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Bhadohi News: अमेरिकी टैरिफ घटने की आहट, कालीन उद्योग में राहत की उम्मीद
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ज्ञानपुर। अमेरिका की ओर से 25 फीसदी तक टैरिफ घटाने की संभावनाओं से निर्यातक आशान्वित हो गए हैं। टैरिफ तनाव के बीच निर्यातकों को राहत की उम्मीद है।
निर्यातकों का मानना है कि टैरिफ घटकर अगर 25 फीसदी तक कर दिया जाएगा तो निश्चित तौर पर कालीन उद्योग के लिए यह बड़ी राहत होगी।
अमेरिकी विदेश मंत्री बेसेंट ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ को घटाकर 25 फीसदी किए जाने की संभावना जताई है। अमेरिकी वित्त मंत्री के अनुसार रूस से तेल खरीद कम किए जाने के बाद भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ को कम किया जा सकता है।
अमेरिकी वित्त मंत्री के इस बयान के बाद कालीन उद्योग में राहत की उम्मीद जगी है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के आंकड़ों के अनुसार भारत का सलाना कालीन निर्यातक करीब 17500 करोड़ रुपये के आसपास है।
इस बीच बीते अप्रैल महीने से अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद से ही कालीन उद्योग में भूचाल आ गया था। अमेरिका अकेले भारतीय कालीनों का 60 फीसदी हिस्सेदार रहा है।
ऐसे में भारीभरकम निर्यात टैक्स से कालीन उद्योग में मातम छा गया था। निर्यातक उद्योग के प्रभावित होने की आशंका के लिए सहम गए थे।
इस बीच निर्यातकों की ओर से तमाम प्रयास भी हुए। अब अमेरिकी वित्त मंत्री के बयान ने टैरिफ संकट से जूझ रहे निर्यातकों के लिए संजीवनी का काम किया है।
निर्यातकों को उम्मीद है कि जल्द ही यह फैसला होगा।
इससे ठप पड़े कालीन उद्योग को फिर से गति मिल सकेगी। वार्षिक कारोबार बढ़ेगा।
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निर्यातकों का मानना है कि टैरिफ घटकर अगर 25 फीसदी तक कर दिया जाएगा तो निश्चित तौर पर कालीन उद्योग के लिए यह बड़ी राहत होगी।
अमेरिकी विदेश मंत्री बेसेंट ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ को घटाकर 25 फीसदी किए जाने की संभावना जताई है। अमेरिकी वित्त मंत्री के अनुसार रूस से तेल खरीद कम किए जाने के बाद भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ को कम किया जा सकता है।
अमेरिकी वित्त मंत्री के इस बयान के बाद कालीन उद्योग में राहत की उम्मीद जगी है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के आंकड़ों के अनुसार भारत का सलाना कालीन निर्यातक करीब 17500 करोड़ रुपये के आसपास है।
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इस बीच बीते अप्रैल महीने से अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद से ही कालीन उद्योग में भूचाल आ गया था। अमेरिका अकेले भारतीय कालीनों का 60 फीसदी हिस्सेदार रहा है।
ऐसे में भारीभरकम निर्यात टैक्स से कालीन उद्योग में मातम छा गया था। निर्यातक उद्योग के प्रभावित होने की आशंका के लिए सहम गए थे।
इस बीच निर्यातकों की ओर से तमाम प्रयास भी हुए। अब अमेरिकी वित्त मंत्री के बयान ने टैरिफ संकट से जूझ रहे निर्यातकों के लिए संजीवनी का काम किया है।
निर्यातकों को उम्मीद है कि जल्द ही यह फैसला होगा।
इससे ठप पड़े कालीन उद्योग को फिर से गति मिल सकेगी। वार्षिक कारोबार बढ़ेगा।
