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Chandauli News: 111 फुट ऊंचे मंदिर में विराजमान हैं मां मंशादेवी
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कंदवा। जिले में पौराणिक महत्व के तमाम मंदिर हैं। इनमें एक बरहनी गांव स्थित मां मंशादेवी का 111 फीट ऊंचा मंदिर भी है। यहां केवल नवरात्र ही नहीं बल्कि पूरे वर्ष दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। मान्यता है कि यहां हाजिरी लगाने वाले भक्तों की मनोकामना मां अवश्य पूरे करती हैं।
सैयदराजा-जमानिया राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित बरहनी गांव का यह पौराणिक मंदिर आस्था का केंद्र है। यहां पूरे वर्ष श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। क्षेत्र के बड़े-बुजुर्गों का कहना है कि यहां जो भी सच्चे मन से अपनी मुरादें लेकर आता है, मां मंशादेवी उन्हें कभी भी खाली हाथ नहीं लौटाती हैं।
वे उनकी मंशा अवश्य पूरा करती हैं। बरहनी गांव स्थित मां मंशादेवी मंदिर प्राचीन इतिहास समेटे हुए है। पहले यहां खंडहर में मां की प्रतिमा मिली थी। उसी स्थान पर गांव के लोगों ने मिलकर एक छोटा सा मंदिर बनवाया और पूजा पाठ करने लगे। जब उन्हें शांति मिलने लगी तो धीरे-धीरे पूरे गांव के लोग पूजा-अर्चना करने लगे।
मंदिर कितना पुराना है यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन गांव के पूर्व प्रधान हरिद्वार सिंह ने वर्ष 2000 में लोगों के सहयोग से 111 फुट ऊंचे मंदिर का निर्माण कराया और मां मंशादेवी की नई मूर्ति की स्थापना कराई थी। पुरानी मूर्ति आज भी मंदिर में रखी हुई है। मंदिर के पूर्व पुजारी बांसदेव तिवारी का कहना है कि मां की ऐसी मूर्ति यहां के अलावा सिर्फ हरिद्वार में ही स्थापित है।
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सैयदराजा-जमानिया राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित बरहनी गांव का यह पौराणिक मंदिर आस्था का केंद्र है। यहां पूरे वर्ष श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। क्षेत्र के बड़े-बुजुर्गों का कहना है कि यहां जो भी सच्चे मन से अपनी मुरादें लेकर आता है, मां मंशादेवी उन्हें कभी भी खाली हाथ नहीं लौटाती हैं।
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वे उनकी मंशा अवश्य पूरा करती हैं। बरहनी गांव स्थित मां मंशादेवी मंदिर प्राचीन इतिहास समेटे हुए है। पहले यहां खंडहर में मां की प्रतिमा मिली थी। उसी स्थान पर गांव के लोगों ने मिलकर एक छोटा सा मंदिर बनवाया और पूजा पाठ करने लगे। जब उन्हें शांति मिलने लगी तो धीरे-धीरे पूरे गांव के लोग पूजा-अर्चना करने लगे।
मंदिर कितना पुराना है यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन गांव के पूर्व प्रधान हरिद्वार सिंह ने वर्ष 2000 में लोगों के सहयोग से 111 फुट ऊंचे मंदिर का निर्माण कराया और मां मंशादेवी की नई मूर्ति की स्थापना कराई थी। पुरानी मूर्ति आज भी मंदिर में रखी हुई है। मंदिर के पूर्व पुजारी बांसदेव तिवारी का कहना है कि मां की ऐसी मूर्ति यहां के अलावा सिर्फ हरिद्वार में ही स्थापित है।