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UP News: गंगा एक्सप्रेसवे से बदलेगी किस्मत, बदायूं-शाहजहांपुर में उद्योगों की दस्तक, बरेली में निवेश का हब

संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Published by: Mukesh Kumar Updated Wed, 29 Apr 2026 03:35 PM IST
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सार

गंगा एक्सप्रेसवे से यातायात के साथ विकास को भी रफ्तार मिलेगी। बदायूं, शाहजहांपुर और बरेली में औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है, जिससे रोजगार बढ़ेगा।  लखनऊ और दिल्ली के बीच का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बरेली अब एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के कारण और मजबूत होगा।

Ganga Expressway will boost industries in Badaun-Shahjahanpur create investment hub in Bareilly
गंगा एक्सप्रेसवे - फोटो : amar ujala
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विस्तार

गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने के साथ ही बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर की किस्मत बदलने जा रही है। एक्सप्रेसवे को सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि एक बड़े औद्योगिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके किनारे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर और औद्योगिक नोड स्थापित किए जाएंगे, जिससे निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

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गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे बदायूं में औद्योगिक गतिविधियां तेजी पकड़ रही हैं। यहां मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी इकाइयों के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यहां 269 एकड़ जमीन अधिग्रहीत कर ली गई है। 15 से ज्यादा उद्यमियों ने यहां उद्योग विकसित करने की रुचि भी दिखाई है। यहां औद्योगिक भूखंडों के आवंटन की दर 52 सौ रुपये वर्गमीटर है। 
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विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यहां 100 से ज्यादा औद्योगिक इकाइयां स्थापित हो सकती हैं, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। लखनऊ और दिल्ली के बीच का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बरेली अब एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के कारण और मजबूत होगा। परिवहन लागत घटने और बाजारों तक पहुंच आसान होने से यहां मध्यम, लघु व सूक्ष्म उद्योग, फूड प्रोसेसिंग और वेयरहाउसिंग सेक्टर में तेजी आने की संभावना है।

किसानों को मिलेगा फायदा 
शाहजहांपुर में कृषि आधारित उद्योगों के विकास की संभावनाएं बढ़ गई हैं। एक्सप्रेसवे के माध्यम से किसानों को अपने उत्पाद बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा होगी, जिससे कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स पार्क जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा। शाहजहांपुर में 252 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई है और औद्योगिक भूखंडों के आवंटन की दर 44 सौ प्रति वर्गमीटर तय की गई है।

औद्योगिक विकास का व्यापक आर्थिक असर रुहेलखंड विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. आशुतोष प्रिय के अनुसार गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रहे औद्योगिक कॉरिडोर रुहेलखंड की अर्थव्यवस्था में गुणात्मक बदलाव ला सकते हैं। उनका कहना है कि इस तरह के कॉरिडोर आमतौर पर क्षेत्रीय जीडीपी में 2 से 3 प्रतिशत तक अतिरिक्त वृद्धि का आधार बनते हैं। 

50 हजार से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार 
बरेली के औद्योगिक विकास को देखते हुए उम्मीद है कि बदायूं और शाहजहांपुर में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्रों में आने वाले वर्षों में 3,000 से 5,000 करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित हो सकता है। इससे सीधे तौर पर 50,000 से अधिक रोजगार और अप्रत्यक्ष रूप से  इससे दोगुने अवसर सृजित होने की संभावना है। लॉजिस्टिक हब और वेयरहाउसिंग के विकास से परिवहन लागत में 15 से 20 फीसदी तक कमी आ सकती है, जिससे स्थानीय उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनेंगे। आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होने से कृषि और लघु उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा। 

फार्मा, टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के विस्तार से स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन 25 से 30 फीसदी तक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा आईटी पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश से क्षेत्र में हाई-स्किल रोजगार बढ़ेंगे, जिससे तकनीकी विकास को गति मिलेगी। गंगा एक्सप्रेसवे के साथ विकसित हो रहा यह औद्योगिक मॉडल न सिर्फ क्षेत्रीय असंतुलन को कम करेगा, बल्कि बदायूं और शाहजहांपुर को एक मजबूत आर्थिक ग्रोथ बेल्ट में बदल सकता है। 

तनेगी हरियाली की चादर, जल संरक्षण का होगा इंतजाम
गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ रफ्तार का प्रतीक नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जल प्रबंधन का भी बड़ा मॉडल बनकर उभर रहा है। बदायूं और शाहजहांपुर में एक्सप्रेसवे के किनारे बड़े पैमाने पर हरियाली विकसित की गई है, जहां लाखों पौधे लगाए गए हैं और साथ ही आधुनिक वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी तैयार किए गए हैं। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया गया है। 

बदायूं और शाहजहांपुर के हिस्से में सड़क किनारे लाखों पौधे लगाए गए हैं, जिनमें छायादार और पर्यावरण के अनुकूल प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई है। एक्सप्रेसवे निर्माण के साथ-साथ जल संरक्षण पर भी खास ध्यान दिया गया है। इसके तहत जगह-जगह वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए गए हैं, जिससे वर्षा जल को संरक्षित किया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार यह सिस्टम भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद करेगा और आसपास के कृषि क्षेत्रों को भी लाभ पहुंचाएगा।

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