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Bijnor News: तंजील अहमद हत्याकांड में बरी होने पर बरेली जेल से रिहा हुआ रैयान
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स्योहारा। एनआईए डीएसपी तंजील अहमद व उनकी पत्नी फरजाना का फाइल फोटो व हत्यारोपी रैयान का फाइल फो
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स्योहारा। सहसपुर के चर्चित तंजील अहमद हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बरी होने के बाद रैयान को शनिवार शाम बरेली जेल से रिहा कर दिया गया। करीब दस साल छह दिन जेल में बिताने के बाद रिहा हुए रैयान के मामले ने एक बार फिर पूरे प्रकरण को चर्चा में ला दिया है।
एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या के मामले में आरोपी रहे रैयान को शनिवार शाम करीब 6:30 बजे बरेली जेल से रिहा कर दिया गया। वह सात अप्रैल 2016 से जेल में बंद था। इस मामले में बिजनौर की अदालत ने 2022 में बड़ा फैसला सुनाते हुए रैयान और मुनीर को दोषी करार दिया था और दोनों को फांसी व एक एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
मामले में नामजद अन्य तीन आरोपी तंजीम, जैनी और रिजवान को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था। हालांकि, फैसले के खिलाफ रैयान और मुनीर ने हाईकोर्ट में अपील की थी। अपील लंबित रहने के दौरान 19 नवंबर 2022 को मुनीर की वाराणसी के सरसुंदरलाल अस्पताल में संक्रमण के चलते मौत हो गई, जिससे उसकी अपील स्वतः समाप्त हो गई।
वहीं रैयान की अपील पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 31 मार्च 2026 को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है और गवाहों के बयान भी स्पष्ट नहीं हैं। इसे गंभीर त्रुटि मानते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई फांसी की सजा को रद्द कर दिया और रैयान को बरी कर दिया था।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद शनिवार को रैयान की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। जेल से बाहर आते ही परिजनों ने उसे गले लगा लिया। रैयान के पिता सहादत हुसैन ने फैसले को न्याय की जीत बताते हुए कहा कि लंबे संघर्ष के बाद सच्चाई सामने आई है।
ये था मामला : दो अप्रैल 2016 की रात स्योहारा क्षेत्र में एनआईए के डीएसपी मोहम्मद तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना पर बाइक सवार हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं। हमले में तंजील अहमद की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल फरजाना ने उपचार के दौरान अगले दिन दम तोड़ दिया था।
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एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या के मामले में आरोपी रहे रैयान को शनिवार शाम करीब 6:30 बजे बरेली जेल से रिहा कर दिया गया। वह सात अप्रैल 2016 से जेल में बंद था। इस मामले में बिजनौर की अदालत ने 2022 में बड़ा फैसला सुनाते हुए रैयान और मुनीर को दोषी करार दिया था और दोनों को फांसी व एक एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
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मामले में नामजद अन्य तीन आरोपी तंजीम, जैनी और रिजवान को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था। हालांकि, फैसले के खिलाफ रैयान और मुनीर ने हाईकोर्ट में अपील की थी। अपील लंबित रहने के दौरान 19 नवंबर 2022 को मुनीर की वाराणसी के सरसुंदरलाल अस्पताल में संक्रमण के चलते मौत हो गई, जिससे उसकी अपील स्वतः समाप्त हो गई।
वहीं रैयान की अपील पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 31 मार्च 2026 को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है और गवाहों के बयान भी स्पष्ट नहीं हैं। इसे गंभीर त्रुटि मानते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई फांसी की सजा को रद्द कर दिया और रैयान को बरी कर दिया था।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद शनिवार को रैयान की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। जेल से बाहर आते ही परिजनों ने उसे गले लगा लिया। रैयान के पिता सहादत हुसैन ने फैसले को न्याय की जीत बताते हुए कहा कि लंबे संघर्ष के बाद सच्चाई सामने आई है।
ये था मामला : दो अप्रैल 2016 की रात स्योहारा क्षेत्र में एनआईए के डीएसपी मोहम्मद तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना पर बाइक सवार हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं। हमले में तंजील अहमद की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल फरजाना ने उपचार के दौरान अगले दिन दम तोड़ दिया था।

स्योहारा। एनआईए डीएसपी तंजील अहमद व उनकी पत्नी फरजाना का फाइल फोटो व हत्यारोपी रैयान का फाइल फो