{"_id":"69c2c62e16bb3c35be0c624f","slug":"on-the-sixth-day-of-navratri-worshiped-maa-katyayani-and-prayed-for-happiness-and-prosperity-bulandshahr-news-c-133-1-bul1002-150753-2026-03-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bulandshahar News: नवरात्र के छठे दिन मां कत्यायनी की पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना की","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bulandshahar News: नवरात्र के छठे दिन मां कत्यायनी की पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना की
विज्ञापन
विज्ञापन
बुलंदशहर/अहार/नरौरा। चैत्र नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने मां कात्यायनी की पूजा अर्चना कर मन्नतें मांगीं और सुख समृद्धि की कामना की। मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुबह से ही भीड़ उमड़ी। घर में भी विधि-विधान से माता के दिव्य स्वरूप का पूजन हुआ। श्रद्धालुओं ने उपवास रखे। शाम को मंदिर में आरती की गई।
नगर के भवन मंदिर, साठा स्थित राज राजेश्वर मंदिर समेत अन्य मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। अहार के अवंतिका देवी मंदिर और नरौरा के बैलोन भवानी मंदिर समेत जिलेभर के मंदिरों में भी सुबह से लेकर दोपहर बाद तक श्रद्धा पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे।
वहीं, दूसरी ओर चैत्र नवरात्र में कहीं पर भजन तो कहीं पर कीर्तन व संकीर्तन का आयोजन चल रहा है। पं. कैलाश शर्मा ने बताया कि नवरात्र के छठे दिन मां कत्यायनी की पूजा अर्चना की जाती है। विधान है कि एक दिन कात्यायन ऋषि ने तप करके देवी से वरदान मांगा कि वह उनके कुल में पुत्री के रूप में जन्म लें। देवी को अजन्मा माना गया है। कात्यायन ऋषि की प्रसन्नता के लिए देवी ने अजन्मा स्वरूप त्याग कर ऋषि कुल में जन्म लिया। इसी कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा।
बताया कि बुधवार को नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी। यह देवी का सबसे उग्र और विनाशकारी रूप माना जाता है, जो अंधकार, भय, नकारात्मक शक्तियों और पापियों का नाश करती हैं। इन्हें शुभंकारी भी कहा जाता है क्योंकि ये भक्तों को हमेशा शुभ फल और अभय (निडरता) प्रदान करती हैं।
Trending Videos
नगर के भवन मंदिर, साठा स्थित राज राजेश्वर मंदिर समेत अन्य मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। अहार के अवंतिका देवी मंदिर और नरौरा के बैलोन भवानी मंदिर समेत जिलेभर के मंदिरों में भी सुबह से लेकर दोपहर बाद तक श्रद्धा पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे।
विज्ञापन
विज्ञापन
वहीं, दूसरी ओर चैत्र नवरात्र में कहीं पर भजन तो कहीं पर कीर्तन व संकीर्तन का आयोजन चल रहा है। पं. कैलाश शर्मा ने बताया कि नवरात्र के छठे दिन मां कत्यायनी की पूजा अर्चना की जाती है। विधान है कि एक दिन कात्यायन ऋषि ने तप करके देवी से वरदान मांगा कि वह उनके कुल में पुत्री के रूप में जन्म लें। देवी को अजन्मा माना गया है। कात्यायन ऋषि की प्रसन्नता के लिए देवी ने अजन्मा स्वरूप त्याग कर ऋषि कुल में जन्म लिया। इसी कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा।
बताया कि बुधवार को नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी। यह देवी का सबसे उग्र और विनाशकारी रूप माना जाता है, जो अंधकार, भय, नकारात्मक शक्तियों और पापियों का नाश करती हैं। इन्हें शुभंकारी भी कहा जाता है क्योंकि ये भक्तों को हमेशा शुभ फल और अभय (निडरता) प्रदान करती हैं।