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Exclusive: ईरान से डिग्री हासिल करने के बाद ही उलेमा को मिलती है पगड़ी की इजाजत, आलिमों का ईरान से गहरा नाता

तबस्सुम, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Sat, 14 Mar 2026 05:30 PM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी के मजहबी इदारों और मस्जिदों में इमामत करने वाले आलिमों का ईरान से गहरा नाता है। वाराणसी और आसपास के इलाकों से हर साल कई छात्र इरान के कई शहरों के हौजा-ए-इल्मिया में ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ ही पीएचडी करने के लिए जाते हैं। 

Ulama granted permission to wear turban only after obtaining degree from Iran
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

काशी की सरजमीं का ईरान के साथ मजहबी और तालीमी रिश्ता बेहद मजबूत है। यहां के मजहबी इदारों और मस्जिदों में इमामत करने वाले आलिमों का ईरान से गहरा नाता है। दरअसल, ईरान से दीनी तालीम पूरी करके लौटने के बाद ही उन्हें पगड़ी (अमामा) पहनने की इजाजत होती है और यही अमामा उनके मुश्तहिद होने की पहचान है। ईरान के शहर कुम, मशहद और इस्फहान शिया इस्लामी तालीम के बड़े केंद्र हैं।

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वाराणसी और आसपास के इलाकों से हर साल कई छात्र इन शहरों के हौजा-ए-इल्मिया में ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ ही पीएचडी करने के लिए जाते हैं। यहां फिक्ह, तफ्सीर, हदीस, अरबी व फारसी साहित्य के साथ-साथ इस्लामी दर्शन जैसे विषयों की वर्षों तक पढ़ाई करने के बाद वे डिग्री हासिल करते हैं। वतन लौटने पर उन्हें 'आलिम' के तौर पर पूर्ण मान्यता दी जाती है। मौजूदा समय में काशी में करीब 50 से ज्यादा शिया आलिम हैं, जिनमें से 90 फीसदी ने ईरान से ही की डिग्री हासिल की है।

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अमामा यानी जिम्मेदारी का एहसास 

अरबिया कॉलेज दोषीपुरा के प्रिंसिपल मौलाना अरशी ने भी ईरान से करीब 15 साल तक मजहबी तालीम हासिल की है। उनका कहना है कि पगड़ी यानी अमामा सिर्फ एक रवायत नहीं बल्कि जिम्मेदारी का एहसास है। इसे पहनने के बाद एक आलिम की जिम्मेदारी अपने मजहब और कौम के लिए कई गुना बढ़ जाती है। मुश्तहिद का दर्जा इमानिया अरबिया कॉलेज के मौलाना अमीन बताते हैं कि वरिष्ठ उलेमा यानी मुश्तहिद की मान्यता ईरान से ही मिलती है।

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मुश्तहिद वह आलिम होता है जो इस्लामी कानूनों की तशरीह यानी व्याख्या करने और नए मसलों पर शरीयत की रोशनी में अपना नजरिया रखने की काबिलियत रखता है। मौलाना अमीन ने 2002 से 2012 तक ईरान में रहकर पर्शियन लैंग्वेज में एमए और इस्लामिक थियोलॉजी (धर्ममीमांसा) में पीएचडी की है।

एमबीबीएस और इंजीनियरिंग पढ़ाई के लिए यहां से जाते हैं छात्र

मौलाना अमीन के मुताबिक ईरान सिर्फ मजहबी ही नहीं बल्कि एकेडमिक कोर्स का भी एक बड़ा केंद्र है। यहां की यूनिवर्सिटी और कॉलेज में यूपी और अन्य प्रदेश के छात्र वहां एमबीबीएस, इंजीनियरिंग, एमबीए की डिग्री लेने जाते हैं। इसके अलावा अरबी और परशियन लैंग्वेज में भी यहां के कई छात्र एमफिल और पीएचडी कर रहे हैं। पेट्रोलियम इंजीनियरिंग की पढ़ाई खास तौर पर यूनिवर्सिटी ऑफ तेहरान और शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में होती है।
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