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Etawah News: 50 लाख की संपत्ति डेढ़ लाख में बेचने का आरोप

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jan 2026 12:27 AM IST
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Accused of selling property worth Rs 50 lakh for Rs 1.5 lakh
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ऊसराहार के कठौतिया निवासी गल्ला व्यापारी ने जमीन का फर्जी बैनामा कराने का लगाया आरोप
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जिम्मेदार बोले-बैनामा लेखक को नोटिस जारी कर किया गया है
संवाद न्यूज एजेंसी
ताखा। तहसील क्षेत्र में कागजों की हेराफेरी और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन की धोखाधड़ी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। ऊसराहार थाना क्षेत्र के कठौतिया निवासी गल्ला व्यापारी राकेश कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया है कि उनकी लगभग 50 लाख रुपये कीमत की चार बीघा जमीन को महज डेढ़ लाख रुपये में बेच दिया गया है।
आरोप है कि इसी जमीन पर कथित तौर पर बैंक की मिलीभगत से केसीसी योजना के तहत आठ लाख रुपये का लोन भी ले लिया गया है। घटना जमीन के असली मालिक की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर अंजाम दी गई है।
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पीड़ित राकेश कुमार गुप्ता के अनुसार, वे कई वर्षों से भरथना में रहकर अपना गल्ला आढ़त का व्यवसाय कर रहे हैं। इसी दौरान, उनकी अनुपस्थिति का लाभ उठाते हुए, कुदरैल मौजा स्थित उनकी चार बीघा जमीन का 20 सितंबर को एक सुनियोजित साजिश के तहत फर्जी बैनामा किया गया।
आरोप है कि राकेश कुमार निवासी भरतिया ने खुद को असली राकेश कुमार बताकर आधार कार्ड का दुरुपयोग किया और शिरोमणि सिंह यादव निवासी भिटारा थाना भरथना के नाम जमीन का बैनामा कर दिया। बैनामा निष्पादित करते समय, विक्रेता ने अपने पिता का नाम बदलकर खुद को असली मालिक दर्शाया, जबकि वास्तविक जमीन मालिक को इस पूरी प्रक्रिया की भनक तक नहीं लगी। ताखा तहसील के प्रभारी सब-रजिस्ट्रार राजीव ने बताया कि मामला संज्ञान में है और बैनामा लेखक को नोटिस जारी कर तलब किया गया है। जांच की जा रही है।
कीमत और सरकारी मूल्य में भारी अंतर
राकेश गुप्ता ने बताया कि चार बीघा जमीन की वास्तविक कीमत करीब 50 लाख रुपये है, जबकि सरकारी मूल्य भी लगभग आठ लाख रुपये है। इन दोनों महत्वपूर्ण आंकड़ों के बावजूद, बैनामा में जमीन को मात्र डेढ़ लाख रुपये में बेचा हुआ दिखाया गया है। स्टांप शुल्क भी सरकारी कीमत के अनुसार ही लगाया गया, जिससे पूरे प्रकरण पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बैनामा में भुगतान को लेकर भी गड़बड़ी सामने आई है। एक लाख रुपये का भुगतान मोबाइल से दिखाया गया है, लेकिन बैनामा में दर्ज मोबाइल नंबर खरीदार के भाई का बताया जा रहा है, न कि विक्रेता का। इसके अतिरिक्त, आधार कार्ड में निवासी भरतिया दर्शाया गया है, जबकि पीड़ित कठौतिया का निवासी है।
बैंक की संदिग्ध भूमिका और गिरोह का शक
पीड़ित ने आशंका जताई है कि यह मामला एक बड़े गिरोह की ओर इशारा करता है, जिसमें बैनामा लेखक से लेकर संबंधित सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है। मामले की गंभीरता तब और बढ़ जाती है जब पता चलता है कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, भरथना से उनकी लगभग 15 बीघा जमीन पर आठ लाख रुपये का केसीसी लोन भी ले लिया गया है। आरोप है कि बैंक ने लोन स्वीकृत करते समय सर्च प्रक्रिया में घोर लापरवाही बरती। राकेश गुप्ता ने बताया कि मामले की शिकायत मुख्यमंत्री को भेज दी है।
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