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Bijnor News: बिजनौर की धरती से समृद्ध हुई हिंदी, बनी जन-जन की भाषा

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 10 Jan 2026 12:22 AM IST
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Hindi, enriched by the land of Bijnor, became the language of the masses.
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कोतवाली देहात/बिजनौर। आज विश्व हिंदी दिवस मनाया जा रहा है। बिजनौर का हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में अतुलनीय योगदान रहा है। यहां जन्मे साहित्यकारों ने इसे जन-जन की भाषा बनाने में महती भूमिका निभाई।
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हिंदी आज विश्व पटल पर प्रसार वाली भाषा है। आजादी से पूर्व उच्च शिक्षा की सभी पुस्तक अंग्रेजी में ही प्रकाशित होती थी। स्वामी श्रद्धानंद ने बिजनौर की धरती से पहली बार उच्च शिक्षा की पुस्तकों का अनुवाद हिंदी में कराया। इसके बाद उच्च शिक्षा में हिंदी भाषा के माध्यम से पढ़ाई होनी शुरू हुई। गुरुकुल कांगड़ी में सबसे पहले उच्च शिक्षा की पढ़ाई हिंदी में शुरू कराई गई। जनपद के साहित्यकारों ने अपनी लेखनी से हिंदी भाषा को समृद्ध किया।
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जनपद में जन्मे गजलकार दुष्यंत कुमार को हिंदी गजल का प्रणेता कहा जाता है। उन्होंने विरोधी स्वर में कविताएं लिखी। उन्होंने सबसे पहले हिंदी में गजल की शुरुआत की। जनपद के ग्राम नायक नंगला में जन्मे प्रसिद्ध साहित्यकार पंडित पदम सिंह शर्मा ने बिहारी सतसई पर टीका लिखी थी, जिसके बाद उन्हें पहला मंगला पारितोषिक सम्मान प्रदान किया गया था। पंडित रुद्रदत्त शर्मा ने पत्रकारिता के क्षेत्र में सफलता प्राप्त की। उन्हें संपादकाचार्य कहा जाता है। जनपद के रविंद्र नाथ त्यागी व्यंग्य विधा के प्रसिद्ध रचनाकार रहे। उन्हें देश में व्यंग्य विधा का मजबूत स्तंभ माना जाता था। महावीर अधिकारी ने हिंदी की कई विधाओं में लेखन किया। बिजनौर के साहित्यकारों ने हिंदी भाषा को अपनी लेखनी से समृद्ध किया।
वरिष्ठ साहित्यकार भोलानाथ त्यागी का कहना है कि हिंदी विश्व पटल पर अपनी पहचान बना रही है। हिंदी की समृद्धता के लिए हिंदी के साहित्यकार तथा रचनाकारों को समुचित सम्मान देना चाहिए।
वरिष्ठ साहित्यकार रश्मि अग्रवाल का कहना है कि वह कई देशों में जा चुकी हैं और प्रत्येक देश में हिंदी भाषा बोलकर उन्होंने संवाद किया। ज्यादातर देशों में हिंदी को समझने तथा बोलने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
साहित्यकार अनिल शर्मा का कहना है कि हिंदी विश्व भर में 200 विश्वविद्यालय में पढ़ाई जा रही है।रोम के एफिल टावर पर हिंदी में संदेश लिखे हुए आ रहे हैं। एफिल टावर की स्क्रीन पर आपका स्वागत है लिखा हुआ आता है इससे हम हिंदी के प्रसार का अनुमान लगा सकते हैं।

121 पुस्तकों की रचना कर चुके ग्राम बाकर नगला निवासी जयप्रकाश नवेंदु का कहना है कि भारत में संस्कृत भाषी तथा द्रविड़ भाषी दो भाषाओं में विभक्त हैं। हिंदी का प्रसार पूरी दुनिया में हो रहा है। आज हिंदी विश्व की दूसरी सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा बन गई है।
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