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धर्म के बिना किसी भी स्तर पर कल्याण संभव नहीं : अविमुक्तेश्वरानंद
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राजकीय इंटर कॉलेज में संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते अविमुक्तेश्वरानंद स्रोत आयोजक संवाद
- फोटो : Samvad
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बस्ती। राजकीय इंटर कॉलेज बस्ती में रविवार को राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा की ओर से आयोजित सनातन धर्म संवाद कार्यक्रम में ज्योतिष्मठ पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शामिल हुए। उन्होंने उपस्थित लोगों को धर्म का महत्व समझाया और जीवन को धर्मनुकूल बनाने का संदेश दिया। कहा कि धर्म के बिना किसी भी स्तर पर कल्याण संभव नहीं है।
शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि धर्म के बिना किसी भी स्तर पर कल्याण संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यक्ति, समाज और राष्ट्र तीनों का उत्थान तभी संभव है, जब जीवन में धर्म का समावेश हो। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मनुष्य को ऊंचा उठना है तो उसे अपने जीवन में धर्म को अपनाना ही होगा, क्योंकि धर्मविहीन जीवन कभी उन्नति नहीं कर सकता। धर्म की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि धर्म वह है, जिससे मनुष्य ऊंचा उठता है, जबकि अधर्म वह है, जो पतन का कारण बनता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धर्म को जीवन से अलग नहीं किया जा सकता, क्योंकि यही मानव जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
राष्ट्र धर्म पर उठे एक सवाल का जवाब देते हुए शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं है। उन्होंने इसे हमारी जीवन पद्धति और संस्कृति बताया। उनके अनुसार, जहां तक हमारी संस्कृति का विस्तार है, वहीं तक राष्ट्र की परिधि है। शंकराचार्य ने कहा, ''''राष्ट्र हम हैं, राष्ट्र आप हैं।'''' इसलिए, हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह राष्ट्र धर्म का पालन करे। कहा कि कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा। केवल राम के कीर्तन से काम बन सकता है।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के संस्थापक अलंकार अग्निहोत्री का नाम परिवर्तित कर ''''धर्मा अलंकार अग्निहोत्री'''' रखा गया। साथ ही, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा को ''''धर्मभूषण'''' की उपाधि देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक कुशल तिवारी, कप्तानगंज से सपा विधायक कविंद्र उर्फ अतुल चौधरी, प्रशांत पांडेय, पंकज, संतप्रकाश, लल्लू पांडेय, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी जुगल किशोर तिवारी, संतोष दूबे, पेशवा सेना के अध्यक्ष प्रभाकर पेशा, मंजू शुक्ला, ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक शुक्ल आदि मौजूद रहे।
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शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि धर्म के बिना किसी भी स्तर पर कल्याण संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यक्ति, समाज और राष्ट्र तीनों का उत्थान तभी संभव है, जब जीवन में धर्म का समावेश हो। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मनुष्य को ऊंचा उठना है तो उसे अपने जीवन में धर्म को अपनाना ही होगा, क्योंकि धर्मविहीन जीवन कभी उन्नति नहीं कर सकता। धर्म की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि धर्म वह है, जिससे मनुष्य ऊंचा उठता है, जबकि अधर्म वह है, जो पतन का कारण बनता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धर्म को जीवन से अलग नहीं किया जा सकता, क्योंकि यही मानव जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
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राष्ट्र धर्म पर उठे एक सवाल का जवाब देते हुए शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं है। उन्होंने इसे हमारी जीवन पद्धति और संस्कृति बताया। उनके अनुसार, जहां तक हमारी संस्कृति का विस्तार है, वहीं तक राष्ट्र की परिधि है। शंकराचार्य ने कहा, ''''राष्ट्र हम हैं, राष्ट्र आप हैं।'''' इसलिए, हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह राष्ट्र धर्म का पालन करे। कहा कि कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा। केवल राम के कीर्तन से काम बन सकता है।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के संस्थापक अलंकार अग्निहोत्री का नाम परिवर्तित कर ''''धर्मा अलंकार अग्निहोत्री'''' रखा गया। साथ ही, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा को ''''धर्मभूषण'''' की उपाधि देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक कुशल तिवारी, कप्तानगंज से सपा विधायक कविंद्र उर्फ अतुल चौधरी, प्रशांत पांडेय, पंकज, संतप्रकाश, लल्लू पांडेय, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी जुगल किशोर तिवारी, संतोष दूबे, पेशवा सेना के अध्यक्ष प्रभाकर पेशा, मंजू शुक्ला, ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक शुक्ल आदि मौजूद रहे।