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Basti News: मंडी की कमाई अकूत...बदइंतजामी बेहिसाब

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 23 Feb 2026 01:38 AM IST
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The market's earnings are enormous...the mismanagement is incalculable.
पुरानी बस्ती की मंडी में जलभराव। संवाद
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पुरानी बस्ती। जिले के पुरानी बस्ती की नवीन मंडी जनपद ही नहीं, मंडल की सर्वाधिक कमाई वाली मंडियों में गिनी जाती है। बावजूद इसके इस ख्यातिलब्ध मंडी में आने वाले किसानों और व्यापारियों की सुविधा के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। गर्मी की दस्तक पड़ चुकी है, आगे पारा और चढ़ेगा। लेकिन, शुद्ध कौन कहे पेयजल की व्यवस्था ही धराशायी है। मंडी में रोशनी की भी व्यवस्था नहीं है।
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इंडिया मार्क हैंडपंप की कौन कहे मंडी परिसर की टोंटियां तक पानी नहीं उगल रहीं। सफाई का हाल दयनीय है। जहां-तहां पानी एकत्र होकर आवागमन दुश्वार बना रहा है। अव्यवस्थाओं के कारण बिक्री के लिए पहुंचने वाले क्षेत्रीय किसान ही नहीं, परिसर में किराया देकर दुकान संचालित करने वाले दुकानदार भी जिम्मेदारों को कोस रहे हैं। पुरानी बस्ती मंडी कभी सर्वाधिक कमाई वाली मंडियों में गिनी जाती थी। यहां की सुविधा-सहूलियत इसकी ख्याति को मजबूत करती थी, लेकिन मौजूदा जिम्मेदारों को जैसे यहां की अव्यवस्था से कोई वास्ता ही नहीं है, इसलिए अव्यवस्था न सिर्फ बनी हुई है, बल्कि मजबूत होती जा रही है।
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सबसे विकट स्थिति पानी को लेकर है। यहां पानी का इंतजाम ही नहीं है। इंडिया मार्क हैंडपंप व पाइपलाइन में प्लास्टिक व स्टील की टोटियां तो लगी हैं, लेकिन वह पानी ही नहीं उगलती। अतिक्रमण इस कदर की सुबह मंडी में लोडिंग-अनलोडिंग में घंटों का समय लग जाता है। फल और सब्जियों के अवशेष जहां-तहां पड़े हैं। इससे संक्रामक रोग फैलने का खतरा है।
भंडारण व्यवस्था में बढ़ोतरी के तहत टिन शेड बैरक बना है, जहां छाए में किसान बिक्री व कारोबारी अपनी खरीद तब तक सुरक्षित रख सकें जबतक इनकी लोडिंग बाहर के लिए नहीं होती, लेकिन इसमें रोशनी की कोई व्यवस्था नहीं जिसके कारण रात में सामान सुरक्षित रखने के लिए व्यापारी रतजगा करते हैं।
पंजीकृत कारोबारी बोले-
मंडी में दुकान अलाट कराकर कारोबार करने वाले गौरीशंकर, शफी मोहम्मद, अहमद, नूर आलम ने कहा कि यहां की अव्यवस्था पर मंडी कर्मचारी मौन रहते हैं। उनमें यह होड़ रहती कौन अधिक से अधिक वसूली कहां से कर ले। यहां हम लोग टैक्स भरते, लेकिन कर्मचारी लेनदेन कर बाहरी दुकानदार जो पंजीकृत ही नहीं उनकी दुकान गेट पर ही लगवा देते। इससे हमारी कमाई छिन रही है। कई बार समस्या को लेकर ज्ञापन दिया, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं।
किसानों में मायूसी : क्षेत्र के किसान अजय पटेल, दीनू चौधरी, मुश्ताक, हरिहर ने बताया कि वह लोग सब्जी उत्पादन से जुड़े हैं। हर दो से तीन दिन पर मंडी उपज बेचने पहुंचते, लेकिन अगर वाहन पर सब्जी लादकर पहुंचते तो अंदर घुसने पर चार्ज लिया जाता। उपज बिक्री के बाद 100 से 200 रुपये कर्मचारी नजराना लेते। पहले यह वसूली नहीं थी तो अच्छी कमाई थी। अब तो पानी पीने के लिए बोतलबंद पानी लेना पड़ता।
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