Budaun Ground Report: मेडिकल कॉलेज, स्पोर्ट्स स्टेडियम और गंगा घाट पर कितना हुआ बदलाव, जानिए इस रिपोर्ट में
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट तेज हो गई है, और इस चुनावी बिगुल से पहले ही राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कसनी शुरू कर दी है। इस परिप्रेक्ष्य में, अमर उजाला की टीम जमीनी हकीकत को टटोलने के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर रही है।
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट तेज हो गई है, और इस चुनावी बिगुल से पहले ही राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कसनी शुरू कर दी है। इस परिप्रेक्ष्य में, अमर उजाला की टीम जमीनी हकीकत को टटोलने के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर रही है। इस बार हमारी टीम बदायू जिले में सरकारी योजनाओं के आम जनजीवन पर पड़े प्रभाव और विकास के दावों की असल तस्वीर को समझने का प्रयास किया गया। इस पड़ताल में मेडिकल कॉलेज, स्पोर्ट्स स्टेडियम और गंगा घाट पर कितना काम हुआ इस पर ध्यान केंद्रित किया गया।
'मेडिकल कॉलेज में हुए कई बदलाव'
बदायूं में अमर उजाला की टीम सबसे पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंची। यहां के प्रिंसिपल डॉक्टर अरुण कुमार ने बातचीत के दौरान बताया कि पहले ये होता था कि फर्स्ट प्रोफ, सेकंड प्रोफ, मिनी प्रोफ में सब्जेक्ट वाइज होती थी। लेकिन अब क्या हुआ? इंटीग्रेटेड हो गया। फर्स्ट ईयर में ही क्लीनिकल एक्सपोज़र होता है। पहले सेकंड ईयर तक भी क्लीनिकल में नहीं जाते थे। आज की डेट में बच्चा फर्स्ट ईयर में जाता है तो पहले उसका स्पोर्ट्स एक्टिविटी, कंप्यूटर, गेमिंग इन 15 दिन में ये एक्टिविटी होती है जो पहले नहीं होती थी। फिर इसके बाद में बच्चा एनाटमी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री के साथ-साथ में मेडिसिन, सर्जरी, गायनी जो उसको बाद में क्लीनिकल एक्सपोज़र दिया जाता है। जिसे बोलते हैं अर्नी क्लीनिकल एक्सपोज़र। तो एनएमसी ने इसको देखते हुए कि ये इसको पहले आईएमजी का नाम दिया है इंडियन मेडिकल ग्रेजुएट। ये एक मेन डिफरेंस है। बच्चे का एक इंटरेस्ट पैदा होता है। वरना दो साल तक तो बच्चे को पता नहीं होता कि हम एमबीबीएस कर रहे हैं, हम बीए कर रहे हैं। जब वो मेडिसिन पढ़ेगा, पेशेंट देखेगा तो उसके अंदर एक पॉजिटिव एंथओ आता है।
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'खेलो इंडिया जैसी योजनाओं से बच्चे हो रहे मोटिवेट'
बदायूं के स्पोर्ट्स स्टेडियम में यहां के बॉक्सिंग कोच सेवर अली खान ने बताया कि पहले और अब में जमीन आसमान का अंतर आ चुका है क्योंकि पहले इतनी खेल सुविधाएं नहीं थी और न ही इतने खेल के मैदान हुआ करते थे लेकिन आज हम देखते हैं कि हमारे हर स्टेट में हर जिले में छोटे-छोटे जिलों में भी स्टेडियम बनाए जा रहे हैं और इसमें गवर्नमेंट का बहुत बड़ा बड़ा रोल है। आज जिस तरह से मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री लाइव आकर बच्चों को कन्वेंस कर रहे हैं। कम एंड प्ले और खेलो इंडिया जैसी योजनाओं से बच्चे मोटिवेट हो रहे हैं। बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी इंटरेस्ट ले रहे हैं और आपके सामने ये रिजल्ट है कि पहले कभी हम एक-एक मेडल को तरसते थे, आज इंडिया में बच्चे मेडल भी लेकर आ रहे हैं और अपने प्रदेश का और देश का नाम भी रोशन कर रहे हैं। वहीं कोच ने बताया कि मैं खुद एक बैडमिंटन कोच हूं यहां पर और मेरा काम यहां पर बच्चों को ट्रेनिंग देना है और जब मैं यहां पे पोस्ट होकर आई थी यहां तब कोर्ट की हालत ठीक नहीं थी। जिस वजह से हमारे बच्चे जो प्रोफेशनल ट्रेनिंग करने वाले हैं वो डीमोटिवेट हो जाते थे।
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'पूरे भारत में है धार्मिक माहौल'
सक्षम यूपी के तहत अमर उजाला की टीम कछला घाट पहुंची जहां स्थानीय पंडित मुकुंद बल्लभ भट्ट ने बातचीत में बताया कि कछला गंगा तट है और तमाम यात्री सभी क्षेत्र के आते हैं। पूरा राजस्थान, मध्य प्रदेश अन्य क्षेत्रों से लोग यहां पर स्नान के लिए आते हैं और यह बड़ा धार्मिक स्थल है। पुजारी ने सीएम योगी को देव पुरुष बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश क्या पूरे भारत में धार्मिक माहौल है। घाटों का सौंदकरण हो रहा है ये सबको अच्छा लगता है। रोजगार भी बढ़ेगा। वहीं बातचीत के दौरान एक बुजुर्ग ने कहा कि पहले कुछ नहीं था अब काम बढ़िया हो रहा है। योगी राज में सबकी सुरक्षा है। कैसे भी जाओ, कैसे भी आओ बढ़िया काम हो रहा है योगी के राज में। योगी राज से पहले लूटपाट ज्यादा होती थी।
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