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ब्रह्मबोध से ही आत्मबोध संभव : आरएल शुक्ल
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संत निरंकारी समागम में उमड़ी महिला श्रद्धालुओं की भीड़ी। स्रोत- आयोजक
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भदोही। किसी के वास्तविक स्वरूप की पहचान करने के लिए परम अस्तित्व परमात्मा को जानना आवश्यक है क्योंकि ब्रह्मबोध से ही आत्मबोध सम्भव है। ये बातें बृहस्पतिवार को सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की बातों को आज पुनः दोहराते हुए आरएल शुक्ल ने नगर के फत्तुपुर मोढ़ रोड स्थित मैदान में आयोजित निरंकारी संत समागम में कही।
उन्होंने कहा कि संसार में बहुत से धर्म हैं। उनके करोड़ों अनुयायी हैं। सबकी अपनी-अपनी आस्था के अनुसार मान्यता है। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि हर कोई सत्य की बात कर रहा है। वास्तव में यह एक निराकार परमात्मा ही है जो सदैव रहने वाला सत्य है।
वही सबका मूल स्रोत है। जब हम इस स्रोत के साथ जुड़कर एकत्व के भाव में समाहित हो जाते हैं तो फिर कोई विपरीत भाव मन में उत्पन्न नहीं होता है। उन्होंने कहा कि संसार की भौतिक उपलब्धियां अस्थाई हैं।
जिन सांसारिक उपलब्धियों के लिए मनुष्य अपना कीमती समय नष्ट कर रहा है वह सब अस्थाई हैं। परमात्मा जितना बाहर है उतना ही भीतर भी है। जब इस स्थायी परमात्मा की उपलब्धि होगी तभी मनुष्य के जीवन का परम उद्देश्य पूरा होगा।
कहा कि जिस तरह हम कमरे के अंधेरे को दूर करने के लिए बटन दबाते हैं और उजाले का इंतजार नहीं करना पड़ता उसी प्रकार से अज्ञानता के अंधेरे में जी रहे मनुष्य के जीवन में ब्रह्मज्ञान के होते ही अंधेरा भाग जाता है।
समागम में हजारो की संख्या में महिला पुरुष श्रद्धालु शामिल रहे। निरंकारी मंडल के स्थानीय संयोजक राजेश कुमार ने दूर दूर से आए अतिथियों का स्वागत और आभार जताया।
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उन्होंने कहा कि संसार में बहुत से धर्म हैं। उनके करोड़ों अनुयायी हैं। सबकी अपनी-अपनी आस्था के अनुसार मान्यता है। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि हर कोई सत्य की बात कर रहा है। वास्तव में यह एक निराकार परमात्मा ही है जो सदैव रहने वाला सत्य है।
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वही सबका मूल स्रोत है। जब हम इस स्रोत के साथ जुड़कर एकत्व के भाव में समाहित हो जाते हैं तो फिर कोई विपरीत भाव मन में उत्पन्न नहीं होता है। उन्होंने कहा कि संसार की भौतिक उपलब्धियां अस्थाई हैं।
जिन सांसारिक उपलब्धियों के लिए मनुष्य अपना कीमती समय नष्ट कर रहा है वह सब अस्थाई हैं। परमात्मा जितना बाहर है उतना ही भीतर भी है। जब इस स्थायी परमात्मा की उपलब्धि होगी तभी मनुष्य के जीवन का परम उद्देश्य पूरा होगा।
कहा कि जिस तरह हम कमरे के अंधेरे को दूर करने के लिए बटन दबाते हैं और उजाले का इंतजार नहीं करना पड़ता उसी प्रकार से अज्ञानता के अंधेरे में जी रहे मनुष्य के जीवन में ब्रह्मज्ञान के होते ही अंधेरा भाग जाता है।
समागम में हजारो की संख्या में महिला पुरुष श्रद्धालु शामिल रहे। निरंकारी मंडल के स्थानीय संयोजक राजेश कुमार ने दूर दूर से आए अतिथियों का स्वागत और आभार जताया।
