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Chandauli News: चार साल से अधर में चांदपुर की गौशाला, छुट्टा पशुओं से किसान परेशान
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ताराजीवनपुर। विकास खंड सकलडीहा के चांदपुर गांव में सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट गौशाला निर्माण अनदेखी की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है। वर्ष 2023 में शुरू हुई इस बड़ी गौशाला का निर्माण तीन वर्ष बाद भी अधर में लटका है। वहीं दूसरी ओर छुट्टा पशुओं से किसान परेशान हैं।
सरकार द्वारा छुट्टा पशुओं को संरक्षित कर किसानों को राहत देने के उद्देश्य से प्रदेशभर में गौशालाओं का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन चांदपुर की हकीकत जमीन पर कुछ और ही है। गांव की लगभग 5 बीघा सरकारी जमीन पर शुरू हुआ गौशाला निर्माण अब तक अधूरा पड़ा है। गौशाला परिसर में चरनी, टिन शेड, चारा रखने की शेड, स्टाफ रूम, हैंडपंप और बाउंड्रीवॉल तो बना दिए गए, लेकिन न बिजली कनेक्शन है, न समरसेबल लगा है। स्टॉफ रूम में खिड़की-दरवाजे तक नहीं लगाए गए। गौशाला का मुख्य गेट गायब है। यह जगह भेड़-बकरियों का बसेरा बन चुकी है। कई जगह टिन शेड उखड़ना शुरू हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि चार वर्षों में एक भी पशु यहां संरक्षित नहीं किया गया। वहीं दूसरी ओर, छुट्टा पशु खेतों को रौंदकर बर्बाद कर रहे हैं।
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फसल बर्बाद और जिम्मेदारों की अनदेखी
ग्रामीणों ने बताया कि अधूरी गौशाला किसान हितों का मजाक बना रही है। जितेंद्र यादव ने बताया कि चार साल से गौशाला अधूरी पड़ी है। छुट्टा पशुओं से हमारी फसलें बर्बाद हो रही हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्य राजू यादव ने बताया कि लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी गौशाला भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। कौलेस यादव ने कहा कि गेट, समरसेबल, बिजली कुछ भी पूरा नहीं है। सुरेंद्र पहलवान ने कहा कि शासन का ड्रीम प्रोजेक्ट अधिकारी-कर्मचारी ही बर्बाद कर रहे हैं। चार साल से अधर में लटकी गौशाला भ्रष्टाचार की साफ कहानी बता रही है।
कोट--
गौशाला का काम लगभग पूर्ण है। जो भी कार्य शेष है, उसे जल्द पूरा कर गौशाला को शुरू कराया जाएगा।-- विजय सिंह, खंड विकास अधिकारी, सकलडीहा
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सरकार द्वारा छुट्टा पशुओं को संरक्षित कर किसानों को राहत देने के उद्देश्य से प्रदेशभर में गौशालाओं का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन चांदपुर की हकीकत जमीन पर कुछ और ही है। गांव की लगभग 5 बीघा सरकारी जमीन पर शुरू हुआ गौशाला निर्माण अब तक अधूरा पड़ा है। गौशाला परिसर में चरनी, टिन शेड, चारा रखने की शेड, स्टाफ रूम, हैंडपंप और बाउंड्रीवॉल तो बना दिए गए, लेकिन न बिजली कनेक्शन है, न समरसेबल लगा है। स्टॉफ रूम में खिड़की-दरवाजे तक नहीं लगाए गए। गौशाला का मुख्य गेट गायब है। यह जगह भेड़-बकरियों का बसेरा बन चुकी है। कई जगह टिन शेड उखड़ना शुरू हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि चार वर्षों में एक भी पशु यहां संरक्षित नहीं किया गया। वहीं दूसरी ओर, छुट्टा पशु खेतों को रौंदकर बर्बाद कर रहे हैं।
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फसल बर्बाद और जिम्मेदारों की अनदेखी
ग्रामीणों ने बताया कि अधूरी गौशाला किसान हितों का मजाक बना रही है। जितेंद्र यादव ने बताया कि चार साल से गौशाला अधूरी पड़ी है। छुट्टा पशुओं से हमारी फसलें बर्बाद हो रही हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्य राजू यादव ने बताया कि लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी गौशाला भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। कौलेस यादव ने कहा कि गेट, समरसेबल, बिजली कुछ भी पूरा नहीं है। सुरेंद्र पहलवान ने कहा कि शासन का ड्रीम प्रोजेक्ट अधिकारी-कर्मचारी ही बर्बाद कर रहे हैं। चार साल से अधर में लटकी गौशाला भ्रष्टाचार की साफ कहानी बता रही है।
कोट
गौशाला का काम लगभग पूर्ण है। जो भी कार्य शेष है, उसे जल्द पूरा कर गौशाला को शुरू कराया जाएगा।