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Deoria News: कृष्ण जन्म पर गूंजे जयकारे वासुदेव लेकर पहुंचे गोकुल
Sat, 31 Oct 2026 12:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 31 Oct 2026 12:13 AM IST
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देसही देवरिया। जंगल बेलवा गांव स्थित शिव-दुर्गा मंदिर परिसर में चल रहे नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ में बृहस्पतिवार की रात श्रीधाम वृंदावन से आई रासलीला मंडली ने देवकी विवाह, वासुदेव-देवकी को कारागार में बंद करने और श्रीकृष्ण जन्म का भावपूर्ण मंचन किया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का दृश्य देखकर श्रद्धालु खुशी से झूम उठे। पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा।
मंचन में दिखाया गया कि मथुरा के राजा उग्रसेन की पुत्री देवकी का विवाह वासुदेव से हुआ। विवाह के बाद कंस अपनी बहन देवकी को विदा कर पहुंचाने जा रहा था।
इसी दौरान आकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र कंस का वध करेगा। यह सुनकर कंस क्रोधित हो उठा और देवकी की हत्या करने पर आमादा हो गया। वासुदेव ने उसे समझाया और आठवें पुत्र को सौंपने का वचन दिया।
महर्षि नारद के हस्तक्षेप के बाद कंस ने देवकी के साथ ही उनकी संतानों की हत्या करने का निर्णय लिया। उसने वासुदेव और देवकी को कारागार में बंद कर दिया। इसके बाद अपने पिता उग्रसेन को भी बंदी बनाकर स्वयं मथुरा का राजा घोषित कर दिया।
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अंत में कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। वासुदेव उन्हें टोकरी में रखकर यमुना नदी पार करते हुए गोकुल पहुंचे। वहां उन्होंने श्रीकृष्ण को माता यशोदा के पास सुला दिया और उनकी नवजात पुत्री को लेकर वापस कारागार लौट आए। इस दृश्य के मंचन के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए।
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मंचन में दिखाया गया कि मथुरा के राजा उग्रसेन की पुत्री देवकी का विवाह वासुदेव से हुआ। विवाह के बाद कंस अपनी बहन देवकी को विदा कर पहुंचाने जा रहा था।
इसी दौरान आकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र कंस का वध करेगा। यह सुनकर कंस क्रोधित हो उठा और देवकी की हत्या करने पर आमादा हो गया। वासुदेव ने उसे समझाया और आठवें पुत्र को सौंपने का वचन दिया।
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महर्षि नारद के हस्तक्षेप के बाद कंस ने देवकी के साथ ही उनकी संतानों की हत्या करने का निर्णय लिया। उसने वासुदेव और देवकी को कारागार में बंद कर दिया। इसके बाद अपने पिता उग्रसेन को भी बंदी बनाकर स्वयं मथुरा का राजा घोषित कर दिया।
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अंत में कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। वासुदेव उन्हें टोकरी में रखकर यमुना नदी पार करते हुए गोकुल पहुंचे। वहां उन्होंने श्रीकृष्ण को माता यशोदा के पास सुला दिया और उनकी नवजात पुत्री को लेकर वापस कारागार लौट आए। इस दृश्य के मंचन के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए।