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Budaun News: चौकिए मत, तालाब नहीं हाईवे है, फंसे तो खुद होंगे जिम्मेदार
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उझानी में दिल्ली हाईवे पर भरा नाले का पानी। संवाद
- फोटो : 1
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उझानी। गहरे गड्ढे तो कहीं सड़कों पर नाले-नालियों का पानी... इससे भी अधिक दुर्दशा देखनी है तो बदायूं- दिल्ली हाईवे पर चले आइए। गांव कुड़ानरसिंहपुर के ठीक सामने नाले का पानी भरने से हाईवे की एक लेन ने तालाब का रूप ले लिया है। सफर में चालक की मामूली सी चूक वाहन ही नहीं, बल्कि सवारियों की जान भी जोखिम में डाल सकती है।
कस्बे से सटे गांव कुड़ानरसिंहपुर में मेंथा फैक्टरी के ठीक सामने हाईवे की एक लेन पर नाले का पानी करीब डेढ़ महीना से भरा है। शुरुआती दिनों में पानी भरी लेन पर वाहनों की आवाजाही रहने पर सड़क पर गहरे गड्ढे हो गए। इसके बाद वाहन फंसने लगे तो पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने पानी के निकास और क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत कराने के बजाय प्रभावित लेन पर पिछले महीने वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी। खासकर रात में चालकों को सड़क पर भरे पानी का तभी अहसास हो पाता है, जब वह करीब पहुंच जाते हैं। ऐसे में वाहन पर काबू पाना आसान नहीं होता।
बाइक सवारों को गिरकर घायल होने तो कभी ट्रैक्टर- ट्रॉलियों, कार और मेटाडोर के पलटने के मामले भी सामने आ चुके हैं। दो दिन पहले बदायूं निवासी अंबरीश की कार सड़क पर भरे पानी में बोनट तक डूब जाने के चश्मदीद कुड़ानरसिंहपुर निवासी राकेश गौतम ने बताया कि कार की रफ्तार अधिक होती तो सवार दो लोगों की जान भी जा सकती थी। डेढ़ सप्ताह पहले केमिकल भरे ड्रमों से लदा कैंटर भी पलट गया था। अधिकारियों को सिर्फ बड़ा हादसा होने का इंतजार है।
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कच्चे नाले की खोदाई से भी नहीं चला काम
कुड़ानरसिंहपुर में मेंथा फैक्टरी के सामने हाईवे की एक लेन पर भरे नाले के पानी की निकास की व्यवस्था के लिए पिछले महीने ब्लॉक कर्मियों की ओर से अस्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाया गया था। ब्लॉक कर्मियों ने हाईवे किनारे कच्चा नाला खुदवा दिया। इससे सिर्फ तीन दिन ही राहत मिल पाई। इसके बाद पानी के निकास की ठोस व्यवस्था नहीं हो पाई।
संकेतक न बैरिकेडिंग, कैसे बचेगा हादसा
पीडब्ल्यूडी ने दिल्ली हाईवे पर भरे नाले के पानी के निकास की व्यवस्था कराने के बजाय प्रभावित लेन पर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी। वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए न तो संकेतक लगाए गए, न ही बैरिकेडिंग कराई गई है। सिर्फ पीली मिट्टी डालकर छोड़ दी गई, जो हवा के झोकों के साथ आधे से अधिक उड़ गई है।
समस्या के बारे में जानकारी कराई जाएगी कि किस प्रकार से इसका निस्तारण कराया जाए, ताकि राहगीरों को परेशानी का सामना न करना पड़े। - वंदना सोनकर, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी
कस्बे से सटे गांव कुड़ानरसिंहपुर में मेंथा फैक्टरी के ठीक सामने हाईवे की एक लेन पर नाले का पानी करीब डेढ़ महीना से भरा है। शुरुआती दिनों में पानी भरी लेन पर वाहनों की आवाजाही रहने पर सड़क पर गहरे गड्ढे हो गए। इसके बाद वाहन फंसने लगे तो पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने पानी के निकास और क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत कराने के बजाय प्रभावित लेन पर पिछले महीने वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी। खासकर रात में चालकों को सड़क पर भरे पानी का तभी अहसास हो पाता है, जब वह करीब पहुंच जाते हैं। ऐसे में वाहन पर काबू पाना आसान नहीं होता।
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बाइक सवारों को गिरकर घायल होने तो कभी ट्रैक्टर- ट्रॉलियों, कार और मेटाडोर के पलटने के मामले भी सामने आ चुके हैं। दो दिन पहले बदायूं निवासी अंबरीश की कार सड़क पर भरे पानी में बोनट तक डूब जाने के चश्मदीद कुड़ानरसिंहपुर निवासी राकेश गौतम ने बताया कि कार की रफ्तार अधिक होती तो सवार दो लोगों की जान भी जा सकती थी। डेढ़ सप्ताह पहले केमिकल भरे ड्रमों से लदा कैंटर भी पलट गया था। अधिकारियों को सिर्फ बड़ा हादसा होने का इंतजार है।
कच्चे नाले की खोदाई से भी नहीं चला काम
कुड़ानरसिंहपुर में मेंथा फैक्टरी के सामने हाईवे की एक लेन पर भरे नाले के पानी की निकास की व्यवस्था के लिए पिछले महीने ब्लॉक कर्मियों की ओर से अस्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाया गया था। ब्लॉक कर्मियों ने हाईवे किनारे कच्चा नाला खुदवा दिया। इससे सिर्फ तीन दिन ही राहत मिल पाई। इसके बाद पानी के निकास की ठोस व्यवस्था नहीं हो पाई।
संकेतक न बैरिकेडिंग, कैसे बचेगा हादसा
पीडब्ल्यूडी ने दिल्ली हाईवे पर भरे नाले के पानी के निकास की व्यवस्था कराने के बजाय प्रभावित लेन पर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी। वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए न तो संकेतक लगाए गए, न ही बैरिकेडिंग कराई गई है। सिर्फ पीली मिट्टी डालकर छोड़ दी गई, जो हवा के झोकों के साथ आधे से अधिक उड़ गई है।
समस्या के बारे में जानकारी कराई जाएगी कि किस प्रकार से इसका निस्तारण कराया जाए, ताकि राहगीरों को परेशानी का सामना न करना पड़े। - वंदना सोनकर, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी