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Deoria News: स्पाइस मैके जैसे कार्यक्रम सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 09 Apr 2026 12:07 AM IST
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय परिसर के केंद्रीय ग्रंथालय स्थित ऑडिटोरियम में बुधवार छात्रों और शिक्षकों के लिए आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम स्पाइस मैके आयोजित किया गया। इसमें कई कार्यक्रम हुए, जिसमें लोगों ने प्रतिभाग किया। मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह ने स्पाइस मैके जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
उन्होंने कहा कि आज के तकनीकी युग में इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को न केवल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध करते हैं, बल्कि उनके व्यक्तित्व के समग्र विकास में भी सहायक होते हैं। देश के प्रसिद्ध सरोद वादक आमिर हुसैन ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से हुई, जिसके बाद सरोद वादन की सुरमयी धारा ने पूरे सभागार को संगीत के आध्यात्मिक रस से सराबोर कर दिया। तबले पर दुर्जय भौमिक की सधी हुई जुगलबंदी ने प्रस्तुति में विशेष आकर्षण जोड़ दिया। दोनों ही कलाकारों ने राग चारुकेशी, शुद्ध सारंग, भीम पलाशी एवं पहाड़ी की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को जीवंत कर सभी को मोहित कर दिया।
स्पाइस मैके के राष्ट्रीय समन्वयक पंकज मल्होत्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने इस प्रकार के आयोजनों की महत्ता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने विद्यार्थियों के साथ संवाद भी स्थापित किया और शास्त्रीय संगीत की विशेषताओं, रागों की संरचना एवं साधना के महत्व के बारे में जानकारी दी। इससे विद्यार्थियों में संगीत के प्रति जिज्ञासा एवं रुचि और अधिक बढ़ी। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. सत्येंद्र दुबे और आभार ज्ञापन अध्यक्ष छात्र कल्याण प्रो. नीता यादव ने किया।
इस कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार, अध्यक्ष वाणिज्य संकाय प्रो. सौरभ, अध्यक्ष विज्ञान संकाय प्रो. प्रकृति राय, प्रो. हरीश कुमार शर्मा, प्रो. सुनील श्रीवास्तव, प्रो. सुनीता त्रिपाठी, डॉ. रेनू त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि आज के तकनीकी युग में इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को न केवल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध करते हैं, बल्कि उनके व्यक्तित्व के समग्र विकास में भी सहायक होते हैं। देश के प्रसिद्ध सरोद वादक आमिर हुसैन ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से हुई, जिसके बाद सरोद वादन की सुरमयी धारा ने पूरे सभागार को संगीत के आध्यात्मिक रस से सराबोर कर दिया। तबले पर दुर्जय भौमिक की सधी हुई जुगलबंदी ने प्रस्तुति में विशेष आकर्षण जोड़ दिया। दोनों ही कलाकारों ने राग चारुकेशी, शुद्ध सारंग, भीम पलाशी एवं पहाड़ी की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को जीवंत कर सभी को मोहित कर दिया।
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स्पाइस मैके के राष्ट्रीय समन्वयक पंकज मल्होत्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने इस प्रकार के आयोजनों की महत्ता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने विद्यार्थियों के साथ संवाद भी स्थापित किया और शास्त्रीय संगीत की विशेषताओं, रागों की संरचना एवं साधना के महत्व के बारे में जानकारी दी। इससे विद्यार्थियों में संगीत के प्रति जिज्ञासा एवं रुचि और अधिक बढ़ी। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. सत्येंद्र दुबे और आभार ज्ञापन अध्यक्ष छात्र कल्याण प्रो. नीता यादव ने किया।
इस कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार, अध्यक्ष वाणिज्य संकाय प्रो. सौरभ, अध्यक्ष विज्ञान संकाय प्रो. प्रकृति राय, प्रो. हरीश कुमार शर्मा, प्रो. सुनील श्रीवास्तव, प्रो. सुनीता त्रिपाठी, डॉ. रेनू त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।