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Budaun News: छुट्टा पशुओं से परेशान किसान...फसल बचाएं या जान
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बदायूं। फसलों पर आफत बनकर टूटने वाले छुट्टा पशुओं के साथ किसानों को मौसम की मार भी झेलनी पड़ रही है। कड़ाके की ठंड में लोग जहां घर में रजाई में दुबके रहते हैं या फिर अलाव, हीटर के सामने बैठकर समय गुजारते हैं। उस समय किसान अपनी फसल बचाने के लिए छुट्टा पशुओं के पीछे दौड़ता रहता है। उसकी हर दिन और रात इसी तरह कट रही है। इस दौरान अगर वह जरा सा चूक जाता है तो छुट्टा पशु पूरी फसल उजाड़ देते हैं।
छुट्टा पशुओं से फसलों को नुकसान किसी एक इलाके में नहीं हो रहा, बल्कि पूरे जिले में छुट्टा पशु बड़ी समस्या बन चुके हैं। गंगा किनारे और नदियों के आसपास की कटरी के इलाकों में हालात भयावह हैं। इन इलाकों में पिछले कुछ साल में छुट्टा पशुओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। ढकनगला के किसान रामप्रकाश बताते हैं कि कटरी में छुट्टा पशुओं के कई बड़े झुंड शाम से ही फसलों की तरफ कूच कर जाते हैं। पशुओं के झुंड जिस खेत में भी घुस जाते हैं उस खेत में फसल का नामोनिशान मिटा देते हैं।
टोलियां बनाकर खेतों की रखवाली कर रहे किसान
कछला, कादरचौक, उसहैत और हजरतपुर इलाकों में किसानों को टोलियां बनाकर फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है। किसान कहते हैं कि पशुओं को खदेड़ते के लिए उन्हेें मीलों दूर तक दौड़ लगानी पड़ती है। नौली ततारपुर निवासी किसान प्रेमपाल ने बताया कि पूस की सर्द रातों में लोग जहां घरों से बाहर निकलना उचित नहीं समझते, उस समय किसानों को जान हथेली पर रखकर फसलों की रखवाली करनी पड़ती है। हालांकि अधिकतर गांवों में गोशालाएं हैं, लेकिन छुट्टा पशुओं को लेकर ब्लॉक स्तरीय अफसर गौर नहीं करते।
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खेत के खेत उजाड़ दिए पशुओं के
उघैती के किसान मनोज कश्यप का कहना है कि उन्होंने चार-पांच बीघा में गेहूं की बुआई की थी लेकिन पशुओं ने पूरी फसल ही उजाड़ दी। देवेंद्र और उमेश कहते हैं कि रात के 12 बजे तक रखवाली करते हैं। थककर घर चले आते हैं तो सुबह तीन चार बजे पशु आ जाते हैं और नुकसान कर देते हैं। पता चल जाए तो ठीक नहीं तो काफी नुकसान हो जाता है। केवल उघैती ही नहीं आसपास के गांव मेवली, छिबऊखुर्द, रघुनाथपुर पीपरी, महानगर, लौथर आदि में भी यही हाल है।
जिले में पशुओं की स्थिति
गोवंशीय पशु -279790
महिषवंशीय पशु -1107170
स्थायी गोशालाएं - 08
अस्थायी गोशालाएं - 229
- छुट्टा पशुओं को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। किसानों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। दातागंज की कुरखेड़ा में 500 गोवंश की क्षमता वाली गोशाला शुरू करा दी है। जो लोग अपने गोवंश छोड़ देते हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इसको लेकर लगातार निगरानी की जा रही है। - मनोज कुमार, डीएम
छुट्टा पशुओं से फसलों को नुकसान किसी एक इलाके में नहीं हो रहा, बल्कि पूरे जिले में छुट्टा पशु बड़ी समस्या बन चुके हैं। गंगा किनारे और नदियों के आसपास की कटरी के इलाकों में हालात भयावह हैं। इन इलाकों में पिछले कुछ साल में छुट्टा पशुओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। ढकनगला के किसान रामप्रकाश बताते हैं कि कटरी में छुट्टा पशुओं के कई बड़े झुंड शाम से ही फसलों की तरफ कूच कर जाते हैं। पशुओं के झुंड जिस खेत में भी घुस जाते हैं उस खेत में फसल का नामोनिशान मिटा देते हैं।
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टोलियां बनाकर खेतों की रखवाली कर रहे किसान
कछला, कादरचौक, उसहैत और हजरतपुर इलाकों में किसानों को टोलियां बनाकर फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है। किसान कहते हैं कि पशुओं को खदेड़ते के लिए उन्हेें मीलों दूर तक दौड़ लगानी पड़ती है। नौली ततारपुर निवासी किसान प्रेमपाल ने बताया कि पूस की सर्द रातों में लोग जहां घरों से बाहर निकलना उचित नहीं समझते, उस समय किसानों को जान हथेली पर रखकर फसलों की रखवाली करनी पड़ती है। हालांकि अधिकतर गांवों में गोशालाएं हैं, लेकिन छुट्टा पशुओं को लेकर ब्लॉक स्तरीय अफसर गौर नहीं करते।
खेत के खेत उजाड़ दिए पशुओं के
उघैती के किसान मनोज कश्यप का कहना है कि उन्होंने चार-पांच बीघा में गेहूं की बुआई की थी लेकिन पशुओं ने पूरी फसल ही उजाड़ दी। देवेंद्र और उमेश कहते हैं कि रात के 12 बजे तक रखवाली करते हैं। थककर घर चले आते हैं तो सुबह तीन चार बजे पशु आ जाते हैं और नुकसान कर देते हैं। पता चल जाए तो ठीक नहीं तो काफी नुकसान हो जाता है। केवल उघैती ही नहीं आसपास के गांव मेवली, छिबऊखुर्द, रघुनाथपुर पीपरी, महानगर, लौथर आदि में भी यही हाल है।
जिले में पशुओं की स्थिति
गोवंशीय पशु -279790
महिषवंशीय पशु -1107170
स्थायी गोशालाएं - 08
अस्थायी गोशालाएं - 229
- छुट्टा पशुओं को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। किसानों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। दातागंज की कुरखेड़ा में 500 गोवंश की क्षमता वाली गोशाला शुरू करा दी है। जो लोग अपने गोवंश छोड़ देते हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इसको लेकर लगातार निगरानी की जा रही है। - मनोज कुमार, डीएम