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कोषागार घोटाला: बिचौलियों और पेंशनरों की तलाश तेज, सर्विलांस की मदद ले रही एसआईटी
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sun, 01 Feb 2026 11:39 PM IST
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चित्रकूट। कोषागार में हुए 43.13 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में विशेष जांच दल अब बिचौलियों और पेंशनरों की तलाश के लिए सर्विलांस की मदद ले रहा है। कई दिनों से लगातार छापेमारी के बावजूद मुख्य आरोपी हाथ नहीं आ रहे हैं। शनिवार रात और रविवार को एसआईटी ने करीब 10 ठिकानों पर दबिश दी लेकिन सफलता नहीं मिली।
कोषागार घोटाले में अब तक कुल 24 बिचौलियों की पहचान की जा चुकी है। इनमें से नौ को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। शेष की तलाश में एसआईटी की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। हाल ही में हनुवा निवासी देव कुमार त्रिपाठी उर्फ बोग्गन त्रिपाठी की गिरफ्तारी के बाद से फरार चल रहे अन्य बिचौलियों की तलाश तेज कर दी गई है। मोबाइल फोन बंद कर सभी आरोपी भूमिगत हो गए हैं, जिससे उनकी सटीक लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो रहा है।
एसआईटी ने बिचौलियों की तलाश के लिए एक नई रणनीति अपनाई है। अब बिचौलियों के साथ-साथ उनके सगे-संबंधियों के मोबाइल नंबरों को भी सर्विलांस पर लगाया गया है। एसपी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि जिन भी लोगों से बिचौलियों की बातचीत हुई है, उनके नंबरों को ट्रेस किया जा रहा है। इससे बिचौलियों की लोकेशन का पता लगाने और उन्हें पकड़ने में मदद मिलेगी। एसआईटी की टीमें हर संभव प्रयास कर रही हैं ताकि घोटाले में शामिल सभी लोग कानून के शिकंजे में आ सकें।
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कोषागार घोटाले में अब तक कुल 24 बिचौलियों की पहचान की जा चुकी है। इनमें से नौ को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। शेष की तलाश में एसआईटी की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। हाल ही में हनुवा निवासी देव कुमार त्रिपाठी उर्फ बोग्गन त्रिपाठी की गिरफ्तारी के बाद से फरार चल रहे अन्य बिचौलियों की तलाश तेज कर दी गई है। मोबाइल फोन बंद कर सभी आरोपी भूमिगत हो गए हैं, जिससे उनकी सटीक लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो रहा है।
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एसआईटी ने बिचौलियों की तलाश के लिए एक नई रणनीति अपनाई है। अब बिचौलियों के साथ-साथ उनके सगे-संबंधियों के मोबाइल नंबरों को भी सर्विलांस पर लगाया गया है। एसपी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि जिन भी लोगों से बिचौलियों की बातचीत हुई है, उनके नंबरों को ट्रेस किया जा रहा है। इससे बिचौलियों की लोकेशन का पता लगाने और उन्हें पकड़ने में मदद मिलेगी। एसआईटी की टीमें हर संभव प्रयास कर रही हैं ताकि घोटाले में शामिल सभी लोग कानून के शिकंजे में आ सकें।
