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Budaun News: एसडीएम व सीओ दातागंज ने करा दिया था आराेपी व अधिकारियों के बीच फैसला
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एचपीसीएल के इसी प्लांट के अंदर हुई थी दोनों अधिाकारियों की हत्या। संवाद
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बदायूं। 14 जनवरी को एचपीसीएल के अधिकारी सुधीर गुप्ता व हर्षित मिश्रा ने जब डीएम से मुलाकात की तो उन्होंने एसडीएम व सीओ दातागंज को मामले की जांच सौंपते हुए अधिकारियों की समस्या के निस्तारण के निर्देश दिए थे। एसडीएम व सीओ ने इस मामले की जांच न करके दोनों अधिकारियों व आरोपी अजय प्रताप सिंह को कार्यालय में बुलाया था।
सूत्र बताते हैं कि एसडीएम व सीओ ने एचपीसीएल के दोनों अधिकारियों को शांत कराते हुए फैसला करा दिया था। अधिकारियों को बताया था कि उनको किसी प्रकार का डर नहीं है। उनको सुरक्षा की कोई आवश्यकता नहीं है। निडर होकर वह अपनी ड्यूटी करें। इसके बाद जब कोई राहत नहीं मिली तो दोनों अधिकारी एसएसपी से मिले।
एसएसपी ने तत्काल सीओ उझानी को मामले की जांच सौंपी थी। इसके बाद हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट के उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता व सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा सीओ उझानी देवेंद्र कुमार से मिले। उन्होंने कार्रवाई की गुहार लगाई तो सीओ के आदेश के बाद रिपोर्ट पांच फरवरी को आरोपी के खिलाफ मूसाझाग थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
एसडीएम के कमरे में पहले से बैठा था अजय प्रताप
सूत्र बताते हैं कि जब दातागंज एसडीएम व सीओ ने प्लांट के दोनों अधिकारियों को अपने कार्यालय बुलाया तो आरोपी अजय प्रताप सिंह पहले से ही एसडीएम के कमरे में बैठा हुआ था। इस बारे में हर्षित मिश्रा के परिजनों ने भी आरोप लगाए हैं कि एसडीएम ने उनके बेटे को धमकाकर आरोपी के सामने फैसला करा दिया था। इस फैसले के बाद भी अधिकारियों को लगातार धमकियां मिल रहीं थीं, लेकिन प्रशासन व पुलिस दोनों ने ही मामले को हल्के में लिया, जिसकी वजह से दोनों अधिकारियों की गोली मारकर हत्या करने का मन आरोपी ने बना लिया।
हत्यारोपी का साथ देने वाले लोगों को चिह्नित नहीं कर सकी पुलिस
हत्या के समय आरोपी अकेला नहीं था, यह बात पुलिस भी मान रही है। उसका साथ देने वाले आरोपियों को पुलिस न तो चिह्नित कर सकी है और न ही उन पर कोई कार्रवाई ही हो सकी है।
बोलेरो चालक समेत आठ लोग पुलिस हिरासत में
दोनों अधिकारियों की हत्या के मामले में आरोपी अजय प्रताप सिंह जेल जा चुका है, जबकि आठ लोग ऐसे हैं जिनको पुलिस संदिग्ध मान रही हैं। इसमें प्लांट की गाड़ी बोलेरो चलाने वाला चालक समेत आठ लोग हैं। हत्या के बाद से इन लोगों से पुलिस पूछताछ कर रही है। आठ लोग आज भी पुलिस की हिरासत में हैं। इंस्पेक्टर वीरेंद्र तोमर ने बताया संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही है। साक्ष्य मिलने के बाद विवेचना में नाम शामिल किए जाएंगे।
कार्यालय में मौजूद बचे तीन अधिकारियों से नहीं की जा सकी पूछताछ
आरोपी अजय 12 मार्च को प्लांट की गाड़ी से अंदर घुसा और जहां अधिकारी मीटिंग कर रहे थे वहां पहुंच गया था। देखा कि वहां पांच लोग मौजूद हैं, लेकिन आरोपी सुधीर व हर्षित को पहचानता था तो उन्हीं को गोली मारी गई, जबकि कंपनी के तीन बड़े अधिकारी बच निकले थे। पुलिस अब तक उन अधिकारियों से भी पूछताछ नहीं कर सकी है।
आरोपी के मोबाइल में छिपे हैं तमाम राज, नहीं हुआ बरामद
