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Chitrakoot News: चंदेलकालीन के दो मंदिरों की विरासत संभालने का काम शुरू
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चित्रकूट। उपेक्षा का शिकार हो रही बुंदेलखंड की गौरवशाली विरासत को अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) बचाएगा। धर्मनगरी में भरतकूप के पास गोडा गांव में 10वीं सदी के दो चंदेलकालीन मंदिरों के संरक्षण के लिए राजस्थान से आई स्पेशल टीम ने काम भी शुरू कर दिया है। अब मंदिरों के दरक चुके पत्थरों को शिखर से फाउंडेशन तक खोला जाएगा। मंदिर के क्षतिग्रस्त प्लेटफॉर्म व सीढ़ियों का भी संरक्षण किया जाएगा व चार दीवारी को रिपेयर कर उस पर ग्रिल लगाकर स्मारक को सुरक्षित भी किया जाएगा। वैज्ञानिक तरीके से हैवी स्टोन को रीसेट कर 1000 साल पुरानी इस धरोहर को नया जीवन दिया जाएगा।
चंदेल राजाओं ने 10वीं शताब्दी के आसपास गोडा गांव में इन मंदिरों का निर्माण कराया था। ये राजा खजुराहो जैसे भव्य मंदिर बनाने के लिए प्रसिद्ध थे। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के पास होने के बावजूद यह स्थल मुख्य पर्यटन धारा से कटा रहा। आसपास के पहाड़ों में भारी पत्थर खनन से इन धरोहरों को काफी नुकसान पहुंचा है। पिछले 50 सालों में मौसम, नमी और देखरेख में मंदिरों की दीवारें दरक गईं। शिखर के पत्थर हिल गए। नींव में दरारें आ गईं। स्थानीय लोग व इतिहासकार इन मंदिरों के जीर्णोद्धार की मांग कर रहे थे।
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चंदेल राजाओं ने 10वीं शताब्दी के आसपास गोडा गांव में इन मंदिरों का निर्माण कराया था। ये राजा खजुराहो जैसे भव्य मंदिर बनाने के लिए प्रसिद्ध थे। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के पास होने के बावजूद यह स्थल मुख्य पर्यटन धारा से कटा रहा। आसपास के पहाड़ों में भारी पत्थर खनन से इन धरोहरों को काफी नुकसान पहुंचा है। पिछले 50 सालों में मौसम, नमी और देखरेख में मंदिरों की दीवारें दरक गईं। शिखर के पत्थर हिल गए। नींव में दरारें आ गईं। स्थानीय लोग व इतिहासकार इन मंदिरों के जीर्णोद्धार की मांग कर रहे थे।
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