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Bhadohi News: एचआरपी की लिस्ट में सबसे ऊपर कम वजन वाली महिलाएं

Thu, 20 Aug 2026 01:51 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2026 01:51 AM IST
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Underweight women top the HRP list.
जिला अस्पताल के ओपीडी पर महिलाओं की लगी लाइन। संवाद
ज्ञानपुर। बदलती जीवनशैली, तनाव, खानपान और देर से शादी के कारण जिले में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) के मामले तेजी से बढ़े हैं। यहां हर 15 में से पांच महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में हैं। पहले यह आंकड़ा बहुत कम था, लेकिन जैसे-जैसे समय बदल रहा है, इस तरह के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। जिन प्रसूता महिलाओं की वजन 35 किलोग्राम से कम है, वह एचआरपी की श्रेणी में निश्चित तौर पर होंगी। इसका मुख्य कारण पौष्टिक भोजन न करना है।
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जिले में हर महीने औसतन 700 से 800 की ओपीडी होती हैं। आम तौर पर देखा जाता है कि गर्भधारण के बाद महिलाएं आराम करने लगती है। इसका परिणाम आगे चलकर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो हर महीने औसतन 700 से 800 प्रसव होते हैं। इसमें निजी व सरकारी अस्पतालों को मिलाकर औसतन 70 फीसदी सीजर मामले होते हैं। यदि प्रसूता चाहे तो कुछ हद तक इसे रोका जा सकता है। इसका ग्राफ 50 फीसदी से नीचे आ सकता है। जिला अस्पताल के स्त्री रोग एवं प्रसूता विशेषज्ञ डॉ. मुकेश प्रजापति ने बताया कि नियमित जांच, संतुलित आहार और व्यायाम से एचआरपी के जोखिम कम किए जा सकते हैं। समय पर अल्ट्रासाउंड और ब्लड प्रेशर, मधुमेह की जांच होनी चाहिए। ग्रामीण अंचलों से लेकर जिला अस्पताल तक यह व्यवस्था है। आशा कार्यकर्ता नियमित रूप से गर्भवती महिलाओं की मॉनिटरिंग करती हैं। मातृत्व वंदन योजना के तहत निशुल्क अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था है। भानीपुर सीएचसी की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ.सीमा पंत का कहना है कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी लापरवाही के कारण हो रही है। बहुत सी महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान मिलने वाले आयरन की टैबलेट को खाती नहीं हैं। उन्हें परेशानी होती है, साथ ही बच्चे को भविष्य में दिक्कतें होती हैं। यदि आयरन की गोली का सेवन करें तो बच्चा कुपोषित नहीं होगा। जिला अस्पताल के स्त्री रोग एवं प्रसूता विशेषज्ञ डॉ. मुकेश प्रजापति का कहना है कि गर्भावस्था में देखभाल जरूरी है। चिकित्सकीय परामर्श पर दवाओं का सेवन करें, एचआरपी का खतरा समाप्त हो जाएगा। दवा के साथ पौष्टिक भोजन करें, जिसमें आयरन, कैल्शियम की मात्रा अधिक मिलती हो। जंक फूड के सेवन से बचना चाहिए। 35 किलो से महिला का वजन कम है, तो वह एचआरपी की श्रेणी में निश्चित रूप से है।
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डॉ. मुकेश प्रजापति ने बताया कि प्रसूता का वजन 35 किलोग्राम से कम है तो वह एचआरपी की श्रेणी में है। मोटापा, मधुमेह, ब्लड प्रेशर, थायरॉइड, एनीमिया, 35 की उम्र के बाद गर्भधारण, पिछली बार सिजेरियन या गर्भपात होना प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा जंक फूड, शारीरिक गतिविधि न होना, धूम्रपान और मानसिक तनाव भी जोखिम बढ़ाते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान पौष्टिक भोजन करना जच्चा-बच्चा दोनों के लिए बेहतर व फायदेमंद होता है।
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