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Deoria News: मुआवजे के विवाद में ईशारू और कुंडौली में रुका फोरलेन का काम
Mon, 10 Aug 2026 12:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 10 Aug 2026 12:12 AM IST
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भागलपुर। नवलपुर से भागलपुर तक बन रहे एनएच-727 फोरलेन का निर्माण ईशारू और कुंडौली गांव के बीच मुआवजे के विवाद के कारण प्रभावित हो गया है। सड़क निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण हुए करीब दो वर्ष बीत चुके हैं मगर कई किसानों को अब तक मुआवजे की धनराशि नहीं मिल सकी है। नाम और हिस्सेदारी को लेकर उत्पन्न विवाद के कारण अंश निर्धारण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। इससे नाराज किसानों ने निर्माण कार्य रुकवा दिया है।
सलेमपुर तहसील क्षेत्र के कुंडौली गांव के 15 से अधिक किसानों के साथ ही ईशारू गांव के राम कुमार पांडेय, हरिनारायण पांडेय, सूर्यनारायण पांडेय, रमेश चंद्र पांडेय, विनोद पांडेय, महातम पांडेय, रामचंद्र पांडेय, कमल दुबे, संतोष पांडेय, सुरेश पांडेय, सुधाकर पांडेय समेत कई किसानों की जमीन एनएच के लिए अधिग्रहित की गई है।
किसानों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया तो पूरी हुई मगर कुछ खातों में नाम और हिस्सेदारी को लेकर विवाद सामने आ गया। पिछले दो वर्षों से वे समस्या के समाधान के लिए लेखपाल, कानूनगो और तहसील के चक्कर लगा रहे हैं।
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हर बार उन्हें जल्द समाधान का भरोसा और नई तारीख मिलती रही, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
मुआवजा नहीं मिलने से किसानों में नाराजगी है। किसानों का कहना है कि जब तक सभी प्रभावित लोगों को उनकी जमीन का पूरा और पारदर्शी मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा।
इसकी शिकायत किसानों ने करीब एक माह पहले डीएम मधुसूदन हुल्गी से मुलाकात कर की थी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने तहसील प्रशासन को जांच कर निस्तारण का निर्देश दिया था। उसके बाद तत्कालीन तहसीलदार अलका सिंह ने ईशारू और कुंडौली के सभी प्रभावित किसानों को तहसील में बुलाकर उनकी समस्याएं सुनी थीं।
इसी बीच उनका तबादला सदर तहसील में हो गया। जिसके बाद मामला जस के तस बना हुआ है।
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सलेमपुर तहसील क्षेत्र के कुंडौली गांव के 15 से अधिक किसानों के साथ ही ईशारू गांव के राम कुमार पांडेय, हरिनारायण पांडेय, सूर्यनारायण पांडेय, रमेश चंद्र पांडेय, विनोद पांडेय, महातम पांडेय, रामचंद्र पांडेय, कमल दुबे, संतोष पांडेय, सुरेश पांडेय, सुधाकर पांडेय समेत कई किसानों की जमीन एनएच के लिए अधिग्रहित की गई है।
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किसानों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया तो पूरी हुई मगर कुछ खातों में नाम और हिस्सेदारी को लेकर विवाद सामने आ गया। पिछले दो वर्षों से वे समस्या के समाधान के लिए लेखपाल, कानूनगो और तहसील के चक्कर लगा रहे हैं।
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हर बार उन्हें जल्द समाधान का भरोसा और नई तारीख मिलती रही, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
मुआवजा नहीं मिलने से किसानों में नाराजगी है। किसानों का कहना है कि जब तक सभी प्रभावित लोगों को उनकी जमीन का पूरा और पारदर्शी मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा।
इसकी शिकायत किसानों ने करीब एक माह पहले डीएम मधुसूदन हुल्गी से मुलाकात कर की थी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने तहसील प्रशासन को जांच कर निस्तारण का निर्देश दिया था। उसके बाद तत्कालीन तहसीलदार अलका सिंह ने ईशारू और कुंडौली के सभी प्रभावित किसानों को तहसील में बुलाकर उनकी समस्याएं सुनी थीं।
इसी बीच उनका तबादला सदर तहसील में हो गया। जिसके बाद मामला जस के तस बना हुआ है।