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Chandauli News: उत्पात मचा रहे हैं वाराणसी से आए बंदर, एक वर्ष में 200 से अधिक को किया जख्मी
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जिले में वाराणसी आए बंदर उत्पात मचा रहे हैं। एक वर्ष में तीन सौ से अधिक लोग बंदर के हमले से जख्मी हो चुके हैं। वहीं बंदर घुरकी से एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है। बावजूद इसके प्रशासन नींद में सोया हुआ है। पिछले एक सप्ताह में कमालपुर के वीरा सराय में 10 लोग बंदर के हमले से जख्मी हुए हैं। वहीं तारापुर गांव में शनिवार को बंदरघुरकी से डरकर युवती छत से गिरकर जख्मी हो गई। शुक्रवार की शाम चंद्रप्रभा चौकी के पास गश्त कर रहे चौकी इंचार्ज तरूण पांडेय पर बंदरों ने हमला कर जख्मी कर दिया।
जिले में चंद्रप्रभा वन्य जीव विहार है। यहां जंगली जानवरों का बसेरा है। खाने की तलाश में कभी बंदर यहां से बाहर आते हैं। वहीं पिछले एक वर्ष से लगातार वाराणसी नगर से बंदर पकड़ कर नौगढ़ के जंगलों में छोड़ा जा रहा है। ये बंदर जंगलों में न रह कर शहरी और रिहायशी इलाकों में पहुंच जा रहे हैं और खूब धमा चौकडी मचा रहे हैं। बंदर न सिर्फ सामान बर्बाद कर रहे हैं बल्कि खाने की तलाश में लोगों को जख्मी भी कर रहे हैं। यदि एक वर्ष में 300 से अधिक लोग बंदरेां के हमले से जख्मी हो चुके हैं। यही नहीं चकिया में एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है। जिले में पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर, ताराजीवनपुर, चकिया, नौगढ़, चंदौली, कंदवा, धीना सहित शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र है जहां बंदरों का आतंक नहीं है। पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर के राजकीय महिला अस्पताल में एक माह में 20 से अधिक लोग बंदर के हमले के शिकार होकर पहुंचे हैं। यही हाल जिला अस्पताल का भी है। कमालपुर संवाददाता के अनुसार धानापुर विकास खंड के वीरा सराय गांव में पिछले एक सप्ताह से बंदरों का आतंक है। गांव में लगभग दो दर्जन बंदरों का झुंड डेरा जमाए हुए हैं, जिससे ग्रामीणों का घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है। पिछले एक सप्ताह में बंदरों के हमले में रामनारायण सिंह (69 वर्ष), अमरनाथ (45), सविता (40), जीतू (20), देखवंती (50), ममता (40), कंचन (35), राधिका (30), किशोर (32) और आलोक (35) सहित दर्जनों ग्रामीण जख्मी हो चुके हैं। इस संंबध में
वन दरोगा (धानापुर) फिरोज गांधी ने बताया कि बंदरों को पकड़वाने की जिम्मेदारी सरकार ने ग्राम प्रधानों को दी है। इसलिए यह मामला उनके क्षेत्राधिकार से बाहर है। वहीं बरहनी के वन दरोगा मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि उनके ब्लॉक क्षेत्र में बंदरों को पकड़ने के लिए दो पिंजरे लगाए गए हैं, जो महुंजी और दूधारी गांव में लगाए गए हैं।
इनसेट-
बंदर के हमले के दौरान युवती छत से गिरकर घायल
ताराजीवनपुर। अलीनगर थाना क्षेत्र के तारापुर गांव में बंदर के हमले से युवती छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई। घायलावस्था में जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
क्षेत्र के एक दर्जन गांवों में सैकड़ों की संख्या में बंदर जमकर उत्पाद मचा रहे हैं। यहां तक की छत से लेकर किचन तक अपना कब्जा जमा रखे हैं। इनके आतंक से क्षेत्र के लोग काफी भयभीत है। शनिवार को तारापुर निवासी हरे कृष्ण की पुत्री पायल (20) छत पर घरेलू काम कर रही थी। इसी दौरान बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया। खुद को बचाने के चक्कर में युवती छत नीचे गिरकर घायल हो गई। घायलावस्था में परिजनों ने इलाज के लिए स्थानीय एक निजी चिकित्सालय में ले गए। जहां गंभीर हालत देख चिकित्सकों ने जिला चिकित्सालय के लिए रेफर कर दिया ।जहां इलाज कराया जा रहा है। इसको लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है।
02. बंदरों के हमले से तीन जख्मी
नौगढ़। क्षेत्र के हिनौतघाट निवासी मुन्ना (45) अपने घर की छत पर कपड़े डालने गए थे। तभी अचानक बंदरों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया और काटकर घायल कर दिया। शोर सुनकर परिजन डंडे लेकर पहुंचे तो बंदर भाग गए। मुन्ना को तत्काल नौगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। इसी तरह नौगढ़ निवासी बालक ऋतिक अपने दोस्तों के साथ घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान एक बंदर ने उस पर हमला कर दिया और काटकर घायल कर दिया। परिजनों ने तुरंत उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। यहां डॉक्टर सत्या ने प्राथमिक उपचार किया। राजदरी संवाददाता के अनुसार चकिया- नौगढ मुख्य मार्ग पर चंद्रप्रभा चौकी के पास गश्त कर रहे चौकी इंचार्ज तरूण पांडेय पर शुक्रवार की शाम बंदरों ने हमला कर जख्मी कर दिया था। सिपाहियों ने किसी तरह बंदरों से उन्हें आजाद कराया और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। जहां पर चिकित्सक डॉक्टर नागेंद्र पटेल ने प्राथमिक उपचार किया।
इनसेट-
बंदर घुरकी से युवक की हुई थी मौत
चकिया कोतवाली के सिकंदरपुर गांव में इसी वर्ष 22 फरवरी को गांव निवासी सरोज गुप्ता (35) बंदर से बचने के चक्कर में छत से गिरकर जख्मी हो गए। परिवार वालों ने उन्हें वाराणसी के बीएचयू ट्राॅमा सेंटर में भर्ती कराया। यहां अगले दिन उनकी मौत हो गई। गांव निवासी सालिक के दो पुत्रों में बड़ा पुत्र सरोज गुप्ता मजदूरी का काम करते थे।
इनसेट-
छत पर खेल रही बच्चे को बंदरों ने किया जख्मी
कंदवा। क्षेत्र के महुंजी गांव में 16 जनवरी को छत पर खेल रहे बच्चे को बंदरों ने काट कर किया घायल घायल कर दिया। गांव निवासी संजीव बिंद का पांच वर्षीय पुत्र सूर्या छत पर खेल रहा था।उसी दौरान वहां पहुंचे बंदरों के झुंड ने उसके ऊपर हमला बोल दिया। उसके चीखने चिल्लाने पर घर के लोग लाठी डंडा लेकर दौड़ पड़े तब जाकर बंदर भागे।
इनसेट-
पीडीडीयू जंक्शन पर भी बंदरों का आतंक
हावड़ा दिल्ली रूट पर अति व्यस्त पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर भी बंदरों का आतंक है। यहां 500 से अधिक बंदर दिन रात उत्पात मचाते हैं और यात्रियों का जख्मी करते हैं। रेल प्रशासन की ओर से कई बार वन विभाग और नगर पालिका से शिकायत की गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। स्थिति यह है कि बंदर कब हमला कर देंगे कहा नहीं जा सकता है। यही नहीं कूडे़ दान को तोड़ देते हैं और कूड़ा बिखेर देते हैं। इससे स्टेशन पर गंदगी का आलम रहता है।
कोट-
बंदर वन्य जीव हैं। उन्हें जंगलों में छोड़ा जाता है। कई बार वे खाने के चक्कर में बाहर आ जाते हैं। ऐसे में उन्हे पकड़ कर फिर से जंगलों में छोड़ा जाएगा।
अमित श्रीवास्तव, रेंजर, जयमोहनी रेंज
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जिले में चंद्रप्रभा वन्य जीव विहार है। यहां जंगली जानवरों का बसेरा है। खाने की तलाश में कभी बंदर यहां से बाहर आते हैं। वहीं पिछले एक वर्ष से लगातार वाराणसी नगर से बंदर पकड़ कर नौगढ़ के जंगलों में छोड़ा जा रहा है। ये बंदर जंगलों में न रह कर शहरी और रिहायशी इलाकों में पहुंच जा रहे हैं और खूब धमा चौकडी मचा रहे हैं। बंदर न सिर्फ सामान बर्बाद कर रहे हैं बल्कि खाने की तलाश में लोगों को जख्मी भी कर रहे हैं। यदि एक वर्ष में 300 से अधिक लोग बंदरेां के हमले से जख्मी हो चुके हैं। यही नहीं चकिया में एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है। जिले में पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर, ताराजीवनपुर, चकिया, नौगढ़, चंदौली, कंदवा, धीना सहित शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र है जहां बंदरों का आतंक नहीं है। पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर के राजकीय महिला अस्पताल में एक माह में 20 से अधिक लोग बंदर के हमले के शिकार होकर पहुंचे हैं। यही हाल जिला अस्पताल का भी है। कमालपुर संवाददाता के अनुसार धानापुर विकास खंड के वीरा सराय गांव में पिछले एक सप्ताह से बंदरों का आतंक है। गांव में लगभग दो दर्जन बंदरों का झुंड डेरा जमाए हुए हैं, जिससे ग्रामीणों का घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है। पिछले एक सप्ताह में बंदरों के हमले में रामनारायण सिंह (69 वर्ष), अमरनाथ (45), सविता (40), जीतू (20), देखवंती (50), ममता (40), कंचन (35), राधिका (30), किशोर (32) और आलोक (35) सहित दर्जनों ग्रामीण जख्मी हो चुके हैं। इस संंबध में
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वन दरोगा (धानापुर) फिरोज गांधी ने बताया कि बंदरों को पकड़वाने की जिम्मेदारी सरकार ने ग्राम प्रधानों को दी है। इसलिए यह मामला उनके क्षेत्राधिकार से बाहर है। वहीं बरहनी के वन दरोगा मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि उनके ब्लॉक क्षेत्र में बंदरों को पकड़ने के लिए दो पिंजरे लगाए गए हैं, जो महुंजी और दूधारी गांव में लगाए गए हैं।
इनसेट-
बंदर के हमले के दौरान युवती छत से गिरकर घायल
ताराजीवनपुर। अलीनगर थाना क्षेत्र के तारापुर गांव में बंदर के हमले से युवती छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई। घायलावस्था में जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
क्षेत्र के एक दर्जन गांवों में सैकड़ों की संख्या में बंदर जमकर उत्पाद मचा रहे हैं। यहां तक की छत से लेकर किचन तक अपना कब्जा जमा रखे हैं। इनके आतंक से क्षेत्र के लोग काफी भयभीत है। शनिवार को तारापुर निवासी हरे कृष्ण की पुत्री पायल (20) छत पर घरेलू काम कर रही थी। इसी दौरान बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया। खुद को बचाने के चक्कर में युवती छत नीचे गिरकर घायल हो गई। घायलावस्था में परिजनों ने इलाज के लिए स्थानीय एक निजी चिकित्सालय में ले गए। जहां गंभीर हालत देख चिकित्सकों ने जिला चिकित्सालय के लिए रेफर कर दिया ।जहां इलाज कराया जा रहा है। इसको लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है।
02. बंदरों के हमले से तीन जख्मी
नौगढ़। क्षेत्र के हिनौतघाट निवासी मुन्ना (45) अपने घर की छत पर कपड़े डालने गए थे। तभी अचानक बंदरों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया और काटकर घायल कर दिया। शोर सुनकर परिजन डंडे लेकर पहुंचे तो बंदर भाग गए। मुन्ना को तत्काल नौगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। इसी तरह नौगढ़ निवासी बालक ऋतिक अपने दोस्तों के साथ घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान एक बंदर ने उस पर हमला कर दिया और काटकर घायल कर दिया। परिजनों ने तुरंत उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। यहां डॉक्टर सत्या ने प्राथमिक उपचार किया। राजदरी संवाददाता के अनुसार चकिया- नौगढ मुख्य मार्ग पर चंद्रप्रभा चौकी के पास गश्त कर रहे चौकी इंचार्ज तरूण पांडेय पर शुक्रवार की शाम बंदरों ने हमला कर जख्मी कर दिया था। सिपाहियों ने किसी तरह बंदरों से उन्हें आजाद कराया और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। जहां पर चिकित्सक डॉक्टर नागेंद्र पटेल ने प्राथमिक उपचार किया।
इनसेट-
बंदर घुरकी से युवक की हुई थी मौत
चकिया कोतवाली के सिकंदरपुर गांव में इसी वर्ष 22 फरवरी को गांव निवासी सरोज गुप्ता (35) बंदर से बचने के चक्कर में छत से गिरकर जख्मी हो गए। परिवार वालों ने उन्हें वाराणसी के बीएचयू ट्राॅमा सेंटर में भर्ती कराया। यहां अगले दिन उनकी मौत हो गई। गांव निवासी सालिक के दो पुत्रों में बड़ा पुत्र सरोज गुप्ता मजदूरी का काम करते थे।
इनसेट-
छत पर खेल रही बच्चे को बंदरों ने किया जख्मी
कंदवा। क्षेत्र के महुंजी गांव में 16 जनवरी को छत पर खेल रहे बच्चे को बंदरों ने काट कर किया घायल घायल कर दिया। गांव निवासी संजीव बिंद का पांच वर्षीय पुत्र सूर्या छत पर खेल रहा था।उसी दौरान वहां पहुंचे बंदरों के झुंड ने उसके ऊपर हमला बोल दिया। उसके चीखने चिल्लाने पर घर के लोग लाठी डंडा लेकर दौड़ पड़े तब जाकर बंदर भागे।
इनसेट-
पीडीडीयू जंक्शन पर भी बंदरों का आतंक
हावड़ा दिल्ली रूट पर अति व्यस्त पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर भी बंदरों का आतंक है। यहां 500 से अधिक बंदर दिन रात उत्पात मचाते हैं और यात्रियों का जख्मी करते हैं। रेल प्रशासन की ओर से कई बार वन विभाग और नगर पालिका से शिकायत की गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। स्थिति यह है कि बंदर कब हमला कर देंगे कहा नहीं जा सकता है। यही नहीं कूडे़ दान को तोड़ देते हैं और कूड़ा बिखेर देते हैं। इससे स्टेशन पर गंदगी का आलम रहता है।
कोट-
बंदर वन्य जीव हैं। उन्हें जंगलों में छोड़ा जाता है। कई बार वे खाने के चक्कर में बाहर आ जाते हैं। ऐसे में उन्हे पकड़ कर फिर से जंगलों में छोड़ा जाएगा।
अमित श्रीवास्तव, रेंजर, जयमोहनी रेंज
