस्तर भी फिर बढ़ने लगा है। प्रति घंटे लगभग एक सेंटीमीटर की बढ़ोतरी से कटान प्रभावित गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। पकड़ी संग्राम, लकड़ी पांडेय और अर्जुनपुर गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव से कटान तेज हो जाती है, जिससे खेती की जमीन और आबादी पर खतरा मंडराने लगता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से कटान रोकने के प्रभावी इंतजाम करने और संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी बनाए रखने की मांग की है, ताकि किसी भी संभावित स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
कोट
जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है। जलस्तर बढ़ने की सूचना के बाद चौकसी और बढ़ा दी गई है। फिलहाल सभी तटबंध सुरक्षित हैं।
-दिनेश कुमार, एक्सईएन, बाढ़ खंड, बस्ती।
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नदी का जलस्तर प्रति घंटे करीब एक सेंटीमीटर की दर से बढ़ रहा है। ऐसे में यदि यही रफ्तार बनी रही तो नदी जल्द ही खतरे के निशान को छू सकती है। इससे हर्रैया और सदर तहसील के माझा क्षेत्रों में कटान और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ खंड के अधिकारी संवेदनशील तटबंधों और कटान प्रभावित स्थलों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। तेज बहाव के कारण विक्रमजोत और दुबौलिया माझा क्षेत्र में लोगों की आवाजाही प्रभावित होने लगी है। पशुपालकों को पशुओं के लिए चारा लाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
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हर साल बाढ़ की मार झेलने वाले माझा क्षेत्र के लोगों में इस बार भी दहशत का माहौल है। ग्रामीणों की नजरें संभावित राहत शिविरों और सुरक्षित स्थानों पर टिक गई हैं। उनका कहना है कि वर्षों से बाढ़ और कटान की समस्या बनी हुई है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है। तटबंधों पर भी दबाव लगातार बढ़ रहा है।
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घाघरा के बढ़ते जलस्तर से कटान प्रभावित गांवों में बढ़ी चिंता
विक्रमजोत। घाघरा नदी का जलस्तर भी फिर बढ़ने लगा है। प्रति घंटे लगभग एक सेंटीमीटर की बढ़ोतरी से कटान प्रभावित गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। पकड़ी संग्राम, लकड़ी पांडेय और अर्जुनपुर गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव से कटान तेज हो जाती है, जिससे खेती की जमीन और आबादी पर खतरा मंडराने लगता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से कटान रोकने के प्रभावी इंतजाम करने और संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी बनाए रखने की मांग की है, ताकि किसी भी संभावित स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
कोट
जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है। जलस्तर बढ़ने की सूचना के बाद चौकसी और बढ़ा दी गई है। फिलहाल सभी तटबंध सुरक्षित हैं।
-दिनेश कुमार, एक्सईएन, बाढ़ खंड, बस्ती।