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लुंबिनी-दुद्धी हाईवे : मुख्य चौराहे पर ठेलों और ट्रकों के बीच सिमटी सड़क
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 25 Feb 2026 12:45 AM IST
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सिद्धार्थनगर। दोपहर के 12 बजकर 18 मिनट। लुम्बिनी-दुद्धि हाईवे पर स्थित मुख्य चौराहे पर एक साथ दो ट्रक आकर धीमे हो जाते हैं। सड़क पहले से ही किनारे लगे ठेलों और खड़े वाहनों से सिमटी हुई है। ट्रक के पीछे बाइक और ऑटो की कतार लग जाती है।
एक युवक हाथ में कागज लिए ट्रक के बिल्कुल करीब से निकलता है, जबकि दूसरी ओर से आ रही बाइक अचानक ब्रेक लगाकर रुकती है। कुछ सेकंड के लिए पूरा ट्रैफिक थम जाता है। फिर धीरे-धीरे वाहन रेंगने लगते हैं। यह नजारा यहां हर घंटे, हर दिन दोहराया जा रहा है।
शहर का यह मुख्य चौराहा, जो हाईवे का अहम हिस्सा है, अब अतिक्रमण और अव्यवस्था की चपेट में है। सड़क के किनारे स्थायी रूप से फल, चाय और खाने-पीने के ठेले लगे हैं। इनके सामने ग्राहक खड़े होते हैं, जिससे सड़क और संकरी हो जाती है। इसी बीच भारी वाहन गुजरते हैं, जिससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है।
मौके पर मौजूद एक बाइक सवार ने बताया, यहां से निकलना रोज का संघर्ष है। ट्रक अचानक सामने आ जाता है और बचने के लिए जगह नहीं होती। कई बार दुर्घटना होते-होते बची है। वहीं, पैदल जा रहे एक बुजुर्ग ने कहा, फुटपाथ है ही नहीं। मजबूरी में सड़क पर चलना पड़ता है। सबसे ज्यादा खतरा पैदल चलने वालों को है।
चौराहे के किनारे दुकान लगाए एक विक्रेता ने बताया कि सुबह नौ बजे से ही यहां ट्रैफिक बढ़ने लगता है। दोपहर और शाम में हालात और खराब हो जाते हैं। ट्रक रुकते हैं तो लंबा जाम लग जाता है। सबसे अहम बात यह रही कि मौके से कुछ दूरी पर ही ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए पुलिस का अमला मौजूद है, लेकिन उन्हें इसकी कोई परवाह नहीं दिखती। स्थानीय लोगों के अनुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पहले भी हुई, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति फिर पहले जैसी हो गई। इससे सवाल उठता है कि कार्रवाई स्थायी क्यों नहीं हो पा रही है और जिम्मेदार विभाग इस समस्या को लेकर गंभीर क्यों नहीं हैं।
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एक युवक हाथ में कागज लिए ट्रक के बिल्कुल करीब से निकलता है, जबकि दूसरी ओर से आ रही बाइक अचानक ब्रेक लगाकर रुकती है। कुछ सेकंड के लिए पूरा ट्रैफिक थम जाता है। फिर धीरे-धीरे वाहन रेंगने लगते हैं। यह नजारा यहां हर घंटे, हर दिन दोहराया जा रहा है।
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शहर का यह मुख्य चौराहा, जो हाईवे का अहम हिस्सा है, अब अतिक्रमण और अव्यवस्था की चपेट में है। सड़क के किनारे स्थायी रूप से फल, चाय और खाने-पीने के ठेले लगे हैं। इनके सामने ग्राहक खड़े होते हैं, जिससे सड़क और संकरी हो जाती है। इसी बीच भारी वाहन गुजरते हैं, जिससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है।
मौके पर मौजूद एक बाइक सवार ने बताया, यहां से निकलना रोज का संघर्ष है। ट्रक अचानक सामने आ जाता है और बचने के लिए जगह नहीं होती। कई बार दुर्घटना होते-होते बची है। वहीं, पैदल जा रहे एक बुजुर्ग ने कहा, फुटपाथ है ही नहीं। मजबूरी में सड़क पर चलना पड़ता है। सबसे ज्यादा खतरा पैदल चलने वालों को है।
चौराहे के किनारे दुकान लगाए एक विक्रेता ने बताया कि सुबह नौ बजे से ही यहां ट्रैफिक बढ़ने लगता है। दोपहर और शाम में हालात और खराब हो जाते हैं। ट्रक रुकते हैं तो लंबा जाम लग जाता है। सबसे अहम बात यह रही कि मौके से कुछ दूरी पर ही ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए पुलिस का अमला मौजूद है, लेकिन उन्हें इसकी कोई परवाह नहीं दिखती। स्थानीय लोगों के अनुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पहले भी हुई, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति फिर पहले जैसी हो गई। इससे सवाल उठता है कि कार्रवाई स्थायी क्यों नहीं हो पा रही है और जिम्मेदार विभाग इस समस्या को लेकर गंभीर क्यों नहीं हैं।
