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Budaun News: मलबे में दो बाइकें, साइकिल क्षतिग्रस्त तो घरेलू सामान व अनाज मिट्टी में मिला
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उझानी में मकान गिरने के बाद जेसीबी से मलबा हटाते एसडीआरएफ के जवान।
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उझानी। दो मंजिला मकान के अगले हिस्से के ढहने से प्रताप सिंह और उनके भाई बादाम सिंह उर्फ नन्हे को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। बाहरी छोर के दो कमरों में दो बाइकें, साइकिल और रोजमर्रा इस्तेमाल का घरेलू सामान भी नहीं बचा। टिन की कुठियों में भरा गेहूं भी मलबा और मिट्टी में मिल गया।
मीहलाल नगला निवासी मानसिक रूप से बीमार प्रताप सिंह और उनके छोटे भाई नन्हे ने करीब 20 साल पहले साझे में एक साथ उझानी-भदरौल रोड के किनारे अपने खेत में मकान बनवाया था। एक दशक बाद ही उनके दो मंजिला मकान में दरार पड़ी तो प्रताप ने बराबर ही एक और मकान बना लिया। परिवार के लोग उसी मकान में रहने लगे। प्रताप और उनकी पत्नी अगरवती पुराने मकान के पीछे दो मंजिल पर बने कमरे के बरामदे में ही अक्सर रुक जाया करते थे। प्रथम तल के कमरों में पशुओं को बांधते थे। वहीं घरेलू सामान भी रखा हुआ था।
हादसे के बाद मौके पर पहुंचे राजस्व और पुलिस कर्मियों को अगरवती के परिजनों ने बताया कि प्रताप और नन्हे के कमरों में मौजूद दो बाइकें, दो साइकिलें, बर्तन, रोजमर्रा इस्तेमाल का घरेलू सामान और गेहूं से भरी टिन की कुठिया भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। मृतका अगरवती की बड़ी बेटी प्रीती ने बताया कि कुठिया में 15 क्विंटल गेहूं थे, जो मलबा गिरने से मिट्टी में मिल गए। चारपाई और बक्से भी नहीं बचे। मलबा हटने के बाद परिचित ग्रामीण बिखरा पड़ा सामान समेटते नजर आए।
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एसडीआरएफ की 19 सदस्यीय टीम ने हटाया मलबा
दो मंजिला मकान ढहने के बाद कछला से सुबह करीब साढ़े छह बजे पहुंची एसडीआरएफ की 19 सदस्यीय टीम ने बड़ी ही तत्परता से मलबा हटाने का काम शुरू किया। एसडीआरएफ के प्लाटून कमांडर अनिल कुमार ने बताया कि जेसीबी से मलबा हटवाते समय ग्रामीणों से जानकारी ली थी कि मलबे में पशुओं के अलावा किसी इंसान के दबे होने की तो आशंका नहीं है। ग्रामीणों ने पशुओं के दबे होने की जानकारी दी। इसके बाद करीब दो घंटे में जीवित और मृत पशुओं को बाहर निकाल लिया गया। टीम में उनके अलावा 13 सिपाही, दो डॉग, दो डॉग हैंडलर और चार वाहनों के साथ उनके चालक शामिल रहे हैं।
20 मिनट लग गए मलबे में महिला को खोजने में
उझानी। मकान ढहने के साथ तेज धमाके की आवाज सुनकर मीहलाल नगला से ग्रामीण मौके पर दौड़ पड़े। मलबे में दबी अगरवती को बचाने के लिए बेटे और बेटियों ने चीख-पुकार मचाई। करीब 20 मिनट बाद मलबे में उन्हें खोज भी लिया गया, लेकिन तब तक उनकी जान जा चुकी थी।
मीहलाल नगला और सड़क किनारे बने प्रताप व नन्हे के मकान की दूरी करीब तीन सौ मीटर है। हादसे के समय मीहलाल नगला निवासी अधिकतर ग्रामीण अपने घरों पर ही थे। धमाके की आवाज सुन मौके पर पहुंचे ग्रामीणों में चंद्रपाल ने बताया कि चीख-पुकार के बीच लोगों को यह समझ में नहीं आ पाया कि अगरवती मलबे में किस तरफ दबी हैं। ग्रामीणों ने उन्हें खोजने के लिए दो- तीन स्थानों पर मलबा हटाया, तब कहीं अगरवती का शव नजर आया। उनका सिर भी लहूलुहान था। पैर व पीठ में भी चोट थीं। अगरवती का मलबे में दबा शव बाहर की ओर मिला, लेकिन उन्हें खोजने में ग्रामीणों को करीब 20 मिनट लग गए। संवाद
