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Budaun News: मातम में डूबा ललेई गांव, महिलाओं के शव पहुंचते ही फूट-फूटकर रोये ग्रामीण
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अमीर बानो- फाइल फोटो
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कुंवरगांव। ग्राम देवी मंदिर परिसर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद ग्राम ललेई में बृहस्पतिवार को पूरे दिन मातम छाया रहा। पोस्टमॉर्टम के बाद बुधवार देर रात दोनों मृतकों के शव गांव पहुंच गए, परिजनों और ग्रामीणों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। हर तरफ चीख-पुकार और सिसकियों का माहौल था, जिसने पूरे गांव को गमगीन कर दिया।
बृहस्पतिवार की सुबह गांव में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई। सबसे पहले अमीर बानो के शव को गांव के बाहर स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। इसके बाद ऊषा देवी के शव को परिजन और ग्रामीण कछला घाट लेकर पहुंचे, जहां विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया। दोनों ही अंतिम संस्कार में गांव के हर वर्ग और समुदाय के लोग शामिल हुए, जो गांव के आपसी भाईचारे की तस्वीर भी पेश करता नजर आया।
हादसे के बाद से गांव का माहौल पूरी तरह बदल गया। बुधवार शाम के बाद किसी भी घर में चूल्हा तक नहीं जला। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि इस हादसे ने ग्रामीणों को भीतर तक झकझोर दिया। मंदिर परिसर में जहां भजन-कीर्तन की गूंज थी, वहीं अब वहां खामोशी और मातम का माहौल था।
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अपने धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत निभा रही थीं अमीर बानो
- बुधवार को गुरु पूर्णिमा के मौके पर पीपल की डाल गिरने से गई थी जान
सत्यम शर्मा
कुंवरगांव। अमीर बानो... अपने इसी नाम की तरह अपने मधुर व्यवहार से अमीर बानो ने गांव ललेई में पहचान बनाई थी। वह दोनों समुदाय के लोगों के सुख-दुख में शामिल होती थीं और जब भी ग्राम देवी मंदिर पर भजन-कीर्तन होते थे तो उसमें शामिल होने जरूर पहुंचती थीं। वह अपने धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत को निभाती थीं। बुधवार को हुए दर्दनाक हादसे में अमीर बानो की भी जान चली गई।
गांव ललेई के ग्राम देवता मंदिर परिसर में बुधवार की दोपहर करीब तीन बजे हुए दर्दनाक हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में जान गंवाने वाली अमीर बानो की कहानी पूरे इलाके में इंसानियत और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बनी हुई थी।
गांव के लोगों का कहना था कि उन्होंने कभी धर्म की दीवारों को अपने रिश्तों के बीच नहीं आने दिया। ग्राम प्रधान श्यामलाल ने बताया कि उनका निधन पूरे गांव के लिए अपूरणीय क्षति है। ग्रामीण सचिन ने कहा कि आज गांव में हिंदू-मुस्लिम का कोई भेद नहीं है, हर व्यक्ति उनके जाने का गम मना रहा है।
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बृहस्पतिवार की सुबह गांव में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई। सबसे पहले अमीर बानो के शव को गांव के बाहर स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। इसके बाद ऊषा देवी के शव को परिजन और ग्रामीण कछला घाट लेकर पहुंचे, जहां विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया। दोनों ही अंतिम संस्कार में गांव के हर वर्ग और समुदाय के लोग शामिल हुए, जो गांव के आपसी भाईचारे की तस्वीर भी पेश करता नजर आया।
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हादसे के बाद से गांव का माहौल पूरी तरह बदल गया। बुधवार शाम के बाद किसी भी घर में चूल्हा तक नहीं जला। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि इस हादसे ने ग्रामीणों को भीतर तक झकझोर दिया। मंदिर परिसर में जहां भजन-कीर्तन की गूंज थी, वहीं अब वहां खामोशी और मातम का माहौल था।
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अपने धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत निभा रही थीं अमीर बानो
- बुधवार को गुरु पूर्णिमा के मौके पर पीपल की डाल गिरने से गई थी जान
सत्यम शर्मा
कुंवरगांव। अमीर बानो... अपने इसी नाम की तरह अपने मधुर व्यवहार से अमीर बानो ने गांव ललेई में पहचान बनाई थी। वह दोनों समुदाय के लोगों के सुख-दुख में शामिल होती थीं और जब भी ग्राम देवी मंदिर पर भजन-कीर्तन होते थे तो उसमें शामिल होने जरूर पहुंचती थीं। वह अपने धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत को निभाती थीं। बुधवार को हुए दर्दनाक हादसे में अमीर बानो की भी जान चली गई।
गांव ललेई के ग्राम देवता मंदिर परिसर में बुधवार की दोपहर करीब तीन बजे हुए दर्दनाक हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में जान गंवाने वाली अमीर बानो की कहानी पूरे इलाके में इंसानियत और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बनी हुई थी।
गांव के लोगों का कहना था कि उन्होंने कभी धर्म की दीवारों को अपने रिश्तों के बीच नहीं आने दिया। ग्राम प्रधान श्यामलाल ने बताया कि उनका निधन पूरे गांव के लिए अपूरणीय क्षति है। ग्रामीण सचिन ने कहा कि आज गांव में हिंदू-मुस्लिम का कोई भेद नहीं है, हर व्यक्ति उनके जाने का गम मना रहा है।

अमीर बानो- फाइल फोटो

अमीर बानो- फाइल फोटो