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Budaun News: ओवर स्पीड और चालकों की लापरवाही छीन रही सांसें, छह माह में 180 की गई जान
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बदायूं। कोई नौकरी पर जा रहा, कोई बाजार, कोई रिश्तेदारी और कोई अपने घर लौट रहा था। किसी ने सुबह परिवार से शाम को लौटने का वादा किया था, लेकिन वे लौटे नहीं। जिले की सड़कों ने जनवरी से 17 जून तक ओवरस्पीड और वाहनों के चालकों की लापरवाही से 180 लोगों की जान चली गई। 298 सड़क हादसों ने परिवारों को जिंदगी भर न भरने वाले जख्म दिए हैं।
जिले में सड़क हादसे सामान्य खबर नहीं, बल्कि लगातार बढ़ती त्रासदी बन चुके हैं। हर दिन किसी न किसी सड़क पर खून बह रहा है। कहीं तेज रफ्तार ट्रक जिंदगी कुचल रहा है, कहीं डंपर मौत बनकर दौड़ रहा है तो कहीं लापरवाही से चलाए जा रहे वाहन लोगों की सांसें छीन रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि हादसों के बावजूद न लोगों की रफ्तार कम हो रही है और न ही व्यवस्था की लापरवाही।
विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जनवरी से 17 जून तक 298 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 180 लोगों की मौत हुई और 118 लोग घायल हुए। यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि 180 उजड़े परिवारों की कहानी है। 180 ऐसे घर हैं जहां अब किसी का बेटा, पिता, भाई, बहन या मां कभी वापस नहीं आएगी। सबसे ज्यादा हादसों का शिकार दोपहिया वाहन चालक हो रहे हैं। हेलमेट की अनदेखी, ओवरस्पीड और यातायात नियमों की अवहेलना मौत का कारण बन रही है। वहीं हाईवे पर दौड़ रहे भारी वाहन भी लगातार लोगों की जान ले रहे हैं।
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हर महीने बड़ी संख्या में जा रही लोगों की जान
- वर्ष 2026 में सड़क हादसों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। जनवरी में 55 हादसों में 35 लोगों की मौत हुई। फरवरी में 60 दुर्घटनाओं में 30 लोगों की जान गई। मार्च में 56 हादसों में 33, अप्रैल में 51 हादसों में 31 और मई में 51 दुर्घटनाओं में 37 लोगों की मौत हुई। जून माह में अब तक 25 हादसों में 20 लोगों की जान जा चुकी है।
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इन वजहों से हो बाइक सवार हो रहे ज्यादा शिकार
- जिले में होने वाली दुर्घटनाओं में सबसे अधिक संख्या दोपहिया वाहन चालकों की है। हेलमेट न पहनना, तीन सवारी बैठाना, मोबाइल फोन पर बात करते हुए वाहन चलाना और तेज रफ्तार प्रमुख कारण बन रहे हैं। कई मामलों में बाइक सवार भारी वाहनों की चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं। संवाद
जिले में सड़क हादसे सामान्य खबर नहीं, बल्कि लगातार बढ़ती त्रासदी बन चुके हैं। हर दिन किसी न किसी सड़क पर खून बह रहा है। कहीं तेज रफ्तार ट्रक जिंदगी कुचल रहा है, कहीं डंपर मौत बनकर दौड़ रहा है तो कहीं लापरवाही से चलाए जा रहे वाहन लोगों की सांसें छीन रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि हादसों के बावजूद न लोगों की रफ्तार कम हो रही है और न ही व्यवस्था की लापरवाही।
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विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जनवरी से 17 जून तक 298 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 180 लोगों की मौत हुई और 118 लोग घायल हुए। यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि 180 उजड़े परिवारों की कहानी है। 180 ऐसे घर हैं जहां अब किसी का बेटा, पिता, भाई, बहन या मां कभी वापस नहीं आएगी। सबसे ज्यादा हादसों का शिकार दोपहिया वाहन चालक हो रहे हैं। हेलमेट की अनदेखी, ओवरस्पीड और यातायात नियमों की अवहेलना मौत का कारण बन रही है। वहीं हाईवे पर दौड़ रहे भारी वाहन भी लगातार लोगों की जान ले रहे हैं।
हर महीने बड़ी संख्या में जा रही लोगों की जान
- वर्ष 2026 में सड़क हादसों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। जनवरी में 55 हादसों में 35 लोगों की मौत हुई। फरवरी में 60 दुर्घटनाओं में 30 लोगों की जान गई। मार्च में 56 हादसों में 33, अप्रैल में 51 हादसों में 31 और मई में 51 दुर्घटनाओं में 37 लोगों की मौत हुई। जून माह में अब तक 25 हादसों में 20 लोगों की जान जा चुकी है।
इन वजहों से हो बाइक सवार हो रहे ज्यादा शिकार
- जिले में होने वाली दुर्घटनाओं में सबसे अधिक संख्या दोपहिया वाहन चालकों की है। हेलमेट न पहनना, तीन सवारी बैठाना, मोबाइल फोन पर बात करते हुए वाहन चलाना और तेज रफ्तार प्रमुख कारण बन रहे हैं। कई मामलों में बाइक सवार भारी वाहनों की चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं। संवाद