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Etawah News: अस्पताल में एक्सपायर्ड इंजेक्शन मिलने पर जांच तेज
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फोटो 16: जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मिले एक्सपायर इंजेक्शन की फाइल फोटो।
जांच अधिकारी नामित, एक्सपायर्ड इंजेक्शन नौ दिन से इमरजेंसी में रखे होने की मिली जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में एक्सपायर्ड इंजेक्शन मिलने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। प्रभारी मंत्री धर्मवीर प्रजापति के कड़े रुख के बाद अब जांच टीम इस बात का पता लगाने के लिए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है कि ये एक्सपायर्ड इंजेक्शन इमरजेंसी तक कैसे पहुंचे।
यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह एक बड़ी लापरवाही का नतीजा है या किसी ने जानबूझकर इन इंजेक्शनों को वहां रखा था। जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नौ जनवरी को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड इंजेक्शन पाए गए थे। इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए प्रभारी मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) को तुरंत जांच समिति गठित कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दिए थे।
सीएमएस डॉ. पारितोष शुक्ला ने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शादाब आलम को इस मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया है। डॉ. आलम ने शनिवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी का दौरा कर ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर राघवेंद्र और फार्मासिस्ट शरद तिवारी से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान, दोनों ने स्वीकार किया कि एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगभग नौ दिन से इमरजेंसी में रखे हुए थे। हालांकि, वे इस बात की जानकारी नहीं दे सके कि इस दौरान ये इंजेक्शन किसी मरीज को लगाए गए थे या नहीं।
सीसीटीवी फुटेज से खुलासा होने की उम्मीद
सीएमएस ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि एक्सपायर्ड इंजेक्शन इमरजेंसी तक किस मार्ग से पहुंचे। यह भी स्पष्ट होगा कि क्या यह एक प्रशासनिक चूक थी या किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर ऐसा किया गया। उन्होंने आगे बताया कि इमरजेंसी में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों का नियमित रूप से स्थानांतरण होता रहता है। इसके अतिरिक्त, कई मेडिकल छात्र भी वहां मौजूद रहते हैं। इस पूरे मामले की पड़ताल की जा रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मिले थे एट्रोपिन व एडरोप्रो के एक्सपायर्ड इंजेक्शन
जिला अस्पताल की इमरजेंसी से एट्रोपिन और एडरोप्रो नामक दो प्रकार के सात एक्सपायर्ड इंजेक्शन बरामद हुए थे। इन इंजेक्शनों पर दिसंबर 2025 की एक्सपायरी तिथि अंकित थी। एट्रोपिन इंजेक्शन का उपयोग हार्ट रोगियों को सीपीआर देते समय उनकी हार्ट रेट बढ़ाने के लिए किया जाता है। वहीं, एडरोप्रो इंजेक्शन का प्रयोग तब किया जाता है जब मरीज का ब्लड प्रेशर कम हो जाता है, जिससे उसे तत्काल राहत मिलती है। डॉक्टरों का मानना है कि एक्सपायर्ड इंजेक्शन में मौजूद दवा का प्रभाव काफी कम हो जाता है और यह मरीजों के लिए प्रभावी नहीं रहता, बल्कि हानिकारक भी हो सकता है।
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फोटो 16: जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मिले एक्सपायर इंजेक्शन की फाइल फोटो।
जांच अधिकारी नामित, एक्सपायर्ड इंजेक्शन नौ दिन से इमरजेंसी में रखे होने की मिली जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में एक्सपायर्ड इंजेक्शन मिलने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। प्रभारी मंत्री धर्मवीर प्रजापति के कड़े रुख के बाद अब जांच टीम इस बात का पता लगाने के लिए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है कि ये एक्सपायर्ड इंजेक्शन इमरजेंसी तक कैसे पहुंचे।
यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह एक बड़ी लापरवाही का नतीजा है या किसी ने जानबूझकर इन इंजेक्शनों को वहां रखा था। जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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नौ जनवरी को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड इंजेक्शन पाए गए थे। इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए प्रभारी मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) को तुरंत जांच समिति गठित कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दिए थे।
सीएमएस डॉ. पारितोष शुक्ला ने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शादाब आलम को इस मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया है। डॉ. आलम ने शनिवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी का दौरा कर ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर राघवेंद्र और फार्मासिस्ट शरद तिवारी से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान, दोनों ने स्वीकार किया कि एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगभग नौ दिन से इमरजेंसी में रखे हुए थे। हालांकि, वे इस बात की जानकारी नहीं दे सके कि इस दौरान ये इंजेक्शन किसी मरीज को लगाए गए थे या नहीं।
सीसीटीवी फुटेज से खुलासा होने की उम्मीद
सीएमएस ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि एक्सपायर्ड इंजेक्शन इमरजेंसी तक किस मार्ग से पहुंचे। यह भी स्पष्ट होगा कि क्या यह एक प्रशासनिक चूक थी या किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर ऐसा किया गया। उन्होंने आगे बताया कि इमरजेंसी में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों का नियमित रूप से स्थानांतरण होता रहता है। इसके अतिरिक्त, कई मेडिकल छात्र भी वहां मौजूद रहते हैं। इस पूरे मामले की पड़ताल की जा रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मिले थे एट्रोपिन व एडरोप्रो के एक्सपायर्ड इंजेक्शन
जिला अस्पताल की इमरजेंसी से एट्रोपिन और एडरोप्रो नामक दो प्रकार के सात एक्सपायर्ड इंजेक्शन बरामद हुए थे। इन इंजेक्शनों पर दिसंबर 2025 की एक्सपायरी तिथि अंकित थी। एट्रोपिन इंजेक्शन का उपयोग हार्ट रोगियों को सीपीआर देते समय उनकी हार्ट रेट बढ़ाने के लिए किया जाता है। वहीं, एडरोप्रो इंजेक्शन का प्रयोग तब किया जाता है जब मरीज का ब्लड प्रेशर कम हो जाता है, जिससे उसे तत्काल राहत मिलती है। डॉक्टरों का मानना है कि एक्सपायर्ड इंजेक्शन में मौजूद दवा का प्रभाव काफी कम हो जाता है और यह मरीजों के लिए प्रभावी नहीं रहता, बल्कि हानिकारक भी हो सकता है।