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Basti News: शिवरात्रि मेले के लिए लोढेश्वरनाथ मंदिर की तैयारियों में जुटा मंदिर प्रबंधन

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 13 Feb 2026 01:35 AM IST
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The temple management is busy preparing for the Shivaratri fair at Lodheshwarnath Temple.
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भानपुर। रविवार को महाशिवरात्रि पर्व पर लोढ़वा गांव में स्थित लोढेश्वरनाथ मंदिर पर जलाभिषेक और मेले की तैयारियों को अंतिम रूप देने में मंदिर प्रबंधन जुट गया है। मंदिर की रंगाई-पुताई से लेकर साफ-सफाई में श्रमिक जुटे हुए हैं। जलाभिषेक के लिए प्रयोग किए जाने वाले कुएं को भी साफ किया जा रहा है।
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इस मेले में दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित और मनोरंजन के लिए दुकानें भी लगनी शुरु हो गई हैं। मंदिर के महंत सनातन गोस्वामी ने बताया कि इस प्राचीन मंदिर की प्रसिद्धि के चलते यहां प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु बस्ती, सिद्धार्थनगर और गोंडा जनपद के सीमावर्ती गांवों से जलाभिषेक करने परिवार के साथ आते हैं। जलाभिषेक के बाद मेले में जरूरत के सामान की खरीदारी भी करते हैं। मंदिर की सजावट को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है। शनिवार की रात 12 बजे से ही मंदिर में जलाभिषेक प्रारंभ हो जाएगा।
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उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में लगा आरओ प्लांट काफी समय से खराब है। उसे ठीक कराने की जरूरत है। प्रभारी एडीओ पंचायत विजय चौधरी ने बताया कि ब्लाॅक से सफाई कर्मियों की ड्यूटी लगा दी गई है। बृहस्पतिवार से सफाईकर्मियों की टीम अपना काम शुरू करेगी।

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बाबा भद्रेश्वर नाथ धाम में लगेगा श्रद्धा का कुंभ
बस्ती। भद्रेश्वर नाथ शिवमंदिर पर शिवरात्रि पर विशाल मेले का आयोजन होता है। यहां घरेलू सामग्रियों से लेकर खेती किसानी तक के सामान की दुकानें एक दिन पहले से सज जाती हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए छोटे-बड़े झूले, सर्कस और अन्य संसाधन मेले को भव्यता प्रदान करते हैं। लोग पूजा पाठ के बाद मेले का आनंद उठाते हैं। रविवार को महाशिवरात्रि को देखते हुए यहां पर तैयारी शुरू कर दी गई है।
जिला मुख्यालय से आठ किमी दूर बाबा भद्रेश्वर नाथ का धाम है। कुआनो नदी तट पर स्थित यह शिव मंदिर प्राचीन महात्म्य को समेटे हुए है। कवदंति है कि त्रेताकाल में यह स्थल भद्रेश जंगल नाम से प्रसिद्ध था। रावण ने इस जंगल में विश्राम किया था। भगवान शिव की आराधना के लिए उसने ही यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। कालांतर में एक पुजारी को स्वप्न में भद्रेश जंगल में शिवलिंग होने का स्वप्न दिखा, तभी से यह सर्वविदित हुआ। वर्तमान में मंदिर परिसर काफी विशाल है। इस शिवालय की मान्यता सदियों से है। प्रत्येक सोमवार को जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का यहां तांता लगा रहता है।

श्रावण मास के तेरस के दिन तो बाबा भद्रेश्वर नाथ धाम सीधे भगवान राम की नगरी अयोध्या से जुड़ जाता है। कांवर भक्त पवित्र सरयू के तट से इस धाम तक नंगे पांव जल लेकर आते हैं। मंदिर के गर्भ गृह से लेकर समूचे परिसर में श्रद्धा का कुंभ लग जाता है।
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