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ये कैसी सजा?: हवालात में आरोपी की मौत, 19 दिन बाद निलंबित इंस्पेक्टर की थाने में वापसी; अब यहां मिली तैनाती
Thu, 22 Oct 2026 05:58 PM IST
अनुराग रंजन
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Published by: अनुराग रंजन
Updated Thu, 22 Oct 2026 05:58 PM IST
सार
राहुल सिंह को दोबारा थाने में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने को लेकर बृहस्पतिवार को पुलिस विभाग में चर्चा होती रही। कुछ पुलिसकर्मियों का कहना था कि बृजपाल की मौत में राहुल सिंह जिम्मेदार नहीं थे। यह एक हादसा था और ऐसी घटना किसी के साथ भी हो सकती है।
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up police
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
खुखुंदू थाने की हवालात में गांजा बरामदगी के आरोपी की मौत के बाद निलंबित हुए तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक राहुल सिंह को महज 19 दिन बाद दोबारा थाने में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल गई है। उन्हें सलेमपुर कोतवाली का अपराध निरीक्षक बनाया गया है।
यह तैनाती ऐसे समय हुई है, जब हवालात में मौत के मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने डीएम से जांच रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट देने की समयसीमा चार दिसंबर निर्धारित है। इस बीच राहुल सिंह को दोबारा जिम्मेदारी सौंपे जाने को लेकर पुलिस विभाग में चर्चा शुरू हो गई है। अमरोहा जिले के अमरोहा देहात थाना क्षेत्र के फरीदपुर निवासी 38 वर्षीय बृजपाल उर्फ विक्की डीसीएम चालक थे। दो अक्तूबर को खुखुंदू-नूनखार मार्ग पर पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने उन्हें गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, डीसीएम में चावल की भूसी के बीच करीब 1.40 क्विंटल गांजा बरामद हुआ था। इसके बाद बृजपाल को खुखुंदू थाने की हवालात में रखा गया था।
तीन अक्तूबर की सुबह बृजपाल हवालात में फंदे से लटके मिले। पुलिस उन्हें मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने आत्महत्या का दावा किया था, जबकि परिजनों ने शुरुआत में पिटाई से मौत होने का आरोप लगाया था। हालांकि, बाद में परिजन शांत हो गए।
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घटना के बाद एसपी अभिजित आर शंकर ने तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक राहुल सिंह, मुहर्रिर गुल्लुर प्रसाद और रिक्रूट आरक्षी अंगद यादव को निलंबित कर दिया था। तीनों के खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए थे। इस मामले में दिल्ली निवासी कृष्णा राजपूत और राजहंस बंसल ने राज्य मानवाधिकार आयोग से शिकायत की थी। शिकायत में स्वतंत्र जांच कराने के साथ ही सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग की गई थी। आयोग ने मामले का संज्ञान लेकर डीएम को नोटिस जारी किया है। चार दिसंबर तक विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई है। मामले में अगली सुनवाई सात दिसंबर को निर्धारित है।
महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने की जल्दबाजी पर उठे सवाल
राहुल सिंह को दोबारा थाने में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने को लेकर बृहस्पतिवार को पुलिस विभाग में चर्चा होती रही। कुछ पुलिसकर्मियों का कहना था कि बृजपाल की मौत में राहुल सिंह जिम्मेदार नहीं थे। यह एक हादसा था और ऐसी घटना किसी के साथ भी हो सकती है। वहीं, कुछ पुलिसकर्मियों ने इतनी जल्दी अपराध निरीक्षक बनाए जाने को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि गंभीर घटना में निलंबन के एक महीने के भीतर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने से जनता में अच्छा संदेश नहीं जाएगा।
