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कोषागार घोटाला : चेक ट्रंकेशन सिस्टम पर डेटा फीड कर किया 43.14 करोड़ का घोटाला
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Fri, 30 Jan 2026 12:00 AM IST
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चित्रकूट। कोषागार में 43.14 करोड़ के घोटाला कर्मचारियों की मिलीभगत से चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) पर गलत पेपर लगाकर करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया है। इस खेल में मृतकों के खातों का भी दुरुपयोग हुआ। खाता नंबर बदलकर भुगतान दूसरे खातों में दर्शाया गया। यह पूरा खेल कर्मचारियों की सेटिंग से खेला गया, जिसके कारण ऑडिट में भी यह आसानी से पकड़ में नहीं आया। सालों से चल रहे इस मामले में कोषागार के कर्मचारियों की संलिप्तता के बिना यह संभव नहीं था।
वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, 93 पेंशनरों के खातों में पूरी धनराशि डालकर यह घोटाला किया गया है। जांच में पाया गया कि आधे पेंशनरों के खातों में एरियर व ग्रेच्युटी दोनों के नाम पर धनराशि का भुगतान हुआ है, जबकि शेष आधे पेंशनरों के खातों में केवल एरियर का ही भुगतान किया गया है।
एसआईटी की ओर से न्यायालय में दाखिल की गई चार्जशीट में यह बात सामने आई है कि कोषागार कर्मियों ने पेंशनरों के खातों में धनराशि भेजी। इसके बाद बिचौलियों की मिलीभगत से पेंशनरों से फोन पर संपर्क कर भेजी गई धनराशि का कुछ हिस्सा उन्हें देकर बाकी रकम आपस में बांट ली जाती थी। चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि कुछ लोगों के खातों में अनियमित तरीके से भुगतान किया गया, जबकि नियमानुसार उनके खातों में भुगतान करना असंभव था। इसके बावजूद, कोषागार कर्मियों ने बिचौलियों के खाता नंबरों का इस्तेमाल कर धनराशि का भुगतान किया और आपस में बंटवारा कर लिया। चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) पर गलत कागजात लगाकर इस पूरे खेल को अंजाम दिया गया। जांच रिपोर्ट में कोषागार कर्मियों और बिचौलियों के बीच दिन में कई बार बातचीत होने के भी प्रमाण मिले हैं।
एसआईटी प्रभारी अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि सीटीएस साॅफ्टवेयर पर कर्मियों ने बिचौलियों का डाटा फीड किया है। उसी के माध्यम से भुगतान किया गया है। इसकी कोई पत्रावली नहीं मिली है। साॅफ्टवेयर में डाटा ही फीड मिला है।
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इनके खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट :
कोषागार घोटाले में जेल में बंद पेंशनर संतोष कुमार मिश्रा, मोहन लाल, जगत नारायण त्रिपाठी, दुर्गा प्रसाद, राम शिरोमणि, जवाहर लाल, रामरतन, चंद्रिका प्रसाद, शिव बहादुर, नत्थू राम यादव, बलवंत यादव, दीनानाथ यादव, नवल किशोर, महिपाल यादव, नाथू राम, दयाराम त्रिपाठी, पारिवारिक पेंशनर धनपति देवी, लक्ष्मी देवी, कमला देवी, रुकमणी देवी, जोगवा उर्फ जुगुवा देवी, सुनीता देवी, लीला देवी, सुशीला देवी, मोहन लाल, कोषागार कर्मी विकास सिंह सचान, अशोक कुमार, बिचौलिया गोरेंद्र शिवहरे, अमृतलाल उर्फ पंचू, ओम प्रकाश, मिथलेश उर्फ भोला, दीपक कुमार पांडेय, रणविजय यादव, अजय सिंह व बृजेश कुमार के खिलाफ एसआईटी ने चार्जशीट दाखिल की है।
