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Chitrakoot News: रोज रात में मंदाकिनी में उड़ेली जा रही सीवर की गंदगी
Sun, 28 Jun 2026 11:00 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sun, 28 Jun 2026 11:00 PM IST
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फोटो 28 सीकेटीपी 01 - पन्नाघाट के पास मंदाकिनी नदी में गिरता सीवर का गंदा पानी। संवाद
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चित्रकूट। धर्मनगरी की पवित्र मंदाकिनी नदी में रोज रात के अंधेरे में हजारों लीटर सीवर का गंदा पानी गिराया जाता है। यह गंदगी रामघाट के पास स्थित जल संस्थान के संपवेल से सीधे नदी में उड़ेली जा रही है। इससे यह नदी मैली हो रही है।
मंदाकिनी को धर्मनगरी चित्रकूट की जीवनरेखा माना जाता है। इसकी निर्मल जलधारा और आध्यात्मिक पवित्रता के लिए यह पूरे देश में विख्यात है। लोक मान्यताओं के अनुसार, यह नदी ऋषि अत्रि और माता अनुसुइया के तप से प्रकट हुई थी। मध्य प्रदेश के सतना से उद्गम यह नदी करीब 50 किमी आगे जाकर उत्तर प्रदेश के यमुना में मिल जाती है। भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल का अधिकांश समय इसी नदी किनारे व्यतीत किया था।
वे नियमित रूप से इस निर्मल जलधारा में स्नान भी किया करते थे। आज भी लाखों श्रद्धालु हर वर्ष यहां स्नान करने और पुण्य कमाने आते हैं। अब उसी पवित्र नदी में जल संस्थान के संपवेल से प्रतिदिन हजारों लीटर दूषित जल छोड़कर रोज रात के समय नदी में गंदगी उड़ेली जा रही है। बड़े पैमाने पर प्लास्टिक कचरा भी नदी में पहुंचता है और घाटों में भारी भरकम सिल्ट जमा हो जाती है। इससे जलीय जीवों और वनस्पतियों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
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जल संस्थान ने सब किए कराए पर फेरा पानी
बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह कहते हैं कि जल संस्थान के कर्मचारी अक्सर रात के समय सीवर की गंदगी को सीधे नदी में खोल देते हैं। इससे मंदाकिनी गंदी हो रही है। शिकायत पर जिम्मेदार बेपरवाह बने हुए हैं। हाल ही में बुंदेली सेना ने पन्ना घाट पर सफाई अभियान चलाया था। पर जल संस्थान सीवर के दूषित पानी को नदी में छोड़कर सब किए कराए पर पानी फेर देता है। उन्होंने जिलाधिकारी से सीवर को नदी में गिराने से रोकने और दोषी से सजा के तौर पर नदी की सफाई कराने की मांग की है।
बोले जिम्मेदार-- -- -- -- -- -- -
जल संस्थान से बात की जाएगी और मंदाकिनी नदी में सीवर के गंदे पानी को छोड़े जाने पर पाबंदी लगाई जाएगी।- स्वप्निल कुमार यादव, एडीएम नमामि गंगे।-
मंदाकिनी नदी में सीवर का गंदा पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। जल संस्थान के सीवरेज प्लांट की सभी मोटर चालू हालत में है। फिर भी दिखवाकर इसे रोका जाएगा।- मुलायम सिंह, अवर अभियंता, जल संस्थान।
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मंदाकिनी को धर्मनगरी चित्रकूट की जीवनरेखा माना जाता है। इसकी निर्मल जलधारा और आध्यात्मिक पवित्रता के लिए यह पूरे देश में विख्यात है। लोक मान्यताओं के अनुसार, यह नदी ऋषि अत्रि और माता अनुसुइया के तप से प्रकट हुई थी। मध्य प्रदेश के सतना से उद्गम यह नदी करीब 50 किमी आगे जाकर उत्तर प्रदेश के यमुना में मिल जाती है। भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल का अधिकांश समय इसी नदी किनारे व्यतीत किया था।
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वे नियमित रूप से इस निर्मल जलधारा में स्नान भी किया करते थे। आज भी लाखों श्रद्धालु हर वर्ष यहां स्नान करने और पुण्य कमाने आते हैं। अब उसी पवित्र नदी में जल संस्थान के संपवेल से प्रतिदिन हजारों लीटर दूषित जल छोड़कर रोज रात के समय नदी में गंदगी उड़ेली जा रही है। बड़े पैमाने पर प्लास्टिक कचरा भी नदी में पहुंचता है और घाटों में भारी भरकम सिल्ट जमा हो जाती है। इससे जलीय जीवों और वनस्पतियों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
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जल संस्थान ने सब किए कराए पर फेरा पानी
बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह कहते हैं कि जल संस्थान के कर्मचारी अक्सर रात के समय सीवर की गंदगी को सीधे नदी में खोल देते हैं। इससे मंदाकिनी गंदी हो रही है। शिकायत पर जिम्मेदार बेपरवाह बने हुए हैं। हाल ही में बुंदेली सेना ने पन्ना घाट पर सफाई अभियान चलाया था। पर जल संस्थान सीवर के दूषित पानी को नदी में छोड़कर सब किए कराए पर पानी फेर देता है। उन्होंने जिलाधिकारी से सीवर को नदी में गिराने से रोकने और दोषी से सजा के तौर पर नदी की सफाई कराने की मांग की है।
बोले जिम्मेदार
जल संस्थान से बात की जाएगी और मंदाकिनी नदी में सीवर के गंदे पानी को छोड़े जाने पर पाबंदी लगाई जाएगी।- स्वप्निल कुमार यादव, एडीएम नमामि गंगे।-
मंदाकिनी नदी में सीवर का गंदा पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। जल संस्थान के सीवरेज प्लांट की सभी मोटर चालू हालत में है। फिर भी दिखवाकर इसे रोका जाएगा।- मुलायम सिंह, अवर अभियंता, जल संस्थान।