भैंसें लड़ते हुए दीवार से टकराने की जताई जा रही आशंका
दो मंजिला मकान ढहने से मलबे में दबकर अगरवती मौत के बाद बिलखते परिजनों में बेटे कुलदीप ने बताया कि वह भी करीब पांच बजे जाग गए थे। नए मकान से बाहर निकलकर पुराने की ओर बढ़े तो उसमें दो भैंस आपस में लड़ती दिखीं। मेरी आवाज पर मम्मी आ गईं। वह कमरे में भैंसों को काबू कर पाती, उससे पहले ही मकान का अगला हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा। आशंका है कि भैंसें लड़ते हुए दीवार से टकरा गई हों। चूंकि मकान की दीवारों में पहले से दरार थी, इसलिए दीवारें झटका सहन नहीं कर पाईं।
हादसे में मां का साया उठ जाने से सातों संतान बदहवास
हादसे में मां का साया उठ जाने से सातों संतान बदहवास हैं। बेटे विपिन ने अपने बीमार पिता के लिए कांवड़ भी उठाई थी। जलाभिषेक कर उनके लिए दुआ मांगी। यह बताते हुए विपिन फफक पड़े। बोले, गांव में एक परिवार से रंजिश के बाद उन्होंने सड़क किनारे खेत में आशियाना बनाया। कुछेक साल बाद ही पिता प्रताप मानसिक रूप से बीमार हो गए। मां अगरवती और परिजनों ने इलाज भी कराया, लेकिन कोई खास स्वास्थ्य लाभ नहीं मिला। मां ने ही परिवार को तरक्की के रास्ते पर ले जाने की जिम्मेदारी संभाली। विपिन ने बताया कि मम्मी ने कभी भी यह अहसास नहीं होने दिया कि पापा बीमार हैं। दो बहनों और एक भाई की शादी में उन्होंने कमी नहीं छोड़ी। बेटों में राजीव, विपिन, कुलदीप, संजू और आदेश हैं तो बहनें प्रीती और खुशबू शादीशुदा हैं।
प्रताप भले की कूदकर बचा ले गए जान, लेकिन हादसे से बेखबर नजर आए
खेत में लेटे पिता प्रताप को लेकर बेटे संजू ने बताया कि उन्हें किसी बात का अहसास नहीं है। बेटों में विपिन ने तीन दिन पहले ही शिव मंदिर में जलाभिषेक कर पिता के स्वास्थ्य लाभ की कामना की थी। इसी कामना के साथ उन्होंने पैदल कांवड़ यात्रा की। बिखरे पड़े सामान को समेटकर बक्से में रख रहे विपिन ने बताया कि शायद कुदरत काे यही मंजूर था।
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मीहलाल नगला निवासी मानसिक रूप से बीमार प्रताप सिंह और उनके छोटे भाई नन्हे ने करीब 20 साल पहले साझे में एक साथ उझानी-भदरौल रोड के किनारे अपने खेत में मकान बनवाया था। एक दशक बाद ही उनके दो मंजिला मकान में दरार पड़ी तो प्रताप ने बराबर ही एक और मकान बना लिया। परिवार के लोग उसी मकान में रहने लगे। प्रताप और उनकी पत्नी अगरवती पुराने मकान के पीछे दो मंजिल पर बने कमरे के बरामदे में ही अक्सर रुक जाया करते थे। प्रथम तल के कमरों में पशुओं को बांधते थे। वहीं घरेलू सामान भी रखा हुआ था।
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एसडीआरएफ की 19 सदस्यीय टीम ने हटाया मलबा
दो मंजिला मकान ढहने के बाद कछला से सुबह करीब साढ़े छह बजे पहुंची एसडीआरएफ की 19 सदस्यीय टीम ने बड़ी ही तत्परता से मलबा हटाने का काम शुरू किया। एसडीआरएफ के प्लाटून कमांडर अनिल कुमार ने बताया कि जेसीबी से मलबा हटवाते समय ग्रामीणों से जानकारी ली थी कि मलबे में पशुओं के अलावा किसी इंसान के दबे होने की तो आशंका नहीं है। ग्रामीणों ने पशुओं के दबे होने की जानकारी दी। इसके बाद करीब दो घंटे में जीवित और मृत पशुओं को बाहर निकाल लिया गया। टीम में उनके अलावा 13 सिपाही, दो डॉग, दो डॉग हैंडलर और चार वाहनों के साथ उनके चालक शामिल रहे हैं।