दोनों अधिकारियों की हत्या करने के बाद आरोपी अजय कुमार फिल्मी स्टाइल में गाड़ी से थाने पहुंचा और तमंचे के साथ पुलिस के सामने अपना जुर्म कुबूल करते हुए सरेंडर कर दिया था। उस समय उसके पास मोबाइल नहीं था। पुलिस ने बाेलेरो को केस का हिस्सा बना लिया है, जबकि आरोपी का मोबाइल फोन अब तक पुलिस बरामद नहीं कर सकी है। उस मोबाइल फोन में हत्या के तमाम राज कैद बताए जा रहे हैं।
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सूत्र बताते हैं कि एसडीएम व सीओ ने एचपीसीएल के दोनों अधिकारियों को शांत कराते हुए फैसला करा दिया था। अधिकारियों को बताया था कि उनको किसी प्रकार का डर नहीं है। उनको सुरक्षा की कोई आवश्यकता नहीं है। निडर होकर वह अपनी ड्यूटी करें। इसके बाद जब कोई राहत नहीं मिली तो दोनों अधिकारी एसएसपी से मिले।
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एसएसपी ने तत्काल सीओ उझानी को मामले की जांच सौंपी थी। इसके बाद हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट के उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता व सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा सीओ उझानी देवेंद्र कुमार से मिले। उन्होंने कार्रवाई की गुहार लगाई तो सीओ के आदेश के बाद रिपोर्ट पांच फरवरी को आरोपी के खिलाफ मूसाझाग थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
एसडीएम के कमरे में पहले से बैठा था अजय प्रताप
सूत्र बताते हैं कि जब दातागंज एसडीएम व सीओ ने प्लांट के दोनों अधिकारियों को अपने कार्यालय बुलाया तो आरोपी अजय प्रताप सिंह पहले से ही एसडीएम के कमरे में बैठा हुआ था। इस बारे में हर्षित मिश्रा के परिजनों ने भी आरोप लगाए हैं कि एसडीएम ने उनके बेटे को धमकाकर आरोपी के सामने फैसला करा दिया था। इस फैसले के बाद भी अधिकारियों को लगातार धमकियां मिल रहीं थीं, लेकिन प्रशासन व पुलिस दोनों ने ही मामले को हल्के में लिया, जिसकी वजह से दोनों अधिकारियों की गोली मारकर हत्या करने का मन आरोपी ने बना लिया।
हत्यारोपी का साथ देने वाले लोगों को चिह्नित नहीं कर सकी पुलिस
हत्या के समय आरोपी अकेला नहीं था, यह बात पुलिस भी मान रही है। उसका साथ देने वाले आरोपियों को पुलिस न तो चिह्नित कर सकी है और न ही उन पर कोई कार्रवाई ही हो सकी है।
बोलेरो चालक समेत आठ लोग पुलिस हिरासत में
दोनों अधिकारियों की हत्या के मामले में आरोपी अजय प्रताप सिंह जेल जा चुका है, जबकि आठ लोग ऐसे हैं जिनको पुलिस संदिग्ध मान रही हैं। इसमें प्लांट की गाड़ी बोलेरो चलाने वाला चालक समेत आठ लोग हैं। हत्या के बाद से इन लोगों से पुलिस पूछताछ कर रही है। आठ लोग आज भी पुलिस की हिरासत में हैं। इंस्पेक्टर वीरेंद्र तोमर ने बताया संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही है। साक्ष्य मिलने के बाद विवेचना में नाम शामिल किए जाएंगे।
कार्यालय में मौजूद बचे तीन अधिकारियों से नहीं की जा सकी पूछताछ
आरोपी अजय 12 मार्च को प्लांट की गाड़ी से अंदर घुसा और जहां अधिकारी मीटिंग कर रहे थे वहां पहुंच गया था। देखा कि वहां पांच लोग मौजूद हैं, लेकिन आरोपी सुधीर व हर्षित को पहचानता था तो उन्हीं को गोली मारी गई, जबकि कंपनी के तीन बड़े अधिकारी बच निकले थे। पुलिस अब तक उन अधिकारियों से भी पूछताछ नहीं कर सकी है।
आरोपी के मोबाइल में छिपे हैं तमाम राज, नहीं हुआ बरामद
दोनों अधिकारियों की हत्या करने के बाद आरोपी अजय कुमार फिल्मी स्टाइल में गाड़ी से थाने पहुंचा और तमंचे के साथ पुलिस के सामने अपना जुर्म कुबूल करते हुए सरेंडर कर दिया था। उस समय उसके पास मोबाइल नहीं था। पुलिस ने बाेलेरो को केस का हिस्सा बना लिया है, जबकि आरोपी का मोबाइल फोन अब तक पुलिस बरामद नहीं कर सकी है। उस मोबाइल फोन में हत्या के तमाम राज कैद बताए जा रहे हैं।

एचपीसीएल के इसी प्लांट के अंदर हुई थी दोनों अधिाकारियों की हत्या। संवाद