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Etawah News: डिजिटल स्क्रीन का ज्यादा उपयोग आंखों के मरीजों की संख्या बढ़ा रहा
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फोटो 3: लैपटॉप पर पढ़ाई करते बच्चे। संवाद
अत्यधिक डिजिटल स्क्रीन के प्रयोग से आंखों के मरीज बढ़े
-जिला अस्पताल में हर रोज 100 मरीजों में 30 मरीज आंखों की समस्या को लेकर आ रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। मोबाइल फोन, कंप्यूटर और टैबलेट जैसे डिजिटल उपकरणों के बढ़ते उपयोग का सीधा असर अब लोगों की आंखों के स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले 100 से 120 मरीजों में से लगभग 25 से 30 मरीज आंखों में जलन, सूखापन, दर्द, लालिमा और धुंधलापन जैसी समस्याओं की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रेशांस के अनुसार, इन समस्याओं का प्रमुख कारण डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक और लंबे समय तक उपयोग है। लगातार मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन देखने से आंखों की प्राकृतिक नमी कम हो जाती है, जिससे ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या बढ़ रही है।
इसके अतिरिक्त, स्क्रीन पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप सिरदर्द, आंखों में भारीपन और दृष्टि धुंधली होने जैसी दिक्कतें उत्पन्न हो सकती हैं। बच्चों और युवाओं में यह समस्या विशेष रूप से तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि उनका अधिकांश समय ऑनलाइन पढ़ाई, गेमिंग और सोशल मीडिया पर व्यतीत हो रहा है।
नेत्र रोग विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि कई मरीज देर रात तक मोबाइल देखने के कारण नींद की कमी से भी जूझ रहे हैं, जिससे आंखों की थकान और सूखापन और बढ़ जाता है। नीली रोशनी (ब्लू लाइट) आंखों के लिए विशेष रूप से हानिकारक है और यह धीरे-धीरे रेटिना को भी प्रभावित कर सकती है।
आंखों के स्वास्थ्य के लिए सावधानियां
नेत्र रोगियों को अपनी आंखों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों का पालन करना चाहिए। कंप्यूटर, मोबाइल व टेबलेट का अत्यधिक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कामकाजी लोगों को हर 30 मिनट या एक घंटे के बाद कुछ देर अपनी आंखों को आराम देना चाहिए। रात के समय मोबाइल की रोशनी कम रखनी चाहिए और छोटे बच्चों को मोबाइल से दूर रखना चाहिए। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और पर्याप्त नींद लेने की आदत डालना भी आवश्यक है। नीली रोशनी से बचाव के लिए ब्लू लाइट फिल्टर या विशेष चश्मे का उपयोग किया जा सकता है।
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अत्यधिक डिजिटल स्क्रीन के प्रयोग से आंखों के मरीज बढ़े
-जिला अस्पताल में हर रोज 100 मरीजों में 30 मरीज आंखों की समस्या को लेकर आ रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। मोबाइल फोन, कंप्यूटर और टैबलेट जैसे डिजिटल उपकरणों के बढ़ते उपयोग का सीधा असर अब लोगों की आंखों के स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले 100 से 120 मरीजों में से लगभग 25 से 30 मरीज आंखों में जलन, सूखापन, दर्द, लालिमा और धुंधलापन जैसी समस्याओं की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रेशांस के अनुसार, इन समस्याओं का प्रमुख कारण डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक और लंबे समय तक उपयोग है। लगातार मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन देखने से आंखों की प्राकृतिक नमी कम हो जाती है, जिससे ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या बढ़ रही है।
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इसके अतिरिक्त, स्क्रीन पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप सिरदर्द, आंखों में भारीपन और दृष्टि धुंधली होने जैसी दिक्कतें उत्पन्न हो सकती हैं। बच्चों और युवाओं में यह समस्या विशेष रूप से तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि उनका अधिकांश समय ऑनलाइन पढ़ाई, गेमिंग और सोशल मीडिया पर व्यतीत हो रहा है।
नेत्र रोग विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि कई मरीज देर रात तक मोबाइल देखने के कारण नींद की कमी से भी जूझ रहे हैं, जिससे आंखों की थकान और सूखापन और बढ़ जाता है। नीली रोशनी (ब्लू लाइट) आंखों के लिए विशेष रूप से हानिकारक है और यह धीरे-धीरे रेटिना को भी प्रभावित कर सकती है।
आंखों के स्वास्थ्य के लिए सावधानियां
नेत्र रोगियों को अपनी आंखों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों का पालन करना चाहिए। कंप्यूटर, मोबाइल व टेबलेट का अत्यधिक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कामकाजी लोगों को हर 30 मिनट या एक घंटे के बाद कुछ देर अपनी आंखों को आराम देना चाहिए। रात के समय मोबाइल की रोशनी कम रखनी चाहिए और छोटे बच्चों को मोबाइल से दूर रखना चाहिए। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और पर्याप्त नींद लेने की आदत डालना भी आवश्यक है। नीली रोशनी से बचाव के लिए ब्लू लाइट फिल्टर या विशेष चश्मे का उपयोग किया जा सकता है।