20 मिनट लग गए मलबे में महिला को खोजने में
उझानी। मकान ढहने के साथ तेज धमाके की आवाज सुनकर मीहलाल नगला से ग्रामीण मौके पर दौड़ पड़े। मलबे में दबी अगरवती को बचाने के लिए बेटे और बेटियों ने चीख-पुकार मचाई। करीब 20 मिनट बाद मलबे में उन्हें खोज भी लिया गया, लेकिन तब तक उनकी जान जा चुकी थी।
मीहलाल नगला और सड़क किनारे बने प्रताप व नन्हे के मकान की दूरी करीब तीन सौ मीटर है। हादसे के समय मीहलाल नगला निवासी अधिकतर ग्रामीण अपने घरों पर ही थे। धमाके की आवाज सुन मौके पर पहुंचे ग्रामीणों में चंद्रपाल ने बताया कि चीख-पुकार के बीच लोगों को यह समझ में नहीं आ पाया कि अगरवती मलबे में किस तरफ दबी हैं। ग्रामीणों ने उन्हें खोजने के लिए दो- तीन स्थानों पर मलबा हटाया, तब कहीं अगरवती का शव नजर आया। उनका सिर भी लहूलुहान था। पैर व पीठ में भी चोट थीं। अगरवती का मलबे में दबा शव बाहर की ओर मिला, लेकिन उन्हें खोजने में ग्रामीणों को करीब 20 मिनट लग गए। संवाद
भैंसें लड़ते हुए दीवार से टकराने की जताई जा रही आशंका
दो मंजिला मकान ढहने से मलबे में दबकर अगरवती मौत के बाद बिलखते परिजनों में बेटे कुलदीप ने बताया कि वह भी करीब पांच बजे जाग गए थे। नए मकान से बाहर निकलकर पुराने की ओर बढ़े तो उसमें दो भैंस आपस में लड़ती दिखीं। मेरी आवाज पर मम्मी आ गईं। वह कमरे में भैंसों को काबू कर पाती, उससे पहले ही मकान का अगला हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा। आशंका है कि भैंसें लड़ते हुए दीवार से टकरा गई हों। चूंकि मकान की दीवारों में पहले से दरार थी, इसलिए दीवारें झटका सहन नहीं कर पाईं।
हादसे में मां का साया उठ जाने से सातों संतान बदहवास
हादसे में मां का साया उठ जाने से सातों संतान बदहवास हैं। बेटे विपिन ने अपने बीमार पिता के लिए कांवड़ भी उठाई थी। जलाभिषेक कर उनके लिए दुआ मांगी। यह बताते हुए विपिन फफक पड़े। बोले, गांव में एक परिवार से रंजिश के बाद उन्होंने सड़क किनारे खेत में आशियाना बनाया। कुछेक साल बाद ही पिता प्रताप मानसिक रूप से बीमार हो गए। मां अगरवती और परिजनों ने इलाज भी कराया, लेकिन कोई खास स्वास्थ्य लाभ नहीं मिला। मां ने ही परिवार को तरक्की के रास्ते पर ले जाने की जिम्मेदारी संभाली। विपिन ने बताया कि मम्मी ने कभी भी यह अहसास नहीं होने दिया कि पापा बीमार हैं। दो बहनों और एक भाई की शादी में उन्होंने कमी नहीं छोड़ी। बेटों में राजीव, विपिन, कुलदीप, संजू और आदेश हैं तो बहनें प्रीती और खुशबू शादीशुदा हैं।
प्रताप भले की कूदकर बचा ले गए जान, लेकिन हादसे से बेखबर नजर आए
खेत में लेटे पिता प्रताप को लेकर बेटे संजू ने बताया कि उन्हें किसी बात का अहसास नहीं है। बेटों में विपिन ने तीन दिन पहले ही शिव मंदिर में जलाभिषेक कर पिता के स्वास्थ्य लाभ की कामना की थी। इसी कामना के साथ उन्होंने पैदल कांवड़ यात्रा की। बिखरे पड़े सामान को समेटकर बक्से में रख रहे विपिन ने बताया कि शायद कुदरत काे यही मंजूर था।

उझानी में मकान गिरने के बाद जेसीबी से मलबा हटाते एसडीआरएफ के जवान।

उझानी में मकान गिरने के बाद जेसीबी से मलबा हटाते एसडीआरएफ के जवान।

उझानी में मकान गिरने के बाद जेसीबी से मलबा हटाते एसडीआरएफ के जवान।

उझानी में मकान गिरने के बाद जेसीबी से मलबा हटाते एसडीआरएफ के जवान।