चेक ट्रंकेशन सिस्टम
यह एक इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सिस्टम है, जिससे बैंक चेक ट्रांजेक्शन को डिजिटल तरीके से प्रोसेस कर सकते हैं।
- इसमें चेक को स्कैन कर इलेक्ट्रॉनिक इमेज में बदल दिया जाता है।
- इमेज को प्रोसेसिंग के लिए पेइंग बैंक को भेजा जाता है।
- इसके जरिए चेक क्लियरिंग तेज और सुरक्षित होती है।
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वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, 93 पेंशनरों के खातों में पूरी धनराशि डालकर यह घोटाला किया गया है। जांच में पाया गया कि आधे पेंशनरों के खातों में एरियर व ग्रेच्युटी दोनों के नाम पर धनराशि का भुगतान हुआ है, जबकि शेष आधे पेंशनरों के खातों में केवल एरियर का ही भुगतान किया गया है।
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एसआईटी की ओर से न्यायालय में दाखिल की गई चार्जशीट में यह बात सामने आई है कि कोषागार कर्मियों ने पेंशनरों के खातों में धनराशि भेजी। इसके बाद बिचौलियों की मिलीभगत से पेंशनरों से फोन पर संपर्क कर भेजी गई धनराशि का कुछ हिस्सा उन्हें देकर बाकी रकम आपस में बांट ली जाती थी। चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि कुछ लोगों के खातों में अनियमित तरीके से भुगतान किया गया, जबकि नियमानुसार उनके खातों में भुगतान करना असंभव था। इसके बावजूद, कोषागार कर्मियों ने बिचौलियों के खाता नंबरों का इस्तेमाल कर धनराशि का भुगतान किया और आपस में बंटवारा कर लिया। चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) पर गलत कागजात लगाकर इस पूरे खेल को अंजाम दिया गया। जांच रिपोर्ट में कोषागार कर्मियों और बिचौलियों के बीच दिन में कई बार बातचीत होने के भी प्रमाण मिले हैं।
एसआईटी प्रभारी अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि सीटीएस साॅफ्टवेयर पर कर्मियों ने बिचौलियों का डाटा फीड किया है। उसी के माध्यम से भुगतान किया गया है। इसकी कोई पत्रावली नहीं मिली है। साॅफ्टवेयर में डाटा ही फीड मिला है।
इनके खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट :
कोषागार घोटाले में जेल में बंद पेंशनर संतोष कुमार मिश्रा, मोहन लाल, जगत नारायण त्रिपाठी, दुर्गा प्रसाद, राम शिरोमणि, जवाहर लाल, रामरतन, चंद्रिका प्रसाद, शिव बहादुर, नत्थू राम यादव, बलवंत यादव, दीनानाथ यादव, नवल किशोर, महिपाल यादव, नाथू राम, दयाराम त्रिपाठी, पारिवारिक पेंशनर धनपति देवी, लक्ष्मी देवी, कमला देवी, रुकमणी देवी, जोगवा उर्फ जुगुवा देवी, सुनीता देवी, लीला देवी, सुशीला देवी, मोहन लाल, कोषागार कर्मी विकास सिंह सचान, अशोक कुमार, बिचौलिया गोरेंद्र शिवहरे, अमृतलाल उर्फ पंचू, ओम प्रकाश, मिथलेश उर्फ भोला, दीपक कुमार पांडेय, रणविजय यादव, अजय सिंह व बृजेश कुमार के खिलाफ एसआईटी ने चार्जशीट दाखिल की है।
चेक ट्रंकेशन सिस्टम
यह एक इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सिस्टम है, जिससे बैंक चेक ट्रांजेक्शन को डिजिटल तरीके से प्रोसेस कर सकते हैं।
- इसमें चेक को स्कैन कर इलेक्ट्रॉनिक इमेज में बदल दिया जाता है।
- इमेज को प्रोसेसिंग के लिए पेइंग बैंक को भेजा जाता है।
- इसके जरिए चेक क्लियरिंग तेज और सुरक्षित होती है।