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Chandauli News: कूष्मांडा देवी के दर्शन-पूजन के लिए उमड़ी भक्तों की भीड़
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सकलडीहा। चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन रविवार को देवी मंदिरों में सुबह से ही कूष्मांडा देवी के दर्शन-पूजन के लिएश्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
कस्बा से लेकर ग्रामीण इलाके के मंदिरों में श्रद्धालु मां के जयकारे लगाते रहे। इस दौरान कस्बा स्थित मां दुर्गा माता, काली माता, सम्मय माता और भवानी माता के मंदिरों में भक्तों ने माला, फूल, प्रसाद और चुनरी चढ़ाई। महिलाओं ने देवी गीत भी गाए।
चैत्र नवरात्र का चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप कूष्मांडा देवी की झांकी सजाई गई थी। कस्बा स्थित प्राचीन काली माता मंदिर, दुर्गा माता मंदिर, सम्मय माता मंदिर, बउरहिया माता मंदिर और भवानी माता मंदिर सहित ग्रामीण इलाकों के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
श्रद्धालु आस्था और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना कर अपनी मन्नतें पूरी होने की कामना कर रहे थे। मंदिरों में बजते घंटों और देवी गीतों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। काली माता मंदिर के पुजारी मुरलीधर पांडेय ने बताया कि जो भक्त सच्चे मन से माता कूष्मांडा की आराधना करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। साथ ही उसके सारे कष्टों का निवारण होता है।
उन्होंने यह भी बताया कि यहां जनपद सहित अन्य जिलों और बिहार प्रांत से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
काली माता के दर्शन के बाद महिलाएं पास के नीम के पेड़ की भी पूजा कर रही थीं। ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि में मां नीम के पेड़ में भी निवास करती हैं।
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कस्बा से लेकर ग्रामीण इलाके के मंदिरों में श्रद्धालु मां के जयकारे लगाते रहे। इस दौरान कस्बा स्थित मां दुर्गा माता, काली माता, सम्मय माता और भवानी माता के मंदिरों में भक्तों ने माला, फूल, प्रसाद और चुनरी चढ़ाई। महिलाओं ने देवी गीत भी गाए।
चैत्र नवरात्र का चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप कूष्मांडा देवी की झांकी सजाई गई थी। कस्बा स्थित प्राचीन काली माता मंदिर, दुर्गा माता मंदिर, सम्मय माता मंदिर, बउरहिया माता मंदिर और भवानी माता मंदिर सहित ग्रामीण इलाकों के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
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श्रद्धालु आस्था और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना कर अपनी मन्नतें पूरी होने की कामना कर रहे थे। मंदिरों में बजते घंटों और देवी गीतों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। काली माता मंदिर के पुजारी मुरलीधर पांडेय ने बताया कि जो भक्त सच्चे मन से माता कूष्मांडा की आराधना करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। साथ ही उसके सारे कष्टों का निवारण होता है।
उन्होंने यह भी बताया कि यहां जनपद सहित अन्य जिलों और बिहार प्रांत से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
काली माता के दर्शन के बाद महिलाएं पास के नीम के पेड़ की भी पूजा कर रही थीं। ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि में मां नीम के पेड़ में भी निवास करती हैं।