{"_id":"6963f15774020402d005ac24","slug":"bird-flu-threat-at-bhareh-sangam-20-bird-dropping-samples-taken-etawah-news-c-216-1-etw1002-136163-2026-01-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Etawah News: भरेह संगम पर बर्ड फ्लू का खतरा, पक्षियों के बीट के 20 सैंपल लिए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Etawah News: भरेह संगम पर बर्ड फ्लू का खतरा, पक्षियों के बीट के 20 सैंपल लिए
विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो 18:::भरेह संगम क्षेत्र में सैपल लेते पशुपालन विभाग की टीम। संवाद
- पशुपालन विभाग की टीम ने चंबलघाटी स्थित भरेह संगम क्षेत्र का दौरा किया
संवाद न्यूज एजेंसी
चकरनगर। चंबल सेंचुअरी क्षेत्र में बर्ड फ्लू के संभावित खतरे को देखते हुए पशुपालन विभाग की टीम ने प्रवासी पक्षियों की निगरानी और नमूना संग्रह करने का अभियान तेज कर दिया है।
रविवार को विभाग की एक टीम ने चंबलघाटी स्थित भरेह संगम क्षेत्र का दौरा किया और वहां मौजूद प्रवासी जंगली पक्षियों के बीट (फेकल) के 20 ताजे नमूने एकत्र किए। इन महत्वपूर्ण नमूनों को आगे की जांच के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर, बरेली भेजा जाएगा।
प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि साइबेरिया और मंगोलिया जैसे सुदूर क्षेत्रों से आने वाले प्रवासी पक्षी अपने साथ किसी भी प्रकार के खतरनाक वायरस, विशेषकर बर्ड फ्लू, को लेकर न आएं।
क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रताप सिंह वर्मा ने बताया कि भरेह संगम, पचनद और सहसों डॉल्फिन वन विश्राम गृह जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में वनकर्मी लगातार गश्त कर रहे हैं। प्रवासी और अप्रवासी दोनों तरह के पक्षियों की सतत निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी संभावित बीमारी से उन्हें बचाया जा सके।
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने इस संबंध में बताया कि प्रवासी पक्षी अपने ठंडे मूल निवास स्थान को छोड़कर गर्म इलाकों में आते हैं, और इन नमूनों की जांच से यह पता लगाया जा सकेगा कि क्या उनमें कोई खतरनाक वायरस मौजूद है। उन्होंने यह भी बताया कि विदेश से आने वाले पक्षियों में किसी भी प्रकार की बीमारी या बर्ड फ्लू के संक्रमण की रोकथाम के लिए जिले में विशेष रैपिड रिस्पांस टीमें गठित की गई हैं।
ये टीमें वेटलैंड्स, पक्षी विहारों, चंबल सेंचुरी, भरेह संगम और पचनद सहित अन्य संभावित स्थलों पर नियमित रूप से निरीक्षण कर रही हैं, ताकि समय रहते किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। यह बहुस्तरीय निगरानी प्रणाली क्षेत्र में पक्षी आबादी के स्वास्थ्य की रक्षा और मानव स्वास्थ्य के लिए किसी भी संभावित जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
Trending Videos
- पशुपालन विभाग की टीम ने चंबलघाटी स्थित भरेह संगम क्षेत्र का दौरा किया
संवाद न्यूज एजेंसी
चकरनगर। चंबल सेंचुअरी क्षेत्र में बर्ड फ्लू के संभावित खतरे को देखते हुए पशुपालन विभाग की टीम ने प्रवासी पक्षियों की निगरानी और नमूना संग्रह करने का अभियान तेज कर दिया है।
रविवार को विभाग की एक टीम ने चंबलघाटी स्थित भरेह संगम क्षेत्र का दौरा किया और वहां मौजूद प्रवासी जंगली पक्षियों के बीट (फेकल) के 20 ताजे नमूने एकत्र किए। इन महत्वपूर्ण नमूनों को आगे की जांच के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर, बरेली भेजा जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि साइबेरिया और मंगोलिया जैसे सुदूर क्षेत्रों से आने वाले प्रवासी पक्षी अपने साथ किसी भी प्रकार के खतरनाक वायरस, विशेषकर बर्ड फ्लू, को लेकर न आएं।
क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रताप सिंह वर्मा ने बताया कि भरेह संगम, पचनद और सहसों डॉल्फिन वन विश्राम गृह जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में वनकर्मी लगातार गश्त कर रहे हैं। प्रवासी और अप्रवासी दोनों तरह के पक्षियों की सतत निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी संभावित बीमारी से उन्हें बचाया जा सके।
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने इस संबंध में बताया कि प्रवासी पक्षी अपने ठंडे मूल निवास स्थान को छोड़कर गर्म इलाकों में आते हैं, और इन नमूनों की जांच से यह पता लगाया जा सकेगा कि क्या उनमें कोई खतरनाक वायरस मौजूद है। उन्होंने यह भी बताया कि विदेश से आने वाले पक्षियों में किसी भी प्रकार की बीमारी या बर्ड फ्लू के संक्रमण की रोकथाम के लिए जिले में विशेष रैपिड रिस्पांस टीमें गठित की गई हैं।
ये टीमें वेटलैंड्स, पक्षी विहारों, चंबल सेंचुरी, भरेह संगम और पचनद सहित अन्य संभावित स्थलों पर नियमित रूप से निरीक्षण कर रही हैं, ताकि समय रहते किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। यह बहुस्तरीय निगरानी प्रणाली क्षेत्र में पक्षी आबादी के स्वास्थ्य की रक्षा और मानव स्वास्थ्य के लिए किसी भी संभावित जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।