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Chandauli News: तहसीलदारों ने चुनिंदा लोगों की आरसी वापस ली थी
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पीडीडीयू नगर। पंडित दीन दयाल नगर (मुगलसराय) में सरकारी और ग्राम समाज की भूमि पर कब्जा करने वाले लोगों के पक्ष में नियमों के खिलाफ आदेश पारित करने वाले तत्कालीन तहसीलदार विराग पांडेय, लालता प्रसाद और सतीश कुमार को निलंबित कर दिया गया है। मौजूदा समय में सतीश कुमार एटा, लालता प्रसाद गाजियाबाद और विराग पांडेय बुलंदशहर में एसडीएम के पद पर तैनात हैं। चंदौली डीएम चंद्रमोहन गर्ग ने बताया कि तहसीलदारों ने चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाया था। जिनसे संबंध नहीं था, उनके खिलाफ कई बार नोटिस जारी किए गए थे।
डीएम ने बताया कि पंडित दीन दयाल नगर तहसील से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि तत्कालीन तहसीलदारों ने मनमाने तरीके से सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ जारी आरसी को वापस ले लिया था और उनके पक्ष में आदेश दिया था। शिकायतों के बाद लगा कि यह बड़ा मामला है। इसके बाद एडीएम न्यायिक, एसडीएम चकिया और एसडीएम चंदौली की टीम गठित करके मामले की जांच कराई गई।
इसमें पता चला कि तहसील क्षेत्र में सरकारी भूमि जैसे बेशकीमती खलिहान, चकमार्ग, कब्रिस्तान, परती व बंजर भूमि पर अवैध कब्जा हटाने के लिए इनसे पहले के अधिकारियों ने नोटिस जारी किए थे। लेकिन इन लोगों ने जारी आरसी को गुपचुप तरीके से वापस ले लिए थे। जिन लोगों के इनसे बातचीत और संबंध थे, उनके ही आरसी वापस लिए गए थे। कई मामलों में एक ही भूमि पर पांच कब्जेदारों में से सिर्फ तीन पर ही कार्रवाई की गई जबकि दो को छोड़ दिया गया। वहीं, जिन लोगों से संबंध नहीं थे वैसे लोगाें के खिलाफ कई बार नोटिस जारी किए गए। डेढ़ महीने पहले यह रिपोर्ट शासन को भेजी गई। इसके बाद यह कार्रवाई हुई है।
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डीएम ने बताया कि पंडित दीन दयाल नगर तहसील से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि तत्कालीन तहसीलदारों ने मनमाने तरीके से सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ जारी आरसी को वापस ले लिया था और उनके पक्ष में आदेश दिया था। शिकायतों के बाद लगा कि यह बड़ा मामला है। इसके बाद एडीएम न्यायिक, एसडीएम चकिया और एसडीएम चंदौली की टीम गठित करके मामले की जांच कराई गई।
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इसमें पता चला कि तहसील क्षेत्र में सरकारी भूमि जैसे बेशकीमती खलिहान, चकमार्ग, कब्रिस्तान, परती व बंजर भूमि पर अवैध कब्जा हटाने के लिए इनसे पहले के अधिकारियों ने नोटिस जारी किए थे। लेकिन इन लोगों ने जारी आरसी को गुपचुप तरीके से वापस ले लिए थे। जिन लोगों के इनसे बातचीत और संबंध थे, उनके ही आरसी वापस लिए गए थे। कई मामलों में एक ही भूमि पर पांच कब्जेदारों में से सिर्फ तीन पर ही कार्रवाई की गई जबकि दो को छोड़ दिया गया। वहीं, जिन लोगों से संबंध नहीं थे वैसे लोगाें के खिलाफ कई बार नोटिस जारी किए गए। डेढ़ महीने पहले यह रिपोर्ट शासन को भेजी गई। इसके बाद यह कार्रवाई हुई है।