सवाल यह भी उठे कि राहुल सिंह का निलंबन किस तारीख को और किस आदेश से समाप्त हुआ। क्या विभागीय जांच पूरी हो चुकी है या अभी चल रही है। हवालात में मौत की मजिस्ट्रेटी और न्यायिक जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है या नहीं। यदि रिपोर्ट मिली है तो क्या उसमें राहुल सिंह को दोषमुक्त पाया गया है।
पुलिस विभाग ने कहा, राहुल सिंह का कोई दोष नहीं था
राहुल सिंह की दोबारा तैनाती को लेकर पुलिस विभाग का अलग पक्ष है। एसपी के पीआरओ आशीष सिंह ने बताया कि बृजपाल की मौत के मामले में राहुल सिंह का कोई दोष नहीं था। फिलहाल उन्हें सलेमपुर कोतवाली में अपराध निरीक्षक बनाया गया है।
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यह तैनाती ऐसे समय हुई है, जब हवालात में मौत के मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने डीएम से जांच रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट देने की समयसीमा चार दिसंबर निर्धारित है। इस बीच राहुल सिंह को दोबारा जिम्मेदारी सौंपे जाने को लेकर पुलिस विभाग में चर्चा शुरू हो गई है। अमरोहा जिले के अमरोहा देहात थाना क्षेत्र के फरीदपुर निवासी 38 वर्षीय बृजपाल उर्फ विक्की डीसीएम चालक थे। दो अक्तूबर को खुखुंदू-नूनखार मार्ग पर पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने उन्हें गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, डीसीएम में चावल की भूसी के बीच करीब 1.40 क्विंटल गांजा बरामद हुआ था। इसके बाद बृजपाल को खुखुंदू थाने की हवालात में रखा गया था।
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तीन अक्तूबर की सुबह बृजपाल हवालात में फंदे से लटके मिले। पुलिस उन्हें मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने आत्महत्या का दावा किया था, जबकि परिजनों ने शुरुआत में पिटाई से मौत होने का आरोप लगाया था। हालांकि, बाद में परिजन शांत हो गए।
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घटना के बाद एसपी अभिजित आर शंकर ने तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक राहुल सिंह, मुहर्रिर गुल्लुर प्रसाद और रिक्रूट आरक्षी अंगद यादव को निलंबित कर दिया था। तीनों के खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए थे। इस मामले में दिल्ली निवासी कृष्णा राजपूत और राजहंस बंसल ने राज्य मानवाधिकार आयोग से शिकायत की थी। शिकायत में स्वतंत्र जांच कराने के साथ ही सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग की गई थी। आयोग ने मामले का संज्ञान लेकर डीएम को नोटिस जारी किया है। चार दिसंबर तक विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई है। मामले में अगली सुनवाई सात दिसंबर को निर्धारित है।
महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने की जल्दबाजी पर उठे सवाल
राहुल सिंह को दोबारा थाने में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने को लेकर बृहस्पतिवार को पुलिस विभाग में चर्चा होती रही। कुछ पुलिसकर्मियों का कहना था कि बृजपाल की मौत में राहुल सिंह जिम्मेदार नहीं थे। यह एक हादसा था और ऐसी घटना किसी के साथ भी हो सकती है। वहीं, कुछ पुलिसकर्मियों ने इतनी जल्दी अपराध निरीक्षक बनाए जाने को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि गंभीर घटना में निलंबन के एक महीने के भीतर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने से जनता में अच्छा संदेश नहीं जाएगा।
सवाल यह भी उठे कि राहुल सिंह का निलंबन किस तारीख को और किस आदेश से समाप्त हुआ। क्या विभागीय जांच पूरी हो चुकी है या अभी चल रही है। हवालात में मौत की मजिस्ट्रेटी और न्यायिक जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है या नहीं। यदि रिपोर्ट मिली है तो क्या उसमें राहुल सिंह को दोषमुक्त पाया गया है।
पुलिस विभाग ने कहा, राहुल सिंह का कोई दोष नहीं था
राहुल सिंह की दोबारा तैनाती को लेकर पुलिस विभाग का अलग पक्ष है। एसपी के पीआरओ आशीष सिंह ने बताया कि बृजपाल की मौत के मामले में राहुल सिंह का कोई दोष नहीं था। फिलहाल उन्हें सलेमपुर कोतवाली में अपराध निरीक्षक बनाया गया है।