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लकड़ी के खिलौनों ने दिलाया हस्तशिल्प अवार्ड
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फोटो-11- चित्रकूट के सीतापुर में ओडीओपी योजना में लकड़ी के खिलौने व्यवसाय को शामिल करने के बाद इस क?
- फोटो : CHITRAKUTT
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चित्रकूट। सरकार ने चित्रकूट में एक जनपद एक उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत लकड़ी के खिलौने बनाने के साथ ही काष्ठ कला को चुना है। इसका फायदा लकड़ी खिलौने बनाने वाले व काष्ठ कला (लकड़ी के फर्नीचर बनाने वाले) कारीगरों को मिलेगा। सरकार की ओर से उन्हें प्रोत्साहित कर रोजगार दिया जा रहा है। इसके लिए सरकार 25 लाख रुपये का बैंक से ऋण देगी। यह योजना 2018 से शुरू हुई थी और 19 कारीगरों को बैंक से ऋण दिलाने का कार्य किया गया था। इसमें 25 फीसदी अनुदान भी है। धर्मनगरी में लकड़ी का खिलौना बनाने का कारोबार कई सालों से चल रहा है।
18 साल वालों को मिलता है ऋण
चित्रकूट। लकड़ी के खिलाने बनने वाले जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक है, कारखाना लगाने के लिए 25 लाख का ऋण दिया जाता है। जिसमेें 25 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। 5 प्रतिशत स्वयं का अंशदान देना पड़ता है।
तीन को हस्तशिल्प अवार्ड
लकड़ी का खिलौना बनाने वाले कारीगरों में बलराज राजपूत, अजय कुमार सहित संजय को प्रदेश सरकार की तरफ से हस्तशिल्प अवार्ड दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस योजना से लकड़ी क े खिलौना बनाने वालों को प्रोत्साहन मिला है।
लकड़ी की समस्या से परेशान
कारीगर पप्पू व धीरज ने बताया कि लकड़ी के खिलौना बनाने के लिए जिस लकड़ी का उपयोग किया जाता है वह वन विभाग से जल्द नही मिलती है। वहीं बिजली की बढ़ती दरों से से लागत भी नहीं निकल पाती।
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मेलों में लगती है दुकानें
जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र के अधिकारी एसके केसरवानी ने बताया कि लकड़ी के खिलाने के कारोबार को बढ़ावा देने के लिए बैंक ऋण तो दिलाया जा ही रहा है। साथ ही शहरों में लगने वाले मेला में उनकी दुकानें भी लगाई जाती है। इसमें दिल्ली, नोएडा व लखनऊ में मेला में यहां के कारीगरों ने दुकानें लगाई है। जिससे फायदा भी हुआ है। (संवाद)
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18 साल वालों को मिलता है ऋण
चित्रकूट। लकड़ी के खिलाने बनने वाले जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक है, कारखाना लगाने के लिए 25 लाख का ऋण दिया जाता है। जिसमेें 25 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। 5 प्रतिशत स्वयं का अंशदान देना पड़ता है।
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तीन को हस्तशिल्प अवार्ड
लकड़ी का खिलौना बनाने वाले कारीगरों में बलराज राजपूत, अजय कुमार सहित संजय को प्रदेश सरकार की तरफ से हस्तशिल्प अवार्ड दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस योजना से लकड़ी क े खिलौना बनाने वालों को प्रोत्साहन मिला है।
लकड़ी की समस्या से परेशान
कारीगर पप्पू व धीरज ने बताया कि लकड़ी के खिलौना बनाने के लिए जिस लकड़ी का उपयोग किया जाता है वह वन विभाग से जल्द नही मिलती है। वहीं बिजली की बढ़ती दरों से से लागत भी नहीं निकल पाती।
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मेलों में लगती है दुकानें
जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र के अधिकारी एसके केसरवानी ने बताया कि लकड़ी के खिलाने के कारोबार को बढ़ावा देने के लिए बैंक ऋण तो दिलाया जा ही रहा है। साथ ही शहरों में लगने वाले मेला में उनकी दुकानें भी लगाई जाती है। इसमें दिल्ली, नोएडा व लखनऊ में मेला में यहां के कारीगरों ने दुकानें लगाई है। जिससे फायदा भी हुआ है। (संवाद)
