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Budaun News: अधूरी स्क्रीनिंग और अधूरे टीकाकरण से सालभर में तीन बच्चों की गई जान

Wed, 29 Jul 2026 01:32 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jul 2026 01:32 AM IST
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Three children lost their lives in a year due to incomplete screening and vaccination.
मृतक अंश
बदायूं। जिले में कुत्ते और बंदरों के काटने के मामलों में बढ़ती लापरवाही रेबीज के खतरे को बढ़ा रही है। अधिकांश मामलों में घाव की सही स्क्रीनिंग नहीं हो पा रही है, जबकि काफी मरीज व उनके परिजन एंटी रेबीज वैक्सीन का कोर्स भी पूरा नहीं करा रहे हैं, जिसकी वजह से संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। आंकड़े बताते हैं कि करीब 60 प्रतिशत मरीज तीसरी और चौथी डोज लगवाने से पहले ही उपचार बीच में छोड़ देते हैं, जिससे संक्रमण की रोकथाम नहीं हो पाती। इसी कारण रेबीज से लगभग 11 माह में तीन मौतें हुई हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में जिले में कुत्ते, बंदर, बिल्ली और अन्य जानवरों के काटने के 1,21,460 से अधिक मरीज अपना उपचार कराने के लिए सीएचसी, पीएचसी, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज पहुंचे। सभी को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन अधिकांश मरीजों ने दूसरी डोज के बाद अस्पताल आना बंद कर दिया, जबकि रेबीज से बचाव के लिए वैक्सीन की सभी निर्धारित डोज समय पर लगवाना बेहद जरूरी होता है।
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बीच में टीकाकरण छोड़ने से संक्रमण का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं होता। यही लापरवाही जान पर भी भारी पड़ जाती है। हालांकि गहरे घाव या उच्च जोखिम वाले मामलों में एंटी रेबीज वैक्सीन के साथ रेबीज इम्यूनोग्लोब्युलिन (सीरम) भी लगाया जाता है। जिले में प्रतिदिन केवल तीन से चार मरीज ऐसे मिलते हैं, जिन्हें सीरम की जरूरत पड़ती है। शेष मरीजों का उपचार वैक्सीन से किया जाता है।
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रेबीज एक जानलेवा बीमारी

जिला अस्पताल के डॉ. आरके वर्मा ने बताया कि रेबीज एक जानलेवा बीमारी है। समय पर घाव को साबुन और बहते पानी से धोने, तत्काल अस्पताल पहुंचने और वैक्सीन की सभी डोज पूरी कराने से ही इससे बचाव संभव है। जानवर के काटने की किसी भी घटना को हल्के में न लें। उपचार का पूरा कोर्स अवश्य पूरा करें। इससे न केवल मरीज की जान बचाई जा सकती है, बल्कि रेबीज जैसी घातक बीमारी पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव है।


तीन डोज और सीरम लगने के बाद हो गई अंश की मौत

ब्लॉक सालारपुर स्थित पटेल चौक के पास रहने वाले प्रदीप पाल के बेटे अंश को दो जुलाई को सड़क पर घूम रहे कुत्ते ने काट लिया था। प्रदीप बेटे को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, ओपीडी बंद होने के कारण इमरजेंसी में ले गए। वहां पर मौजूद डाॅक्टर व स्टाफ ने अंश के घाव को साफ किया। वैक्सीन लगाई। वहां पर सीरम उपलब्ध न होने पर प्रदीप बाहर मेडिकल स्टोर से सीरम खरीद कर लाए और बेटे को इमरजेंसी में लगवाया, क्योंकि होंठ कट गया था और गाल पर भी गहरे निशान थे। ऐसे में टांके भी लगाए थे। उन्होंने दूसरी और तीसरी डोज समय पर लगवाई। चौथी डोज 31 जुलाई को लगनी थी, उससे पहले ही अंश की हालत बिगड़ गई। 22 जुलाई को फिर अस्पताल लाए, स्थिति ठीक न होने पर बरेली के एक निजी मेडिकल कॉलेज में ले गए। प्रदीप के अनुसार, डॉक्टर ने रेबीज फैलने की बात कहकर अंश को घर ले जाने की सलाह दी। अंश की इलाज के दौरान बरेली में ही मौत हो गई थी।


इनकी जा चुकी है जान
- अगस्त 2025 में सहसवान तहसील के सुजातगंज बेला गांव में में दो साल के बच्चे अदनान की रेबीज संक्रमण से मौत हुई थी।
- 26 जुलाई 2026 ब्लॉक सालारपुर स्थित पटेल चौक के पास रहने वाले प्रदीप पाल के बेटे अंश की रेबीज से मौत हो गई थी।
- 7 जुलाई 2026 को उघैती क्षेत्र निवासी मो. नाजिम के नौ साल के बेटे मो. ताजिम की रेबीज से मौत हो गई थी।

एबीसी सेंटर के बिना नहीं थमेगा कुत्तों और बंदरों का आतंक
जिले में नगर निकायों की ओर से अब तक एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर स्थापित नहीं किया गया है, जबकि शहर व नगर पालिका क्षेत्र में इसको बनाने के लिए जमीन की तलाश की गई थी। जमीन नहीं मिलने के बाद, राजस्व विभाग से भी मांग की गई। तीन माह निकलने पर भी जमीन नहीं मिल सकी है।

सात दिन का स्टॉक जिला अस्पताल में, 200 वायल और मंगाईं
जिला अस्पताल में अभी सात दिन का स्टॉक है। सीएमएस सतीश चंद्र नागर ने बताया कि 200 वायल की डिमांड और भेजी जा चुकी है। विभाग के अनुसार, अभी सभी सामुदायिक केंद्रों पर एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है।

ये गलतियां संक्रमण और जान के खतरे को बढ़ा रहीं
- गलत घरेलू उपचार : घाव पर लाल मिर्च, चूना, मिट्टी, तेल या हल्दी जैसा देशी इलाज करना सबसे बड़ी गलती है। ये चीजें वायरस को खत्म करने के बजाय घाव में गंभीर संक्रमण पैदा कर सकती हैं।
- पालतू कुत्ते को लेकर लापरवाही : अक्सर लोग सोचते हैं कि पालतू कुत्ते ने काटा है तो वैक्सीन की जरूरत नहीं। यह एक जानलेवा भूल है, कुत्ता पालतू हो या लावारिस, डॉक्टर की सलाह और वैक्सीन अनिवार्य है।

- टीकाकरण में देरी : काटने के तुरंत बाद टीका न लगवाना वायरस को शरीर में फैलने और तंत्रिका तंत्र तक पहुंचने का मौका देता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कुत्ते के काटने के 24 घंटे के भीतर वैक्सीन लगवाना चाहिए।

-जैसा कि सीएमएस सतीश चंद्र नागर ने बताया।

बच्चे की मौत के मामले में ब्लॉक सालारपुर से टीम भेजी जाएगी। जो बच्चे की मौत का पूरा ऑडिट करेगी। उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। -डॉ. तहसीन, जिला सर्विलांस अधिकारी/ डिप्टी सीएमओ

मृतक अंश

मृतक अंश

मृतक अंश

मृतक अंश

मृतक अंश

मृतक अंश

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