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Bhadohi News: सिंथेटिक से चार गुना महंगा है हर्बल रंग
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गोपीगंज बाजार में सजी रंग गुलाल की दुकान। संवाद
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गोपीगंज। होली का पर्व नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ गई है। लोगों में स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बढ़ती जागरूकता के कारण इस बार हर्बल रंगों की मांग तेजी से बढ़ रही है। बाजारों में फूलों, जड़ी-बूटियों और आयुर्वेदिक तत्वों से बने रंग व गुलाल उपलब्ध हैं। जो लोगों की पहली पसंद है। प्राकृतिक रंग आम रंगों की अपेक्षा भले ही चार गुना अधिक महंगा है, लेकिन सेहत के लिए मुफीद है।
बाजारों में टेसू के फूलों से बने केसरिया रंग, हल्दी से तैयार पीला गुलाल, पालक व धनिया से बने हरे रंग और चुकंदर से तैयार गुलाबी रंग की बिक्री हो रही है। दुकानदारों का कहना है कि इस बार लोग केमिकल युक्त रंगों की जगह हर्बल और प्राकृतिक रंगों के बारे में अधिक पूछताछ कर रहे हैं। खासकर बच्चों और महिलाओं के लिए सुरक्षित रंगों की मांग बढ़ी है। गोपीगंज के व्यापारी पप्पू जायसवाल ने बताया कि प्राकृतिक रंगों की कीमत सामान्य रंगों की तुलना में थोड़ी अधिक है, लेकिन स्वास्थ्य को देखते हुए लोग इन्हें प्राथमिकता दे रहे हैं। बताया कि हर्बल रंग आम रंगों की अपेक्षा तीन से चार गुना महंगा होता। आम तौर पर 100 से 150 रुपये किलो हर्बल गुलाब मिल रहा है। वहीं, कुछ ब्रांड ऐसे भी हैं, जिसकी कीमत 200 रुपये प्रति किलो से अधिक है। बताया कि लोग स्वास्थ्य को देखते हुए इस तरह के रंगों को अधिक तवज्जो दे रहे हैं।
त्वचा और आंखों की हो सकती है समस्या
सौ शय्या के चिकित्सक डॉ. सुशील शुक्ला ने बताया कि प्राकृतिक रंगों से त्वचा, आंख और बालों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। इसके उलट अगर सामान्य रंगों का प्रयोग होता है तो इस तरह की समस्या देखने को मिल सकती है। प्राकृतिक रंगों में किसी प्रकार के रासायनिक तत्व नहीं होने के कारण एलर्जी, खुजली और जलन की संभावना भी कम रहती है। होली खेलते समय प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग करना चाहिए। यह सेहत के साथ पर्यावरण के भी अनुकूल होता है।
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बाजारों में टेसू के फूलों से बने केसरिया रंग, हल्दी से तैयार पीला गुलाल, पालक व धनिया से बने हरे रंग और चुकंदर से तैयार गुलाबी रंग की बिक्री हो रही है। दुकानदारों का कहना है कि इस बार लोग केमिकल युक्त रंगों की जगह हर्बल और प्राकृतिक रंगों के बारे में अधिक पूछताछ कर रहे हैं। खासकर बच्चों और महिलाओं के लिए सुरक्षित रंगों की मांग बढ़ी है। गोपीगंज के व्यापारी पप्पू जायसवाल ने बताया कि प्राकृतिक रंगों की कीमत सामान्य रंगों की तुलना में थोड़ी अधिक है, लेकिन स्वास्थ्य को देखते हुए लोग इन्हें प्राथमिकता दे रहे हैं। बताया कि हर्बल रंग आम रंगों की अपेक्षा तीन से चार गुना महंगा होता। आम तौर पर 100 से 150 रुपये किलो हर्बल गुलाब मिल रहा है। वहीं, कुछ ब्रांड ऐसे भी हैं, जिसकी कीमत 200 रुपये प्रति किलो से अधिक है। बताया कि लोग स्वास्थ्य को देखते हुए इस तरह के रंगों को अधिक तवज्जो दे रहे हैं।
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त्वचा और आंखों की हो सकती है समस्या
सौ शय्या के चिकित्सक डॉ. सुशील शुक्ला ने बताया कि प्राकृतिक रंगों से त्वचा, आंख और बालों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। इसके उलट अगर सामान्य रंगों का प्रयोग होता है तो इस तरह की समस्या देखने को मिल सकती है। प्राकृतिक रंगों में किसी प्रकार के रासायनिक तत्व नहीं होने के कारण एलर्जी, खुजली और जलन की संभावना भी कम रहती है। होली खेलते समय प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग करना चाहिए। यह सेहत के साथ पर्यावरण के भी अनुकूल होता है।
